जहां आलोचक PM मोदी पर ईरान संकट को लेकर देश की आज़ादी और भारत के नैतिक मूल्यों को छोड़ने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं डीक्लासिफाइड डॉक्यूमेंट्स से पता चलता है कि उनके सामने जो मुश्किलें हैं, वे नई नहीं हैं.
कोई यह नहीं कहता कि पंजाब को नहर सुधार में हुई असली प्रगति छिपानी चाहिए, लेकिन धीरे-धीरे हो रहे सुधार की जानकारी देना और उसे बड़ी उपलब्धि बताकर पेश करना—दोनों में फर्क है.
केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी को नागालैंड में वंदे मातरम को लेकर वहां के विचारों पर चुप रहना पड़ेगा, अगर वह उस राज्य में सत्ता में बने रहना चाहती है, जहां 2028 की शुरुआत में चुनाव होने हैं.
चीन के डेवलपमेंट मॉडल के केंद्र में प्रॉपर्टी सेक्टर था—घरों का निर्माण, ज़मीन की बिक्री और रियल एस्टेट में निवेश. अब इस निर्भरता के नतीजे साफ दिखने लगे हैं.
हमें अपने राष्ट्रपति के प्रति किसी भी अपमान की निंदा करनी चाहिए, लेकिन द्रौपदी मुर्मू और ममता बनर्जी से जुड़ी घटना कई सवाल खड़े करती है, जिनमें कुछ असहज करने वाले भी हैं.
भारत ने खामोशी से यह कबूल लिया है कि अमेरिका कुछ मामलों में उसका मददगार है, तो कुछ दूसरे मामलों में एक अड़ंगा भी. भारत के उत्कर्ष की रफ्तार को धीमा करने में चीन और अमेरिका, दोनों का एक अबोला स्वार्थ है.
भारत धीरे-धीरे ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहा है जहां विकास सिर्फ महिलाओं तक पहुंचाया नहीं जाता, बल्कि महिलाओं द्वारा ही बनाया और आगे बढ़ाया जाता है. भारतीय महिलाएं नवाचार करने वाली और समुदाय की नेता हैं.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.
नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) जायडस वेलनेस ने बृहस्पतिवार को अभिनेता मिलिंद सोमन को अपने नए उत्पाद ‘ग्लूकोन-डी रिचार्ज’ का ब्रांड एम्बैसडर नियुक्त करने...