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Monday, 19 October, 2026
होमविदेशदिल्ली और इस्लामाबाद के बीच संवाद के लिए RSS के होसबाले के बयान का पाकिस्तान ने स्वागत किया

दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच संवाद के लिए RSS के होसबाले के बयान का पाकिस्तान ने स्वागत किया

इस हफ़्ते की शुरुआत में RSS के जनरल सेक्रेटरी ने कहा था कि भारत को ‘सिक्योरिटी, सेल्फ़-रिस्पेक्ट’ से कॉम्प्रोमाइज़ किए बिना पाकिस्तान के साथ बातचीत के चैनल खुले रखने चाहिए.

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नई दिल्ली: पाकिस्तान विदेश कार्यालय ने गुरुवार को आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले के पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत करने वाले बयान का स्वागत किया, और इसे “एक सकारात्मक विकास” बताया. साथ ही यह उम्मीद जताई कि “भारत में समझदारी बनी रहेगी”.

12 मई को समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव होसबाले ने कहा कि भारत को पाकिस्तान के साथ संचार के चैनल खुले रखने चाहिए, लेकिन “सुरक्षा और आत्मसम्मान” से समझौता किए बिना.

इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इस्लामाबाद में गुरुवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि “भारत के भीतर संवाद की बात करने वाली आवाजें स्पष्ट रूप से एक सकारात्मक विकास हैं”.

“हम उम्मीद करते हैं कि भारत में समझदारी बनी रहेगी. और जो युद्ध भड़काने वाली बातें, जो आक्रामकता पिछले कई महीनों से और उससे भी पहले, पिछले एक साल या उससे अधिक समय से आ रही हैं, वह खत्म होगी और ऐसे और आवाजों के लिए रास्ता बनेगा,” उन्होंने कहा.

“हम, निश्चित रूप से, उन आवाजों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देंगे, भारत के भीतर एक आधिकारिक प्रतिक्रिया. और ट्रैक टू या बैक चैनल के बारे में, मैं उससे परिचित नहीं हूं. मैं उस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता. और अगर मैं उस पर टिप्पणी करता, तो कोई बैक चैनल नहीं होता. बैक चैनल या ट्रैक टू, मतलब नाम ही स्पष्ट करता है,” उन्होंने जोड़ा.

जबकि भारत और पाकिस्तान के बीच आधिकारिक कूटनीतिक बातचीत ऑपरेशन सिंदूर के बाद से रुकी हुई है, सेवानिवृत्त जनरल, पूर्व राजनयिक और दोनों देशों के प्रभावशाली राजनीतिक चेहरे हाल ही में सार्वजनिक रूप से फिर से बातचीत की वकालत करने लगे हैं.

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में पहले बताया गया था कि हाल के महीनों में पूर्व भारतीय सैन्य और खुफिया अधिकारियों की अपने पाकिस्तान समकक्षों से कम से कम दो अनौपचारिक बैठकों में मुलाकात हुई, जिसमें एक कतर में और दूसरी एक अज्ञात एशियाई राजधानी में हुई.

ये बैठकें औपचारिक बातचीत नहीं थीं, प्रतिभागियों ने कहा, लेकिन ये ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों पक्षों के बीच पहली ज्ञात निरंतर संपर्क को दर्शाती हैं.

ये बातचीत ऐसे समय में हुई हैं जब भारतीय सुरक्षा हलकों में भारत और पाकिस्तान के बीच संकट-प्रबंधन तंत्र की कमी को लेकर बढ़ती चिंता है. पहलगाम हमले और उसके बाद के सैन्य टकराव के दौरान, अधिकारियों ने कहा, दोनों देशों के बीच एकमात्र काम करने वाला चैनल उनके सैन्य संचालन महानिदेशकों को जोड़ने वाली हॉटलाइन थी, जो अब साप्ताहिक बात करते हैं.

भारत सार्वजनिक रूप से यह रुख रखता है कि “आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते”, जो 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले और 2019 के पुलवामा हमले जैसी घटनाओं के बाद और कठोर हुआ है.

फिर भी, आंतरिक विचार-विमर्श से परिचित अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में किसी भी टकराव को अनियंत्रित रूप से बढ़ने से रोकने के लिए किसी न किसी प्रकार का बैक-चैनल संचार आवश्यक हो सकता है.

पुनः जुड़ाव का विचार भारतीय प्रभावशाली व्यक्तियों के सार्वजनिक बयानों में भी दिखने लगा है, जिनमें सत्ताधारी व्यवस्था से जुड़े लोग भी शामिल हैं, जिनमें होसबाले भी शामिल हैं. उनके बयान इसलिए महत्वपूर्ण थे क्योंकि आरएसएस लंबे समय से पाकिस्तान के प्रति कठोर रुख से जुड़ा रहा है.

पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे ने गुरुवार को होसबाले की टिप्पणियों का समर्थन किया, और “लोगों के बीच संबंधों” और ट्रैक-टू कूटनीति के महत्व पर जोर दिया.

“सीमा के दोनों तरफ आम लोग रहते हैं, और हर जगह के आम लोगों की चिंताएं समान होती हैं,” नरवणे ने पीटीआई इंटरव्यू में कहा. “जब दो देशों के लोगों के बीच दोस्ती विकसित होती है, तो यह स्वाभाविक रूप से देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने में मदद करती है.”

साथ ही, नरवणे ने यह भी दोहराया कि आवश्यकता पड़ने पर भारत सैन्य रूप से जवाब देना जारी रखेगा, और भारत की सोच में अब उभर रहे दोहरे दृष्टिकोण की ओर इशारा किया: रोकथाम और नियंत्रित संवाद के साथ-साथ.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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