स्वास्थ्य मंत्री ने कहा टीकों को प्राथमिकता के आधार पर उन देशवासियों को देने में सक्षम होंगे जिन्हें सरकारी एवं निजी क्षेत्र में खतरा है. सरकार पहले ही इसकी योजना को सार्वजनिक कर चुकी है.
दिप्रिंट के ‘ऑफ द कफ़’ में शेखर मांडे कोविड-19 के लिए भारत के गणितीय सुपरमॉडल, कम आय और अधिक आय वाले देशों पर महामारी के असर, और ‘फेलूदा’ के बारे में बात करते हैं.
हैदराबाद और चंडीगढ़ के अस्पतालों में काम कर रहे वैज्ञानिकों ने वार्ड में मौजूद हवा के नमूना का उपयोग किया जो वायरस कणों को इकट्ठा कर सकता है, और फिर आरटी-पीसीआर का उपयोग करके उनकी मौजूदगी को देखा.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि वह लगभग सात दिनों के भीतर कोविड-19 टीके को उपलब्ध कराने के लिए तैयार है लेकिन टीके की शुरूआत की तारीख पर अंतिम फैसला अभी लिया जाना है.
कोविशील्ड को मंजूरी की शर्तों के बारे में पूछे जाने पर पूनावाला ने दिप्रिंट को बताया, ‘(भारत में वैक्सीन की मंजूरी के लिए) शर्त केवल यही है कि हम इसे अभी निजी बाजार में बेच या निर्यात नहीं कर सकते हैं.’
कोविन एप को फिलहाल सार्वजनिक तो नहीं किया गया है लेकिन यह सिविल सेवकों से लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली प्रबंधक, वैक्सीनेटर और संभावित लाभार्थी तक हर स्तर के यूजर के लिए बहुत उपयोगी है.
भारत बायोटेक के एमडी डॉ. कृष्णा इल्ला का कहना है कि उन्होंने लगभग 25,000 प्रतिभागियों पर परीक्षण से जुड़ा उत्कृष्ट सेफ्टी डाटा दिया है और इसका प्रभावकारिता संबंधी डाटा फरवरी-मार्च तक उपलब्ध होगा.
मंत्रालय ने बताया कि इन सभी लोगों को अलग संबंधित राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित स्वास्थ्य केंद्र में पृथक—वास में रखा गया है और उनके संपर्कों का पता लगाया जा रहा है.
मोदी ने कहा, ‘भारत में दुनिया का सबसे बड़ा कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम शुरू होगा. इसके लिए, देश को अपने वैज्ञानिकों एवं तकनीशियनों के योगदान पर गर्व है.’
ताशकंद समझौते के दौरान सोवियत संघ ने प्रोटोकॉल पर खास ध्यान दिया. दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के लिए व्यवस्थाएं बिल्कुल एक जैसी थीं. इस वार्ता को अमेरिका और ब्रिटेन का भी समर्थन मिला था.