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Sunday, 22 March, 2026
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समाज-संस्कृति

मुसहर बुधनी की ‘भोर’ में क्या उजियारा आएगा, सैनिटेशन से लेकर पलायन जैसे मुद्दों को समेटती फिल्म

एमएक्स प्लेयर पर 5 फरवरी को रिलीज हुई कमाख्या नारायण सिंह की 'भोर' सैनिटेशन जैसे गंभीर विषय पर बनी एक क्रिटिकली अकलेम्ड फिल्म है जिसकी इन दिनों काफी चर्चा हो रही है.

राम मंदिर की लड़ाई के दौरान क्या संदेश भेजा था बूटा सिंह ने अशोक सिंघल को

मुस्लिम पक्ष का दावा था कि सदियों से विवादित जमीन उनके कब्जे में रही है. ऐसे में परिसीमन कानून के तहत इतना लंबा समय गुजर जाने के बाद हिंदू पक्षकार विवादित भूमि पर अपना हक नहीं जता सकते थे. तब गृहमंत्री बूटा सिंह ने अशोक सिंघल को संदेश भेजा था.

नेहरू बहुतों को पसंद और कुछ को नापसंद लेकिन वो लगातार प्रासंगिक हैं- जावेद अख्तर

राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित ‘कौन हैं भारत माता ?’ किताब के संपादक पुरुषोत्तम अग्रावल ने कहा कि नेहरू वास्तव में आलोचनात्मक विवेक से संपन्न समाज बनाना चाहते थे.

पेट्रोल- डीजल के बढ़ते दामों पर सितारों की चुप्पी से बिफरे पटोले, बोले- चुप क्यों हैं अमिताभ और अक्षय

महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले ने कहा कि अगर अभिनेता अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार ईंधन की कीमतों में वृद्धि के मुद्दे पर कोई रुख नहीं अपनाते हैं तो राज्य में उनकी फिल्मों के प्रदर्शन और शूटिंग की इजाजत नहीं दी जाएगी.

इस टूलकिट से ख़ुद को नियमित करेंगे नेटफ्लिक्स, अमेज़ॉन प्राइम, डिज़्नी+ हॉटस्टार

इंटरनेट एवं मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के रोडमैप से, 17 स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स द्वारा दस्तख़त किए गए, स्वनियमन कोड को लागू किया जाएगा, और सरकार की ओर से उठाए गए मुद्दों को संबोधित किया जाएगा.

जंगल से बाघों के खत्म होने और जिंदगी चलाने की जद्दोजहद है ‘आखेट’

पलामू के खूबसूरत जंगलों में हुई फिल्म की शूटिंग इसे बेहतर दृश्य देती हैं जो दर्शकों को भाती है लेकिन कहानी के डॉयलॉग काफी कमजोर हैं और इस पर काम किए जाने की जरूरत थी.

कौन हैं भारत माता?- कई असहमतियों के बावजूद जवाहरलाल नेहरू के बारे में क्या सोचते थे सरदार पटेल

लेखक पुरुषोत्तम अग्रवाल द्वारा लिखित, संपादित पुस्तक 'कौन हैं भारत माता' राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गयी है. यह पुस्तक स्वाधीनता आंदोलन के नायक और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की बौद्धिक विरासत से रू-ब-रू कराती है.

‘अमेठी का डंका, बिटिया प्रियंका’ नारा देने वाले जगदीश पीयूष का जाना अवधी के लिए बड़ा नुकसान

1984 में 'अमेठी का डंका, बिटिया प्रियंका' और ‘अमेठी का बिगुल, बेटवा राहुल’ जैसे लोकप्रिय नारे भी पहले-पहल जगदीश पीयूष ने ही दिये थे.

महात्मा गांधी की हत्या के बाद लगी पाबंदी का आरएसएस पर क्या प्रभाव पड़ा

1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध ने संगठन के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

‘उसने गांधी को क्यों मारा’- गांधी हत्या के पीछे के ‘वैचारिक षड्यंत्र’ को उजागर करती किताब

गांधी की हत्या, उसके कारण, साजिश और 'विकृत मानसिकता' के उभार को अपनी हालिया किताब 'उसने गांधी को क्यों मारा ' में लेखक अशोक कुमार पांडेय ने प्रमाणिक स्त्रोतों के जरिए दर्ज किया है.

मत-विमत

‘विश्वगुरु’ बनने का हमारा-आपका भ्रम, दुनिया को देखने की समझ बिगाड़ रहा है

एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.

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राजनीति

देश

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने मत्स्य परियोजना के लिए केंद्रीय अनुदान पर प्रधानमंत्री का आभार जताया

जम्मू, 21 मार्च (भाषा) जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को मत्स्य पालन विकास परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 111.66 करोड़ रुपये के...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.