Monday, 6 December, 2021
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कोरोना लॉकडाउन में लोगों और अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए मोदी सरकार को ये 3 कदम तो उठाने ही चाहिए

स्वास्थ्य सेवाओं को अपनी बेहतर तैयारी के लिए लॉकडाउन से मदद तो मिलेगी मगर करोड़ों लोग बेरोजगार और बदहाल हो जाएंगे. बहरहाल, सरकार ने 1.7 लाख करोड़ के पैकेज की जो घोषणा की है उसे राहत पहुंचाने का शुरुआती कदम माना जा सकता है

बजट में अर्थव्यवस्था के लिए कोई बड़ी राजकोषीय पहल नहीं की गई पर सरकार के पास आगे ऐसा करने का विकल्प

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास कर, राजस्व और सरकारी व्यय से असंबद्ध नीतिगत और विधायी बदलावों को लेकर बहुत कुछ करने का विकल्प है.

निर्मला सीतारमण को बजट में विश्वसनीय आंकड़ों के साथ राजकोषीय अनुशासन पर ज़ोर देना चाहिए

राजकोषीय विस्तार वैसे तो अर्थव्यवस्था में सुस्ती के दौरान ही किया जाना चाहिए, पर उन आंकड़ों के आधार पर चर्चा बेमतलब है जिन पर कि लोग यकीन नहीं करते हों.

‘एनआइपी’ की 102 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को पूरा करना है तो दीर्घकालिक घरेलू बचत को बढ़ावा देना होगा

पांच खरब डॉलर वाली अर्थव्यवस्था बनने के लिए ‘नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन’ नामक एक कार्यक्रम पेश किया गया है लेकिन इसके लिए आवश्यक पैसे को लंबे समय तक ताले में बंद रख पाना एक चुनौती होगी.

जीडीपी में गिरावट रोकने का कोई झटपट उपाय क्यों नहीं है

नीतियां ज़मीनी वास्तविकताओं की समझ वाले विशेषज्ञों द्वारा, पर्याप्त विचार-विमर्श के बाद बनाई जानी चाहिए. नेताओं को चाहिए कि वे इनकी जिम्मेदारी लें और समय रहते बदलावों के बारे में कारोबारियों को सूचित करें.

निर्मला सीतारमण का पहला बजट कैसा होगा, इसका सुराग भाजपा के घोषणापत्र में है

मोदी जब 2014 में सत्ता में आए थे, तो अरुण जेटली के पहले बजट में भाजपा के घोषणापत्र के वादे प्रतिबिंबित हुए थे. इस बार भी वैसा ही होने की उम्मीद है.

ईसीए को खत्म करने पर ही कृषि आय बढ़ सकेगी

भारत में औपचारिक गोदामों और अन्नागारों की कमी में आवश्यक वस्तु अधिनियम निर्मित भय के माहौल की भूमिका देखी जा सकती है.

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नागालैंड में हत्याओं के बाद पूर्वोत्तर में AFSPA हटाने की मांग ने फिर पकड़ा जोर

‘मणिपुर वीमेन गन सर्वाइवर्स नेटवर्क’ और ‘ग्लोबल अलायंस ऑफ इंडिजिनस पीपल्स’ की संस्थापक बिनालक्ष्मी नेप्राम ने आफस्पा को 'औपनिवेशिक कानून' बताते हुए कहा कि यह सुरक्षा बलों को 'हत्या करने का लाइसेंस' देता है.

लास्ट लाफ

‘फ्री स्पीच चैंपियन’ ममता का बीता हुआ कल और मोदी मुक्का मारने के बजाए चबाने का मज़ा लेते हैं

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए पूरे दिन के सबसे अच्छे कार्टून