आपको आश्चर्य नहीं होना चाहिए जब आप किसी फैशन शो में जाएं और वहां किसी का सहारा लिए एक बुजुर्ग महिला मेकअप किए आपके सामने आ जाए..आप तब भी मत चौंकिएगा यदि इस महिला के दांत न हो लेकिन वो किसी टूथपेस्ट के विज्ञापन में दिख जाए.
‘72 हूरें’ का यह टीजर बताता है कि किस तरह से कट्टरपंथी नौजवानों को यह कह कर बरगलाते हैं कि जिहाद का रास्ता उन्हें सीधा जन्नत में लेकर जाएगा जहां 72 कुंवारी हूरें उनकी सेवा में होंगी.
सुलोचना लाटकर, सुनील दत्त, देवानंद, राजेश खन्ना और फिर अमिताभ बच्चन की रील मां जिसने रियल को भी पीछे छोड़ दिया. बॉलीवुड में तक़रीबन 250 से भी अधिक फिल्मों में काम किया.
मर्लिन के कहानी को हर लेखक ने अपने हिसाब से लिखा, ऐसे जैसे मर्लिन वो शख़्स हो जिसकी कहानी वो अपने तरीके से सुनाना चाहते हो. मर्लिन वो बगीचा है जिसे लोग अपनी पसंद के फूल लगाकर देखना चाहते हैं.
चंद्रा का बेटा अपाहिज है जिसके इलाज पर वह बहुत पैसे खर्च रही है, लेकिन उसका पति मानता है कि स्थानीय देवताओं की पूजा यानी जागर करवाने से उनकी मुसीबतों का अंत होगा.
शिरीष खरे ने इस किताब में एकदम सहज और आडंबररहित भाषा का प्रयोग किया है जिससे कहानियों के फ्लो में कहीं कोई अड़चन नहीं आती. कहीं-कहीं अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग है जो गांव में पहुंची शहरी संस्कृति की झलक है.
पेश है दिप्रिंट का राउंड-अप कि कैसे उर्दू मीडिया ने पिछले सप्ताह के दौरान विभिन्न समाचार संबंधी घटनाओं को कवर किया और उनमें से कुछ ने इसके बारे में किस तरह का संपादकीय रुख इख्तियार किया.
पूरी तरह एक फैमिली फिल्म है ‘जोगीरा सा रा रा’. अगर आप घर में बोर हो रहे हैं, रिश्तेदार के यहां या फिर इस गर्मी में कहीं भी जाने का मूड नहीं है तो आप आराम से फिल्म देखने जा सकते हैं.
बीजेपी के मुख्यमंत्रियों में क्या गलत हो गया है? कई मुख्यमंत्रियों की ढीली-ढाली सरकार इस सोच से निकलती है कि चुनावी जीत तीन ‘एम’ की वजह से मिली—मोदी, बहुसंख्यकवाद और पैसा.