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Saturday, 28 March, 2026
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SIR ड्राइव NRC-CAA नहीं है—यह सिर्फ मुस्लिम नहीं, बल्कि लाखों असली वोटर्स को भी सूची से बाहर कर सकती है

भारत में अभी भी दस्तावेज़ और डिजिटल सिस्टम तक पहुंच बराबर नहीं है. चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया किसी डराने या नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई में नहीं बदलनी चाहिए.

सूडान साबित करता है कि जब दुनिया ख़ूनी शासकों पर लगाम नहीं लगाती, तो नतीजे कितने भयानक होते हैं

चौदह मिलियन शरणार्थी, तथा 25 मिलियन लोग तीव्र भूखमरी का सामना कर रहे हैं, यह दुनिया के लिए सूडान में व्याप्त अराजकता को समाप्त करने के लिए पर्याप्त कारण होना चाहिए - भले ही इसके शासकों की क्रूरता पर्याप्त कारण न हो.

ज़ोहरान ममदानी आधुनिक भारत की असली पहचान हैं

कई अन्य भारतीय मूल के नेताओं के उलट, उन्होंने ईसाई धर्म नहीं अपनाया और न ही अपनी भारतीय पहचान को कम दिखाया. वैसे भी उनके लिए ऐसा करना मुश्किल होता क्योंकि उनकी मां मीरा नायर भारत की जानी-मानी फिल्म निर्देशक हैं.

भारत के थिंक टैंक लॉबिस्ट की तरह है खुलासा नहीं करते, इससे पॉलिसी खराब होती है

कई ‘स्वतंत्र’ बताई जाने वाली रिपोर्टें, जिनका मकसद नीतियों को दिशा देना होता है, असल में बड़े उद्योग समूहों या पैसे वाले हितधारकों द्वारा कराई जाती हैं. इस प्रक्रिया में पारदर्शिता ज़रूरी है.

भारत में पीरियड लीव पर पॉलिसी बनाना आसान है, लेकिन मानसिकता बदलना मुश्किल

कर्नाटक की पीरियड लीव पॉलिसी तारीफ के काबिल है, लेकिन यही देश है जहां किसी भी वक्त मासिक धर्म वाली महिलाओं को बेइज़्ज़त और अपमानित किया जा सकता है — बिना किसी झिझक के.

बंदूकों से गिटार तक—पिछले तीन दशकों में कितना बदल गया नगालैंड

नगा उग्रवादी नेताओं से हुई बातचीत नहीं, बल्कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास विभाग (DoNER) की स्थापना बनी राज्य के बदलाव की असली वजह.

पाकिस्तान ने अफगानों को महाशक्तियों को हराने में मदद की — और खुद ही उनकी कौमी भावना से हार गया

पाकिस्तान अफगानों की उग्र स्वतंत्र मानसिकता और पख्तून राष्ट्रवाद की दृढ़ता को समझने में नाकाम रहा. यह राष्ट्रवाद 1747 में अफगानिस्तान की स्थापना के साथ ही उसकी सियासत पर हावी रहा है.

SIR को लेकर राहुल गांधी के आरोप बेबुनियाद, वोटर्स को ‘डिलीट’ करने का कोई जादुई क्लिक नहीं

विपक्ष चाहे जितनी बयानबाज़ी कर ले, भारत के लोगों का भरोसा न सिर्फ सिस्टम पर है, बल्कि मतदाताओं की समझ पर भी है.

पाकिस्तान के ‘जनरल शांति’ को यही होगी असली श्रद्धांजलि

दुर्रानी को एनएसए बनाकर पाकिस्तान ने बड़ी छलांग लगाई थी, लेकिन हैरानी नहीं कि वे एक साल भी इस पद पर नहीं रह पाए. 26/11 कांड को पाकिस्तानी फौज/आईएसआई की धोखाधड़ी मानते हुए परेशान होकर उन्होंने किनारा कर लिया.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्ध पहले आम बात थी. असीम मुनीर अब वही दौर वापस ला रहे हैं

पाकिस्तान ने जातीय राष्ट्रवाद को ख़त्म करने की उम्मीद में अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामवादियों के लिए धन में भारी वृद्धि की. अब उसकी यह रणनीति बुरी तरह उलटी पड़ गई है.

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खाड़ी युद्ध ने भारत की कमजोरियां उजागर कीं, अब राष्ट्रीय हित में आत्ममंथन का वक्त है

सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.

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मोदी सरकार के लिए राष्ट्र पहले नहीं आता: सिब्बल

नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने शनिवार को दावा किया कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध से भारत...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.