नोएडा सेक्टर-16 के फिल्म सिटी में मारवाह स्टूडियोज़ के एक शांत कोने में छिपा है यह कम्युनिटी रेडियो स्टेशन 107.4 FM, जो मिल-जुलकर एक नई पहचान गढ़ रहा है.
नोएडा की शहरी योजना में सबसे बड़ी खामियां अट्टा जैसी जगहें हैं जहां रिहायशी और वाणिज्यिक दोनों एक साथ मौजूद हैं. यह भीड़भाड़ और यातायात के लिए एकदम सही नुस्खा है.
फायरसाइड वेंचर्स ने लगभग छह मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण स्टार्ट-अप में निवेश किया है, और कई और भी निवेश करने की योजना बना रहा है. एक वीपी के अनुसार, अगली बड़ी चीज उच्च प्रदर्शन वाले जिम हैं.
दिल्ली के शालीमार बाग में स्थित शीश महल 1653 में मुगल सम्राट शाहजहां की पत्नी इज़्ज़-उन-निसा बेगम ने बनवाया था. इसे कश्मीर के प्रसिद्ध शालीमार बाग की याद में बनवाया गया था.
व्यवस्थागत बहिष्कार का सामना कर रहे गुजरात के कई दलित परिवार बौद्ध धर्म की ओर रुख कर रहे हैं. लेकिन नौकरशाही बाधाओं के कारण इन धर्मांतरणों को आधिकारिक मान्यता मिलने में देरी हो रही है.
सुगत श्रीनिवासराजू की किताब ‘दि कॉनसाइंस नेटवर्क: ए क्रोनिकल ऑफ रेजिस्टेंस टु ए डिक्टेटरशिप’ अमेरिका गए उन मेधावी भारतीयों की कहानी कहती है जिन्होंने अपने ‘अमेरिकी सपने’ को जोखिम में डालकर इमरजेंसी का विरोध किया था.
1970 के दशक में एक औद्योगिक टाउनशिप के रूप में बनाई गई नोएडा अब बदल चुका है. यह अब दिल्ली का धूल-धक्कड़ में लिपटा पड़ोसी नहीं रहा, जहां सिर्फ फैक्ट्रियां देश की अर्थव्यवस्था के लिए सामान बनाती थीं.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.