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Wednesday, 8 April, 2026
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जाते जाते अब निकल ही गया: कैसे नरेंद्र मोदी के हाथों से फिसला सियासी अफसाना

सरकार के लिए यह कोई असाधारण बात नहीं है कि वह अपने अंतिम या अंतिम के दो सालों में अलोकप्रिय हो। असाधारण क्या है? हमने कभी नहीं सोचा था कि यह सब,मास्टर कम्युनिकेटर नरेन्द्र मोदी के साथ होगा।

मोदी समर्थकों का अस्तित्व संकट में क्योंकि मसीहा मोदी के गिरने वाले हैं वोट

मसीहा के रूप में मोदी के मंसूबे कामयाब रहे तथा वाजपेई के अधिकतम वोट की तुलना में उन्होंने 5-7 प्रतिशत अधिक वोट जीते। लेकिन वर्तमान स्थिति के हिसाब से संतुलन बिगड़ सकता है।

इंदिरा गांधी के बाद अब मोदी शासन में कमज़ोर दिखाई दे रही हैं भारतीय संस्थाएं

एक सुव्यवस्थित समाज जो आर्थिक रूप से बेहतर करने की उम्मीद करता है और इसके नागरिकों द्वारा वह अपने मूलभूत संस्थानों को मजबूत करता है।

प्रेस की आज़ादी के लिए साथ लड़ो या मरो : भारतीय पत्रकारों के लिए मुश्किलों से भरा बैलेंस

मीडिया एक-दूसरे से असहमत हो सकती है, लड़-झगड़ सकती है और आलोचना कर सकती है। लेकिन यह तभी बची रह सकती है और पनप सकती है जब ये सब मतभेद भुलाकर एक होकर रहे, खासकर तब जब इसके प्रमुख सिद्धांतों पर हमले हो रहे हों|

अम्बेडकर की 10 धारणाएं जिनसे पता चलता है की भाजपा उनका सहयोजन नहीं कर सकती

अम्बेडकर के विचारों को मिटाने के लिए, उनकी प्रतिमा के आगे झुककर नमन करना पर्याप्त नहीं है। गहराइ के साथ वे भारत के दलितो के बीच में है।

कठुआ और उन्नाव:बलात्कार निपटारे के दो मामले जिन्होंने निर्भया विरोध प्रदर्शन को मज़ाक ठहरा दिया

पिछले कुछ सालो में लगातार इस प्रकार की होने वाली घटनाए , पराजय के ऊपर पराजय ।

चार चीज़ें जो भाजपा को 2019 में सपा-बसपा गठबंधन से लड़ने में काम कर सकती हैं

सपा-बसपा गठबंधन यह सुनिश्चित करता है कि ताजा स्मरण में 2019 एक दुर्लभ अवसर होगा: उत्तर प्रदेश में द्विघातीय प्रतियोगिता।

भारत में चुनाव जीतने के लिए क्यों कांग्रेस को इंग्लैंड की रानी से झगड़ा मोल लेना चाहिए

सबसे पुरानी पार्टी हमें नहीं बताती कि उसका दुश्मन कौन है, कौन उससे लड़ रहा है, तो यह पता चलना तो मुश्किल है कि वह दिखता कैसा है.

काश मोदी सरकार में थोड़े और गडकरी, गोयल या प्रभु होते

क्षमता और ऊर्जा के साथ स्पष्ट जनादेश को परिभाषित करने और लोगों का चयन करने में निपुणता है। अगर मोदी इस फार्मूले को इस्तेमाल करते रहे तो मोदी सरकार का रिकॉर्ड अधिक बेहतर हो जाएगा।

धर्म पर हावी हो रही जाति से मोदी और अमित शाह के हिंदुत्व एजेंडे पर मंडराया संकट

2014 में भाजपा ने जाति विभाजन की निति को पछाड़ दिया था लेकिन अब समय बदल चुका है। दलित गुस्से में हैं और 2019 के चुनावों के लिए पृष्ठभूमि तैयार होना चालू हो गई है।

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पानी से वीज़ा और सुरक्षा तक—हसीना के बाद आगे बढ़े भारत-बांग्लादेश संबंध

बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान की इस हफ्ते नई दिल्ली की दो दिन की यात्रा, एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ, को ‘बड़ा कूटनीतिक ब्रेकथ्रू’ माना जा रहा है.

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बारामती उपचुनाव: भाजपा ने उम्मीदवार का नामांकन वापस लेने के लिए उससे संपर्क नहीं किया है- कांग्रेस

मुंबई, आठ अप्रैल (भाषा) कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई ने बुधवार को कहा कि भाजपा के किसी भी नेता ने बारामती विधानसभा सीट के उपचुनाव...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.