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Thursday, 8 January, 2026
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श्रमिक क्यों शहरों को लौट रहे हैं और ये अर्थव्यवस्था को कैसे पटरी पर लाएंगे

आर्थिक गतिविधियां शुरू होंगी तो लॉकडाउन में जितने लोग कोरोनावायरस से बीमार हुए थे उससे ज्यादा संख्या में लोग बीमार हो सकते हैं इसलिए सरकार को भारतीय डेटा पर आधारित नीति बनाने की जरूरत पड़ेगी

एक देश, नियम कई- ऐसी भ्रामकता और अराजकता भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही है

हवाई यात्रा के नियमों को लेकर अस्पष्टता से यात्रियों को क्या परेशानियां हुईं यह सामने आ चुका है, इसलिए बेहतर यही होगा कि उन्हें एजेंसियों और अधिकारियों की ओर से पर्याप्त समय दिया जाए ताकि वे यात्रा की योजना ठीक से बना सकें.

तीन बड़ी अनिश्चितताएं जिसने निर्मला सीतारमण को आर्थिक पैकेज में सारे विकल्पों का उपयोग करने से रोक रखा है

भारत में कोविड-19 वायरस का भविष्य क्या है और वह अर्थव्यवस्था तथा सरकारी राजस्व पर क्या असर डालेगा, यह सब अनिश्चित है इसलिए अभी ही सारे उपाय न आजमाना विवेकसम्मत है.

क्या मोदी सरकार भारत के शहरों की भीड़ कम करना चाहती है, इसके आर्थिक पैकेज से तो यही लगता है

ऐसा लगता है कि सरकार शहरों की भीड़ कम करने की कोशिश कर रही है, क्योंकि शहरी क्षेत्रों के कल्याण और बेरोज़गारी सहायता के लिए कोई कार्यक्रम घोषित नहीं किए गए.

मोदी सरकार के 20 लाख करोड़ के पैकेज ने एमएसएमई क़र्ज में सुधारों का अवसर खो दिया है

बिना कोलेटरल के एमएसएमई लोन के लिए सरकार की 100 प्रतिशत सॉवरेन गारंटी, क़र्ज़दारों को ये रक़म कभी न लौटाने के लिए प्रोत्साहित करेगी, और बैंकों को भी भविष्य में उन्हें क़र्ज़ देने के लिए हतोत्साहित करेगी.

लॉकडाउन हटने के बाद क्या ग्रामीण अर्थव्यवस्था को हो सकता है फायदा

कोविड-19 वायरस का मुक़ाबले करते हुए सरकार और लोगों के व्यवहारों में तो बदलाव आया ही है, आर्थिक तौरतरीके भी बदलेंगे. अब कृषि और ग्रामोद्योग ही भारत को मजबूती दे सकते हैं.

कोविड-19 संकट के बीच अर्थव्यवस्था में जान डालने के लिए भारी-भरकम वित्तीय पैकेज की घोषणा ना करना मोदी सरकार की समझदारी है

सवाल यह है कि इस बड़े पैकेज के लिए पैसा कहां से आएगा? टैक्स से कमाई और घरेलू उधार में इस साल गिरावट ही आएगी इसलिए भारत को विदेश से उधार लेने के लिए तैयार होना पड़ेगा.

लॉकडाउन के खत्म होने की अनिश्चितता के बीच ‘मुद्रास्फीति टैक्स’ ही सरकार को उनकी मदद करने देगा जिनके पास कोई बचत नहीं

अगर कोरोनावायरस का वैक्सीन मिलने तक लॉकडाउन जारी रखने का फैसला किया जाता है तब अर्थव्यवस्था, बाज़ार, और मुद्रा नीति की हमारी समझ को बिलकुल अनजानी चुनौती का सामना करना पड़ेगा.

भारतीय युवा कोरोना से लड़ने वाले योद्धा बनकर अर्थव्यवस्था को ला सकते हैं पटरी पर

लॉकडाउन में छूट देने के बाद बुज़ुर्गों का खास ख्याल रखना होगा लेकिन देश की युवा श्रमिक आबादी, जो दुनिया में सबसे बड़ी है, बन सकती है बड़ी पूंजी. 

भारत कैसे कोरोनावायरस के कारण पैदा हुई वैश्विक मंदी की स्थिति से खुद को बचा सकता है

सामाजिक दूरी कोरोनावायरस के खिलाफ सबसे कारगर उपाय है लेकिन इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था की हालत और अधिक बिगड़ेगी. हालांकि भारत कई अन्य विकासशील देशों के मुक़ाबले बेहतर स्थिति में है.

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