करूर, तमिलनाडु: टीवीके प्रमुख विजय की करूर रैली में हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत के सात महीने बाद, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले इलाके में एक अजीब सा सन्नाटा है.
करूर जिले के वेलुसामीपुरम गांव में, जहां पिछले साल 27 सितंबर को भगदड़ हुई थी, वह खुली नाली जिसमें कई लोग गिर गए थे, अब कंक्रीट से ढक दी गई है, और पास का मैदान जहां लोग भीड़ से बचने के लिए गए थे, अब घेर दिया गया है.
करूर की गलियों में, यह भगदड़ अब चुनावी मुद्दे से ज्यादा राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल होने वाली चीज बन गई है, जिसे पार्टियां अपने हिसाब से उठाती हैं. दूसरी तरफ, जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया, वे अभी भी दुख से जूझ रहे हैं, लेकिन राजनीतिक विवाद में पड़ने से बचते हैं. वे न्याय, जिम्मेदारी, शांति और अपने घाव भरने के लिए समय चाहते हैं, जबकि पार्टियां बड़े स्तर पर एक-दूसरे को दोष दे रही हैं.


एक-दूसरे पर दोषारोपण
जब तमिलनाडु के लोग 23 अप्रैल को वोट देने की तैयारी कर रहे हैं, करूर फिर से राजनीतिक चर्चा में है. सत्ताधारी डीएमके और टीवीके के बीच भगदड़ को लेकर आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है, जबकि थके हुए स्थानीय लोग कहते हैं कि वे आगे बढ़ चुके हैं और इसे भीड़ की अफरातफरी और खराब व्यवस्था से हुई एक दुखद दुर्घटना मानते हैं.
जो लोग उस दिन तेज गर्मी में घंटों इंतिजार कर रहे थे, उनके लिए यह याद अभी भी ताजा है.

भगदड़ तब हुई जब विजय की रैली में अचानक भीड़ बहुत बढ़ गई और स्थिति बिगड़ गई. उस दिन विजय को नमक्कल और करूर जिलों में प्रचार करना था. उन्हें सुबह 8.45 बजे नमक्कल में शुरुआत करनी थी, लेकिन वे दोपहर 2.45 बजे पहुंचे और करीब 15 मिनट बोलकर करूर के लिए निकल गए.
उन्हें करूर में दोपहर 12.45 बजे रैली शुरू करनी थी, लेकिन वे शाम करीब 7.30 बजे पहुंचे. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बहुत ज्यादा भीड़ थी और लोग उन्हें देखने के लिए धक्का-मुक्की कर रहे थे, जिससे अफरातफरी मच गई.
डीएमके का आरोप है कि टीवीके ने भीड़ का सही अंदाजा नहीं लगाया, पानी, खाना या छाया जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं दीं और गलत जगह चुनी. टीवीके का कहना है कि यह साजिश हो सकती है या डीएमके सरकार की प्रशासनिक गलती है, और उनका आरोप है कि सुरक्षा की कमी और पाबंदियों की वजह से सही व्यवस्था नहीं हो पाई.

करूर ज़िले में, करूर, कृष्णरायपुरम, अरवाकुरिची और कुलितलाई जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में चुनावी अभियान आम तौर पर उम्मीदवारों की ताक़त, पार्टी के नेटवर्क, गठबंधनों और विकास के वादों पर केंद्रित रहे हैं.
लेकिन इस बार करूर की भगदड़ पूरी तरह भुलाए नहीं भूल रही है.
डीएमके उम्मीदवार एम. थियागराजन ने कहा कि एक नेता ही नहीं, एक माता-पिता के रूप में भी यह घटना उन्हें दुख देती है. “किसी भी मुआवजे से इन जवान जिंदगियों की भरपाई नहीं हो सकती. हम इसे अपने घर में हुई त्रासदी मानते हैं.”
साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि बिना तैयारी के कार्यक्रम क्यों हुआ और लोगों को घंटों इंतजार क्यों कराया गया. उन्होंने कहा कि दुख को राजनीति बनाने के बजाय जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.
टीवीके के उम्मीदवार वी.पी. मथियाझगन ने पीड़ित परिवारों के साथ पार्टी के समर्थन पर जोर दिया.
उन्होंने कहा, “यह अचानक हुआ, लेकिन ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था. जो लोग प्रभावित हुए, वे हमारे परिवार जैसे हैं जो हमारे नेता विजय को देखने आए थे. बाकी लोग राजनीति करेंगे और चले जाएंगे. हम अंत तक उनके साथ रहेंगे.”
उन्होंने कहा कि सुरक्षा अनुमति में दिक्कतें थीं और भरोसा दिलाया कि टीवीके की सरकार बनने पर बेहतर व्यवस्था होगी.
विजय ने न्याय की मांग की है और 2026 के चुनाव को “अच्छी ताकत और बुरी ताकत” के बीच की लड़ाई बताया है. उन्होंने इस घटना को “अस्थायी रुकावट” कहा, जो सत्ताधारी डीएमके से जुड़ी ताकतों की वजह से हुई.
टीवीके समर्थक जमीन पर इसे कभी-कभी “साजिश” बताते हैं. एक समर्थक ने गड़बड़ी का संकेत दिया और कहा कि “विजय जरूर जीतेंगे.”
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच भी चल रही है, जिससे मामला और कानूनी रूप से गंभीर हो गया है, और विजय जांच एजेंसियों के सामने पेश हुए हैं.
जमीन पर स्थिति
ज्यादातर मतदाता इसे एक दुखद हादसा मानते हैं, न कि ऐसा मुद्दा जो वोट को प्रभावित करेगा.
प्रत्यक्षदर्शी अक्सर गुस्सा प्रशासन पर निकालते हैं, क्योंकि जगह छोटी थी और पुलिस की मौजूदगी कम थी, न कि विजय पर.
एक स्थानीय मेडिकल दुकान चलाने वाले जगन ने कहा, “यह भगदड़ थी, और कुछ नहीं. हमें किसी से गुस्सा नहीं है, और लोग आगे बढ़ चुके हैं.”
वेलुसामीपुरम के रहने वाले सेंथिल ने भी यही कहा.
उन्होंने कहा, “वह एक अभिनेता हैं. भीड़ तो आती ही. अगर बड़ी जगह और ज्यादा सुरक्षा होती, तो नुकसान कम हो सकता था.”
एक प्रत्यक्षदर्शी और टीवीके समर्थक सौजन्या, जो अपने दो बच्चों के साथ वहां थीं, ने कहा कि यह “साजिश” थी.
उन्होंने कहा, “हम बच गए, यही हमारे लिए बड़ी बात है. कुछ गड़बड़ी हुई थी, और यह साफ नहीं हुआ कि विजय पर चप्पल किसने फेंकी. इस बारे में किसी ने सवाल नहीं किया. सभी लोग उनका समर्थन कर रहे हैं और वह जरूर जीतेंगे.”
इस बीच चुनाव प्रचार तेज हो गया है. दोनों पक्ष पीड़ित परिवारों की मदद के साथ-साथ विकास के वादे भी कर रहे हैं.
डीएमके उम्मीदवार थियागराजन ने करूर में जीत का भरोसा जताया, जो डीएमके नेता और मौजूदा विधायक सेंथिल बालाजी का गढ़ रहा है, जो अब कोयंबटूर साउथ से चुनाव लड़ रहे हैं.
उन्होंने विकास कार्यों का जिक्र किया.
“डीएमके के समय में हमने मजबूत सड़कें, पीने का पानी, मुफ्त बस सेवा और अन्य सुविधाएं दी हैं, जिससे व्यापार को फायदा हुआ है,” उन्होंने कहा.
उन्होंने कहा कि उद्योगों के साथ आर्थिक लक्ष्य तय करने पर चर्चा हुई है, विकास परियोजनाएं चल रही हैं, और टाइडल पार्क जैसी सुविधाएं बनाई गई हैं.
दूसरी तरफ, टीवीके उम्मीदवार मथियाझगन ने बदलाव की बात की, सरकार की योजनाओं पर सवाल उठाए और वोट के बदले पैसे बांटने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, “राजनेता सोचते हैं कि 2000 या 5000 रुपये दे देने से काम हो जाएगा. लेकिन वे लोगों और उद्योगों की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं करते. यहां शौचालय और आराम की जगह जैसी सुविधाएं भी नहीं हैं.”
उन्होंने कहा, “लोग काम के लिए आते हैं लेकिन रहने की सही जगह नहीं है. करूर के लोगों के साथ मशीनों जैसा व्यवहार होता है, उनके पास मनोरंजन का कोई साधन नहीं है. जब टीवीके सत्ता में आएगी, तो बुनियादी जरूरतों और शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाएगी.”
‘मुझे नहीं पता कि न्याय मिलेगा या नहीं’
वेलुसामीपुरम की एक गली में दो साल के गुरु विष्णु का घर इस त्रासदी की याद दिलाता है.
उनका परिवार कम ही बोलता है. वे उस दिन की याद से थक चुके हैं. वे करूर के एक दूसरे इलाके में रहने चले गए ताकि यादों और सवालों से दूर रह सकें.
उन्होंने इस घटना पर राजनीति या “विजय फैक्टर” पर कुछ कहने से मना कर दिया. उनके लिए रोज की जिंदगी और शांति से शोक मनाना ज्यादा जरूरी है.
पास के इमूर पुदूर में शक्तिवेल उस दिन को याद करके रो पड़े, जब उन्होंने आखिरी बार अपनी पत्नी की आवाज सुनी थी. उनकी पत्नी अपनी बेटी के साथ विजय को देखने रैली में गई थीं.
तस्वीर को देखते हुए उनकी यादें उन्हें परेशान करती हैं. कुछ हफ्तों में उन्होंने अपनी पत्नी प्रियदर्शिनी और 14 साल की बेटी धारनिका को खो दिया. उसके बाद उनकी मां की भी मौत हो गई.

उन्होंने कहा कि वे अपने दुख के बारे में ज्यादा नहीं बोलना चाहते, क्योंकि उन्हें डर है कि इसका राजनीतिक इस्तेमाल होगा.
उन्होंने रोते हुए कहा, “कुछ भी उन्हें वापस नहीं ला सकता.”
“मुझे नहीं पता सच्चा न्याय कभी मिलेगा या नहीं. अब मैं बस यही चाहता हूं कि मेरे अपनों की आत्मा को शांति मिले. मेरी बहन ज्यादातर दिन मुझे खाना देती है, बाकी दिन मैं बाहर खा लेता हूं या खुद कुछ बना लेता हूं. मैं किसी को दोष नहीं देना चाहता.”
अन्य परिवारों ने भी यही कहा कि वे उस अतीत के बारे में बात नहीं करना चाहते जिसने उनकी जिंदगी कुछ ही घंटों में बदल दी.
पीड़ित परिवारों को डीएमके सरकार ने 10 लाख रुपये की मदद दी और घायलों को भी सहायता दी. टीवीके ने 20 लाख रुपये देने की बात कही.
अक्टूबर 2025 के आखिर में विजय ने ममल्लापुरम के एक रिसॉर्ट में करीब 37 परिवारों से निजी तौर पर मुलाकात की. पार्टी का कहना था कि प्रशासन ने उन्हें करूर जाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी.
परिवारों ने कहा कि उन्होंने दुख जताया, भावुक हो गए और नौकरी या पढ़ाई में मदद का वादा किया.
फिर भी कुछ लोगों को लगा कि यह मुलाकात उतनी व्यक्तिगत नहीं थी, और उन्होंने सवाल उठाया कि परिवारों को वहां बुलाया गया, नेता खुद उनके घर क्यों नहीं आए जब उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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