बाल रोग विशेषज्ञ लक्षणात्मक इलाज और संतुलित आहार पर ज़ोर देते हैं. उनका कहना है कि पात्र अवयस्कों को टीका लगवाना ज़रूरी है, और वो ये भी मानते हैं कि ओमिक्रॉन के दीर्घकालिक प्रभावों का अंदाज़ा लगाना अभी जल्दबाज़ी होगी.
राज्य के अधिकारियों का कहना है कि कम टीकाकरण दर आंशिक रूप से जनसंख्या के आंकड़ों में विसंगतियों के कारण है, जिससे सरकार का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है, लेकिन टीकाकरण में सुधार की आवश्यकता है.
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, देश में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 17,36,628 हो गई है, जो कुल मामलों का 4.62 प्रतिशत है.
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि ‘ओमीक्रॉन’ के महाराष्ट्र में सबसे अधिक 1,738 मामले सामने आए, इसके बाद पश्चिम बंगाल में 1,672, राजस्थान में 1,276, दिल्ली में 549, कर्नाटक में 548 और केरल में 536 मामले सामने आए हैं.
डॉक्टरों का कहना है कि ये कमी मुख्य रूप से NEET PG 2021 काउंसलिंग में देरी से पैदा हुई है. लेकिन सरकारी डॉक्टरों में अचानक तेज़ी फैले कोविड संक्रमण ने, संकट को और बिगाड़ दिया है.
‘आर-वैल्यू’ यह इंगित करती है कि कोविड-19 कितनी तेजी से फैल रहा है. यह 25 दिसंबर से 31 दिसंबर तक राष्ट्रीय स्तर पर 2.9 के करीब थी, जबकि 1 जनवरी से 6 जनवरी के बीच यह चार थी.
अभियान पिछले साल 16 जनवरी से शुरू हुआ था, जब पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों को टीके की खुराकें दी गईं थी. इसके बाद अग्रिम मोर्चा के कर्मियों के लिए टीकाकरण दो फरवरी से शुरू हुआ था.