जब इतिहास लिखा जाएगा, तो कहा जाएगा कि सचिन ने सपना दिखाया, द्रविड़ ने निरंतरता दी, और पुजारा ने धैर्य को जीवित रखा, जिसने क्रिकेट को साधना का रूप दिया.
संविधान संशोधन विधेयक से लेकर मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटाने तक और राज्यपालों की शक्तियों पर अपने रुख तक, भाजपा ऐसा व्यवहार कर रही है मानो वह हमेशा शासन करने वाली पार्टी हो.
जब उनसे पूछा गया कि वे भारतीय उद्योग की इतनी तीखी आलोचना क्यों कर रहे हैं, जबकि उनका उद्देश्य अधिक चतुराईपूर्ण तरीके से पूरा किया जा सकता था, तो उन्होंने कहा, "क्योंकि मैं पंजाबी हूं, मारवाड़ी नहीं."
पुतिन इसे अपनी जीत मान रहे हैं. यूरोपीय देशों ने बड़े पश्चिमी गठबंधन को बचाने के लिए ट्रंप की शर्तों पर उनसे समझौता करने का फैसला किया है. अब देखते हैं कि भारत के लिए इसमें क्या सबक छिपा है.
जब तक कोई बड़ा उलटफेर नहीं होता, भारत की विदेश नीति का मूल, जो कम से कम साल 2000 से अमेरिका, पाकिस्तान, चीन और रूस पर केंद्रित रही है, टूटने के कगार पर है.
चुनाव आयोग को विपक्ष की 'वोट चोरी' की शिकायतों को गंभीरता से लेने का कोई कारण नज़र नहीं आता. 'तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?' — ऐसा जवाब एक ईमानदार और सच्चा संविधान का संरक्षक कभी नहीं देगा.