भारत में 82 फीसदी लोग किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिन्हें कोरोना से संक्रमित होने के बाद पूरी तरह से ठीक होने में छह महीने से कम समय लगा. वहीं, 6 फीसदी ने ऐसे लोगों के जानने की बात कही जिन्हें ठीक होने में छह महीने से एक साल तक का वक्त लगा.
जीवन बीमा के दावों में हुई यह भारी वृद्धि ‘अतिरिक्त मृत्यु दर’ के बारे में व्यक्त किये जा रहे संदेहों की पुष्टि करती है, लेकिन यह उन अनुमानों के आस-पास भी नहीं है, जो आधिकारिक आंकड़ों की तुलना में वास्तव में हुई मौतों को 6-10 गुना अधिक तक बताते हैं.
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, देश में कोविड-19 से 1,241 और लोगों की मौत के बाद, संक्रमण से जान गंवाने वालों की कुल संख्या बढ़कर 5,06,520 हो गई.
इंडियन नर्सिंग काउंसिल का डाटा दर्शाता है कि 2020-21 में पहली कोविड लहर के दौरान बीएससी नर्सिंग के लिए 99% और जनरल नर्सिंग और मिडवाइफरी डिप्लोमा के लिए 91% सीटें भर गई थीं.
सुबह सात बजे तक मिली सूचनाओं के अनुसार, पिछले 24 घंटों में टीके की 53.61 लाख से ज्यादा खुराकें दी गई हैं. अभी तक टीके की कुल 170.87 करोड़ (1,70,21,72,615) खुराक लगायी गयी हैं.
देश में कोविड-19 के 71,365 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 4,24,10,976 हो गई. वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 8,92,828 रह गई.
अगले वीकेंड तक बांग्लादेश में एक चुनी हुई सरकार बन जाएगी. यह भारत के लिए मौका है कि वह चुनाव वाले पश्चिम बंगाल और असम में ‘घुसपैठिया’ वाली भाषा को नरम करके बिगड़े रिश्तों को फिर से ठीक करे.