2000 के दशक की शुरुआत में दानापुर में एक कट्ठा की कीमत 10 लाख रुपये से ज़्यादा नहीं थी. आज, यह रेजिडेंशियल उद्देश्यों के लिए एक करोड़ रुपये से ज़्यादा में बिकता है और बिजनेस के काम के लिए इसकी कीमत 1.5 से दो करोड़ रुपये तक हो सकती है.
हरियाणा में नशा मुक्ति केंद्र एक नया उभरता हुआ क्षेत्र बन गया है. प्राइवेट सेंटर पैसे कमाने की मशीन हैं, जबकि कई परिवार उन्हें अपने संघर्षरत प्रियजनों को राहत देने के तरीके के रूप में देखते हैं.
गुरुग्राम की शानदार DLF सिटी में कई सालों से अवैध होटल और कारोबार चल रहे हैं. अधिकारियों ने पहले भी इस पर रोक लगाई है, लेकिन इस बार वह इसको जड़ से खत्म करने की कसम खा चुके हैं.
लुधियाना की फैक्ट्रियों में काम करने से लेकर दिहाड़ी पर राजमिस्त्री का काम करने तक, बिहार से उत्तर प्रदेश आने वाले मुस्लिम प्रवासी वह काम करने के लिए आगे आ रहे हैं, जो स्थानीय पंजाबी युवा नहीं करना चाहते.
गुजरात के मर्चेंट होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में 19-वर्षीय दलित छात्रा की आत्महत्या ने संस्थान को उत्पीड़न, धमकाने और दुर्व्यवहार के आरोपों के कारण जांच के दायरे में ला दिया है.
बिहार के पारंपरिक मखाना उत्पादक क्षेत्रों दरभंगा और मधुबनी से आगे निकलकर कोसी-सीमांचल क्षेत्र 3,000 करोड़ की इंडस्ट्री में इसकी खेती करने वाला अग्रणी क्षेत्र बन गया है.
HAL इंजीनियरों को विदेशों में और IITs तथा IIMs जैसे प्रमुख संस्थानों में प्रशिक्षण देने पर भारी निवेश करता है, लेकिन उनका पूरा और सही उपयोग नहीं हो पाता.