फैकल्टी का कहना है कि जब से दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने CUET पर बेस्ड केंद्रीकृत एडमिशन सिस्टम अपनाया है, हर साल एडमिशन प्रक्रिया बेवजह लंबी खिंच रही है.
कुल श्रेणी में आईआईटी मद्रास के बाद आईआईएससी, आईआईटी बॉम्बे, दिल्ली, कानपुर, खड़गपुर, रुड़की, एम्स दिल्ली, जेएनयू और बीएचयू रहे शामिल. कुल 14,163 संस्थानों ने रैंकिंग में हिस्सा लिया.
कम्प्रिहेंसिव मॉड्यूलर सर्वे में सामने आया कि भारत में माता-पिता औसतन हर साल एक बच्चे की पढ़ाई पर 12,616 रुपये खर्च करते हैं, रिपोर्ट में लड़के और लड़कियों की पढ़ाई पर खर्च में फर्क भी दिखा.
मॉड्यूल इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि विभाजन भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक चेतावनी है. "शासकों की दूरदर्शिता की कमी राष्ट्रीय आपदा बन सकती है. शांति पाने के लिए हिंसा को रियायत देना हिंसक समूहों की भूख को और बढ़ाता है."
एक तरफ जहां भारत में अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटियों की एंट्री और विदेशों में IITs का विस्तार हो रहा है, वहीं कई सरकारी संस्थान NEP 2020 की बुनियादी सिफारिशें लागू करने में भी जूझ रहे हैं.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति ज़मीनी स्तर पर कैसे लागू हो रही है, इसे समझने के लिए दिप्रिंट ने दिल्ली के एक मॉडल प्राइवेट स्कूल और हरियाणा के दो सरकारी स्कूलों का दौरा किया.
प्रवासी भारतीय सम्मेलन से लेकर कुंभ मेलों तक, भारत ने दिखाया है कि वह जटिल आयोजनों का प्रबंधन कर सकता है. इस क्षमता को बाद में उसके G20 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक मंच पर भी मजबूती मिली.