योगेश ने ज्यादातर अपने गीत संगीतकारों द्वारा दिए गए धुनों पर लिखे. आनंद से मिली सफलता के बाद उनके गीतों ने रजनीगंधा, छोटी सी बात, मंजिल, मिली, बातों बातों में जैसी फिल्मों में जान फूंक दी.
हिंदी जगत के लेखक, गीतांजलि श्री को बुकर पुरस्कार मिलने को भारतीय भाषाओं के लिए एक बड़ी परिघटना मान रहे हैं और कह रहे हैं कि आज हिंदी की असल सुबह हुई है वहीं स्त्री लेखन और अनुवाद के लिए भी ये सम्मान बड़ी उपलब्धि है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्व-त्योहार या सर संघचालक द्वारा सालाना भाषण के समय अथवा अनेक शाखाओं के किसी समारोह के अवसर पर उपस्थित होनेवाले सभी सदस्यों को पूरी वरदी पहननी होती है.
उत्तर-पूर्व के सात राज्यों की बातें हिन्दी फिल्मों में कम हुई हैं. खासतौर से वहां की अशांति और हिंसा पर तो कायदे से कोई बात कभी हुई ही नहीं. बाकी भारत के लिए भी ये राज्य तस्वीरों में खूबसूरत और खबरों में डरावने मात्र ही रहे हैं.
दिप्रिंट ने पचास साल पहले बलात्कार की शिकार और आज भी न्याय का इंतजार कर रही मथुरा के बारे में पता लगाया. हालांकि, उसके मामले ने कानूनी सुधार की राह जरूर खोली थी.
कहानी यह है कि बरसों पहले मंजुलिका के भूत को एक कमरे में बंद कर के सारा परिवार कहीं और शिफ्ट हो गया. अब किसी वजह से ये लोग वापस उसी महल में रहने आए हैं तो ज़ाहिर है कि मंजुलिका भी छूटेगी और सब को डराएगी भी.
पंचायत के दूसरे सीजन को लेकर अलग-अलग रिव्यू भी आ गए हैं तो अब ठहर कर इस सीरीज के उन दो पहलुओं पर बात करना जरूर हो जाता है जिस पर अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई. पहला 'बदलाव' और दूसरा 'भाषाई शैली'.