यूके के पहले सी लॉर्ड और नेवी चीफ बेन की का कहना है कि उनका देश भारत के साथ साझेदारी चाहता है, जिसमें नेवल इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन और जेट इंजन के लिए तकनीकी हस्तांतरण भी शामिल है.
आजादी के बाद के शुरूआती सालों में, भारत ने विरासत में मिली अपनी औपनिवेशिक सैन्य संरचनाओं को ध्यान में रखते हुए यूके को चुना. बाद में, जब भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान के अमेरिकी लड़ाकू विमानों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी तो सोवियत संघ ने अतिरिक्त प्रोत्साहनों के साथ कदम रखा.
कारगिल रिव्यु कमिटी द्वारा की गई सिफारिश के बाद, वायु सेना ने साल 2007 में हवाई निगरानी के उद्देश्य से 300 करोड़ रुपये से अधिक के 2 एयरोस्टैट्स खरीदे थे. आईएएफ निगरानी संबंधी कार्यों के लिए अवाक्स को ही तरजीह देती है.
पूंजीगत बजट 1.52 लाख करोड़ से बढ़ाकर 1.62 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. बजट में नेवी और आर्मी के लिए पर्याप्त वृद्धि देखी जा रही है लेकिन विमान, एयरो इंजन की खरीद के लिए आवंटन कम हो गया है.
लॉकहीड मार्टिन के इंडियन वाइस प्रेसिडेंट विलियम ब्लेयर ने कहा कि IAF के मल्टी-रोल लड़ाकू विमान प्रोग्राम ने देश में लड़ाकू विमान बनाने के लिए मुख्य स्रोत का काम किया है.
75वें सेना दिवस पर, यांग्स्ते में LAC के पास 'दुर्गम' क्षेत्रों में सेवा के लिए एक पहाड़ों पर पाए खच्चर - हूफ नंबर -122 - को COAS प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया.
इस अंतिम बेड़े को वर्ष के अंत तक सेवामुक्त कर दिया जाएगा. लंबी दूरी की निगरानी और पनडुब्बी रोधी युद्धक विमान ने 1978 में अपनी ताकत दिखाई, जब इसने एयर इंडिया जंबो के मलबे का पता लगाया.