scorecardresearch
Sunday, 29 March, 2026
होममत-विमत

मत-विमत

‘सबका साथ’ या ‘पाइजान’? असम बीजेपी का एंटी-मुस्लिम वीडियो पीएम मोदी के संदेश के खिलाफ

जब असम में गैरकानूनी प्रवासियों की बात होती है, तो बीजेपी की कल्पना क्यों तुरंत मुसलमानों पर रुक जाती है? एनआरसी का डेटा तो अलग कहानी बताता है.

पाकिस्तान के साथ एशिया कप खेलना भारत का सबसे गलत फैसला था

भारतीय सरकार ने जनता का मनोबल शांत करने की कोशिश की, जैसे कि कहा ‘ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है’, लेकिन साफ है कि ऐसा नहीं है. वरना हम दुश्मन के साथ क्रिकेट क्यों खेल रहे होंगे?

भारत के बुद्धिजीवियों के साथ मुश्किल यह है कि वे तथ्यों की परवाह नहीं करते

समर्थक चाहे नेहरू के हों, आरएसएस के या गांधी के, उनकी विचार प्रक्रिया एक ही तरह से चलती है—आदतन आलोचना या अंधभक्ति.

इंग्लैंड को उस युद्ध के लिए कमर कसनी होगी जिसे टालना अब संभव नहीं है

इसमें बहुत कम शक है कि इंग्लैंड की राजनीति का बिखराव इतनी तेज़ी से हो रहा है, जिसकी उम्मीद बहुत कम लोगों ने की थी. भले ही आंकड़ें दिखाते हैं कि इमिग्रेशन घट रहा है, लेकिन इस मुद्दे पर चिंता 1974 के बाद से सबसे ऊंचे स्तर पर है.

नेपाल और बांग्लादेश में अमेरिकी डीप स्टेट की दखल का दावा सिर्फ एक बेहूदी कॉन्सपिरेसी थ्योरी है

भारत जैसी क्षेत्रीय ताकत के लिए पड़ोस जोखिम पैदा करने वाला क्षेत्र साबित हो सकता है. लेकिन अपने क्षेत्र में ताकतवर होने के कुछ फायदे भी हैं.

मणिपुर ने बहुत दर्द झेला है, अब वो वादों के जाल में नहीं फंसेगा

उत्तर-पूर्व के लोगों को दिखावटी बातों से आसानी से रिझाया नहीं जा सकता, इस हकीकत से नेहरू का तो सामना तभी हो गया था जब 1953 में 3000 नगाओं ने उनकी सभा का बहिष्कार कर दिया था.

राहुल गांधी को अपनी राजनीति पर एक बुनियादी सवाल पूछना चाहिए

राहुल पीएम मोदी और उनकी पार्टी के बारे में नकारात्मक बातें बनाने पर ध्यान दे रहे हैं. उन्हें यह एहसास नहीं है कि पिछले दो दशकों से उनके विरोधियों ने भी उनके बारे में जो नकारात्मक छवि बनाई है, उसे भी उन्हें संबोधित करना होगा.

रण संवाद में आने वाले युद्ध पर ज़ोर दिया, हम तो आज के लिए भी ठीक से तैयार नहीं हैं

सशस्त्र बलों का बड़ा हिस्सा बीते कल की लड़ाइयों के लिए तैयार है, आज की लड़ाइयों के लिए उनकी क्षमता सीमित है और भविष्य की लड़ाइयों के लिए कोई औपचारिक योजना नहीं है.

Gen Z ने तो नेपाल में तख़्तापलट दिया, लेकिन भारत में ऐसा कभी क्यों नहीं हो सकेगा

किसी सरकार को सच में चलने और लंबे समय तक टिके रहने के लिए सिर्फ नेता, पार्टी या विचारधारा ही नहीं, बल्कि मजबूत और सक्रिय संस्थाएं भी चाहिए.

नेपाल में Gen Z प्रोटेस्ट पर भारत और चीन की प्रतिक्रिया में अहम फर्क क्यों नज़र आता है

चीन किसी भी कीमत पर अपने कम्युनिस्ट सहयोगी नेपाल को एकजुट रखना चाहता है. भारत को चिंता करनी चाहिए.

मत-विमत

खाड़ी युद्ध ने भारत की कमजोरियां उजागर कीं, अब राष्ट्रीय हित में आत्ममंथन का वक्त है

सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.

वीडियो

राजनीति

देश

हाथरस के सहपऊ में रावण का पुतला जलाया

हाथरस (उप्र), 29 मार्च (भाषा) हाथरस जिले के सहपऊ में चैत्र नवरात्र की दशमी पर शनिवार को रावण का पुतला जलाया गया। आयोजकों ने...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.