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Thursday, 26 March, 2026
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नेहरू और मोदी की दुविधा एक जैसी. 1953 के परमाणु संकट से जुड़े गुप्त दस्तावेजों से खुलासा

जहां आलोचक PM मोदी पर ईरान संकट को लेकर देश की आज़ादी और भारत के नैतिक मूल्यों को छोड़ने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं डीक्लासिफाइड डॉक्यूमेंट्स से पता चलता है कि उनके सामने जो मुश्किलें हैं, वे नई नहीं हैं.

सिंचाई में बड़ी कामयाबी के दावे पंजाब को रावी–ब्यास जल विवाद में भारी पड़ सकते हैं

कोई यह नहीं कहता कि पंजाब को नहर सुधार में हुई असली प्रगति छिपानी चाहिए, लेकिन धीरे-धीरे हो रहे सुधार की जानकारी देना और उसे बड़ी उपलब्धि बताकर पेश करना—दोनों में फर्क है.

BJP का वंदे मातरम पर रुख बड़ा राजनीतिक विरोधाभास है और नागालैंड ने इसे साफ दिखाया

केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी को नागालैंड में वंदे मातरम को लेकर वहां के विचारों पर चुप रहना पड़ेगा, अगर वह उस राज्य में सत्ता में बने रहना चाहती है, जहां 2028 की शुरुआत में चुनाव होने हैं.

बालेंद्र शाह की लहर नेपाल में लोकतंत्र की दूसरी वापसी का संकेत

जेन ज़ी आंदोलन एक मजबूत लहर था, जिसे आरएसपी और बालेन ने मिलकर पकड़ा—यह मुद्दों पर आधारित राजनीति की अहमियत दिखाने वाला पहला बड़ा पड़ाव है.

ईरान युद्ध का जल्दी खत्म होना भारत के हित में है, लेकिन मोदी का अमेरिका या इज़रायल पर कोई प्रभाव नहीं

ईरान में अमेरिका-इज़रायल युद्ध ने वैश्विक राजनीति में भारत की असली जगह दिखा दी है—एक मिडिल पावर, न कि ‘विश्वगुरु’.

चीन का वह आर्थिक मॉडल, जिसने उसकी तेज़ तरक्की को ताकत दी, अब धीमा पड़ता दिख रहा है

चीन के डेवलपमेंट मॉडल के केंद्र में प्रॉपर्टी सेक्टर था—घरों का निर्माण, ज़मीन की बिक्री और रियल एस्टेट में निवेश. अब इस निर्भरता के नतीजे साफ दिखने लगे हैं.

ममता बनर्जी विवाद: द्रौपदी मुर्मू को सार्वजनिक बयान देने से बचना चाहिए था

हमें अपने राष्ट्रपति के प्रति किसी भी अपमान की निंदा करनी चाहिए, लेकिन द्रौपदी मुर्मू और ममता बनर्जी से जुड़ी घटना कई सवाल खड़े करती है, जिनमें कुछ असहज करने वाले भी हैं.

USA भारत की तरक्की को रोकने की कोशिश करेगा. नई दिल्ली को रिश्तों में अपनी मासूमियत पीछे छोड़नी होगी

भारत ने खामोशी से यह कबूल लिया है कि अमेरिका कुछ मामलों में उसका मददगार है, तो कुछ दूसरे मामलों में एक अड़ंगा भी. भारत के उत्कर्ष की रफ्तार को धीमा करने में चीन और अमेरिका, दोनों का एक अबोला स्वार्थ है.

महिलाओं के सशक्तिकरण में भारत आगे—जेंडर बजटिंग, कानूनी सुरक्षा और पंचायती राज

भारत धीरे-धीरे ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहा है जहां विकास सिर्फ महिलाओं तक पहुंचाया नहीं जाता, बल्कि महिलाओं द्वारा ही बनाया और आगे बढ़ाया जाता है. भारतीय महिलाएं नवाचार करने वाली और समुदाय की नेता हैं.

ईरान का संघर्ष भारत तक पहुंचा, मुसलमानों से फिर देशभक्ति साबित करने की मांग

जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.

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जायडस वेलनेस ने ‘ग्लूकोन-डी रिचार्ज’ के लिए मिलिंद सोमन को ब्रांड एम्बैसडर बनाया

नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) जायडस वेलनेस ने बृहस्पतिवार को अभिनेता मिलिंद सोमन को अपने नए उत्पाद ‘ग्लूकोन-डी रिचार्ज’ का ब्रांड एम्बैसडर नियुक्त करने...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.