इंडिया आर्ट फेयर में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला आर्टवर्क किसी परिभाषा में नहीं बंधता—गिरजेश कुमार सिंह मलबे से निकाली गई ईंटों से लोगों और उनके बैग की मूर्तियां बनाते हैं. इस प्रदर्शनी का नाम 'हाल मुकाम' है.
1971 में बी.एस. अय्यर ने लिखा था कि लगातार बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी की बुराइयों के लिए कैपिटलिज़्म ज़िम्मेदार नहीं है, बल्कि राजनेताओं की नीतियां ज़िम्मेदार हैं जो इसके काम को पंगु बना देती हैं.
ट्रेड की भाषा उन लोगों को हाथ की सफाई जैसी लग सकती है, जिनकी ज़िंदगी पर इसके असर पड़ते हैं, लेकिन बिना पूरी जानकारी वाले आंदोलनों को इस पर प्रतिक्रिया तय करने देना एक बड़ी गलती होगी.
अगले वीकेंड तक बांग्लादेश में एक चुनी हुई सरकार बन जाएगी. यह भारत के लिए मौका है कि वह चुनाव वाले पश्चिम बंगाल और असम में ‘घुसपैठिया’ वाली भाषा को नरम करके बिगड़े रिश्तों को फिर से ठीक करे.
जब मैं अपने समुदाय के भीतर असहमति की आवाज़ बनना चुनती हूं, या जब मैं मुस्लिम-बहुल देशों में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के बारे में लिखती हूं, तो दीपक जैसे लोग मेरी ताकत बनते हैं.
नाहिद इस्लाम—युवा नेता और 2024 के प्रतिरोध आंदोलन का चेहरा, ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में सात महीने के छोटे कार्यकाल के बाद एनसीपी की स्थापना की.
श्योपुर, 26 मार्च (भाषा) लोकप्रिय टेलीविजन कार्यक्रम ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में प्रतिभागी के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त करने वाली एक महिला...