अध्ययन में पता चला है कि जिन्हें कोविड-19 का संक्रमण पहले हो चुका है वह कम से कम पांच महीनों के लिए प्रतिरोधक क्षमता रहती है लेकिन इसके बावजूद स्वस्थ हुए रोगी वायरस के वाहक बन सकते हैं.
पहले चरण में, मोदी सरकार 4 प्राथमिकता समूहों में 30 करोड़ लोगों को शामिल करेगी, जिनमें स्वास्थ्य सेवा, फ्रंटलाइन वर्कर्स, 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग और कोमॉर्बिड मामले शामिल हैं.
कुछ डॉक्टरों को टीकों की सुरक्षा और प्रभावकारिता को लेकर आशंकाएं हैं लेकिन उनका कहना है कि अभी इस बारे में जानकारी और जागरूकता अभियान वक्त का तकाजा है.
आईआईटी मद्रास के रिसर्चर्स की स्टडी से पता चलता है, कि हवा में तैर रहे वायरसों के, ऐसे लोगों के फेफड़ों में जमा होने का ज़्यादा ख़तरा होता है, जो धीमे सांस लेते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया है कि 3 करोड़ प्राथमिकता वाले लाभार्थियों को मुफ्त वैक्सीन देने का प्रावधान किया गया है. लेकिन इसने अन्य 27 करोड़ के लिए सवाल खड़ा कर दिया है.