आर्थिक गतिविधियां शुरू होंगी तो लॉकडाउन में जितने लोग कोरोनावायरस से बीमार हुए थे उससे ज्यादा संख्या में लोग बीमार हो सकते हैं इसलिए सरकार को भारतीय डेटा पर आधारित नीति बनाने की जरूरत पड़ेगी
हवाई यात्रा के नियमों को लेकर अस्पष्टता से यात्रियों को क्या परेशानियां हुईं यह सामने आ चुका है, इसलिए बेहतर यही होगा कि उन्हें एजेंसियों और अधिकारियों की ओर से पर्याप्त समय दिया जाए ताकि वे यात्रा की योजना ठीक से बना सकें.
भारत में कोविड-19 वायरस का भविष्य क्या है और वह अर्थव्यवस्था तथा सरकारी राजस्व पर क्या असर डालेगा, यह सब अनिश्चित है इसलिए अभी ही सारे उपाय न आजमाना विवेकसम्मत है.
ऐसा लगता है कि सरकार शहरों की भीड़ कम करने की कोशिश कर रही है, क्योंकि शहरी क्षेत्रों के कल्याण और बेरोज़गारी सहायता के लिए कोई कार्यक्रम घोषित नहीं किए गए.
बिना कोलेटरल के एमएसएमई लोन के लिए सरकार की 100 प्रतिशत सॉवरेन गारंटी, क़र्ज़दारों को ये रक़म कभी न लौटाने के लिए प्रोत्साहित करेगी, और बैंकों को भी भविष्य में उन्हें क़र्ज़ देने के लिए हतोत्साहित करेगी.
कोविड-19 वायरस का मुक़ाबले करते हुए सरकार और लोगों के व्यवहारों में तो बदलाव आया ही है, आर्थिक तौरतरीके भी बदलेंगे. अब कृषि और ग्रामोद्योग ही भारत को मजबूती दे सकते हैं.
सवाल यह है कि इस बड़े पैकेज के लिए पैसा कहां से आएगा? टैक्स से कमाई और घरेलू उधार में इस साल गिरावट ही आएगी इसलिए भारत को विदेश से उधार लेने के लिए तैयार होना पड़ेगा.
अगर कोरोनावायरस का वैक्सीन मिलने तक लॉकडाउन जारी रखने का फैसला किया जाता है तब अर्थव्यवस्था, बाज़ार, और मुद्रा नीति की हमारी समझ को बिलकुल अनजानी चुनौती का सामना करना पड़ेगा.
सामाजिक दूरी कोरोनावायरस के खिलाफ सबसे कारगर उपाय है लेकिन इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था की हालत और अधिक बिगड़ेगी. हालांकि भारत कई अन्य विकासशील देशों के मुक़ाबले बेहतर स्थिति में है.