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Sunday, 29 March, 2026
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जय जवान, जय किसान से लेकर CVC तक—शास्त्री ने जो कहा, वही किया, लेकिन भ्रष्टाचार मिटाना आसान नहीं था

लाल बहादुर शास्त्री द्वारा बनाई गई संथानम कमेटी की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि जो भ्रष्टाचार पहले सिर्फ निचले स्तर के अफसरों तक सीमित था, वह अब ऑल इंडिया सर्विसेज़ और राजनीतिक नेतृत्व तक पहुंच चुका है.

धनखड़ का इस्तीफा: मोदी-शाह की ‘काबिल’ बीजेपी ने RSS को फिर दिया सख्त संदेश

अगर कोई मान ले कि सरकार ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को न्यायपालिका से अच्छे संबंधों के लिए हटाया, तो वह बहुत ही भली सोच होगी.

मोदी का भारत Vs इंदिरा का इंडिया: राजनीति, कूटनीति, और अर्थव्यवस्था का 11 साल का रिपोर्ट कार्ड

नरेंद्र मोदी जबकि प्रधानमंत्री पद पर लगातार सबसे लंबे समय तक बने रहने वाले दूसरे नेता बन गए हैं, हम यह देखने की कोशिश कर रहे हैं चार अहम मामलों में वे इंदिरा गांधी की तुलना में कैसे लगते हैं.

मुंबई ट्रेन ब्लास्ट का फैसला—भारत के क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में बड़े बदलाव की सख्त ज़रूरत

मालिमथ कमेटी ने सिफारिश की थी कि ‘अभियोजन पक्ष को पुलिस विभाग से पूरा सहयोग करते हुए काम करना चाहिए’, लेकिन जो हो रहा है वह इसका ठीक उलटा है.

बिहार 19वीं सदी का अमेरिकन साउथ हो गया है. सिटीजनशिप अब वोटर्स को बाहर करने का जरिया बन गई है

संस्थागत आदेश के जरिए मताधिकार से वंचित करना बिलकुल अलोकतांत्रिक कदम है. बिहार में जो नई प्रक्रिया चलाई जा रही है उससे भाजपा का ही पलड़ा भारी होने जा रहा है.

मोदी सरकार को लेकर जगदीप धनखड़ की विदाई तीन संदेश देती है

मोदी के दौर में जगदीप धनखड़ इतनी दूर तक इसलिए पहुंचे क्योंकि वह सरकार के लिए एक प्रभावी हथियारबंद व्यक्ति (हैचेट मैन) के रूप में काम करने को तैयार थे.

पाकिस्तानी लिंक, एनकाउंटर, और सीलबंद चार्जशीट—कैसे 7/11 केस की पूरी कहानी ध्वस्त हो गई

19 साल बाद, बॉम्बे हाई कोर्ट ने आखिरकार वही बात कही जो सरकारें और खुफिया एजेंसियां सालों से जानती थीं: धमाकों के लिए जिन लोगों को सज़ा दी गई थी, उनका इससे कोई लेना-देना नहीं था.

डिफेंस में आत्मनिर्भर बनने के लिए भारत को सीखने चाहिए इज़रायल से सबक

भारत का उभरता प्रतिरक्षा उद्योग अपनी क्षमता को बड़े उत्पादन में नहीं बदल पाया है और न वैश्विक बाज़ार में जगह बना पाया है. इस कारण आयातों पर निर्भरता जारी है.

75 की उम्र में नए सपने देख रहे हैं चंद्रबाबू नायडू — बाकी मुख्यमंत्री क्या चूक रहे हैं

नायडू के आलोचक उनकी हरकतों को राजनीतिक मौका परस्ती कहेंगे, जबकि समर्थक उन्हें उनकी शानदार राजनीतिक सूझबूझ का उदाहरण मानते हैं.

114 साल के फौजा सिंह की मौत ने खोली भारत की सड़कों की सच्चाई — हर 3 मिनट में जाती है एक जान

114 साल के फौजा सिंह को तेज़ रफ्तार कार ने टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई. इस हादसे ने एक बार फिर भारत की खतरनाक सड़कों, बढ़ते सड़क हादसों और लापरवाह ट्रैफिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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विमानन कंपनियां 20 अप्रैल से उड़ानों में 60 प्रतिशत सीट बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराएंगी

नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) विमानन कंपनियां 20 अप्रैल से सभी उड़ानों में कम से कम 60 प्रतिशत सीट बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.