नई दिल्ली: मणिपुर के एक जंगल में लकड़ी लेने गए मैतेई समुदाय के तीन लोगों की सोमवार को हत्या कर दी गई. मैतेई संगठनों ने इस हमले के लिए ‘कुकी उग्रवादियों’ को जिम्मेदार ठहराया. इन हत्याओं के बाद स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया. उन्होंने मृतकों में से दो के शव इंफाल में मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास के बाहर रख दिए.
मणिपुर में 3 मई 2023 से जातीय संघर्ष जारी है. उस दिन राज्य के तीन प्रमुख समुदायों में से दो, मैतेई और कुकी समुदायों के बीच पहली बार हिंसा भड़की थी.
पिछले साल फरवरी में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति शासन लगाया गया था. इसके बाद हिंसा में थोड़ी कमी आई थी, लेकिन इस साल फरवरी में राष्ट्रपति शासन खत्म होने और युमनाम खेमचंद सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद तनाव फिर बढ़ गया. इस बार कुकी और नगा समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़क उठी.
2023 से अब तक इस हिंसा में तीनों समुदायों के कम से कम 300 लोग मारे जा चुके हैं और 60,000 से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है.
सोमवार की घटना के बारे में मणिपुर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि इंफाल ईस्ट और कांगपोकपी जिलों की सीमा पर लकड़ी लेने गए लोगों के एक समूह पर संदिग्ध उग्रवादियों ने कथित तौर पर गोलीबारी की. इसमें तीन लोगों की मौत हो गई और कुछ अन्य घायल हो गए.
यह घटना सुबह करीब 9.40 बजे इंफाल ईस्ट के नोंगशुम गांव से कुछ मीटर की दूरी पर हुई. हमले के बाद सुरक्षाबल मौके पर पहुंचे, जबकि घायलों को इलाज के लिए इंफाल के एक अस्पताल में ले जाया गया.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मैतेई हेरिटेज सोसाइटी ने इस हमले के लिए ‘कुकी उग्रवादियों’ को जिम्मेदार ठहराया.
सोसाइटी ने एक बयान में कहा, “इलाके में मौजूद UNLF(P) के शिविर को जून 2026 में दूसरी जगह भेज दिया गया था, जबकि गांव के लोगों ने इसका विरोध किया था. ग्रामीणों को पहले से आशंका थी कि कुकी उग्रवादी ऐसे हमले कर सकते हैं. जब गांव के लोगों ने पहले ही ऐसे हमलों की आशंका जताई थी, तो हमारे मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह को बताना चाहिए कि सुरक्षा क्यों दी गई थी. अब समय आ गया है कि पदों पर बैठे लोगों को उनके काम के लिए जवाबदेह बनाया जाए.”
बयान में आगे कहा गया, “इंसानी जान की कीमत पर शांति का उपदेश देना मंजूर नहीं है. न ही राजनीतिक रूप से इसका बचाव किया जा सकता है. कम से कम अपने राजनीतिक हितों के लिए ही कार्रवाई कीजिए! कुकी उग्रवादियों को ढूंढकर उनका खात्मा कीजिए.”
प्रदर्शन शुरू हुए
मैतेई हेरिटेज सोसाइटी के एक सदस्य ने बताया कि हमले में मारे गए दो मैतेई लोगों के शव गुस्साए स्थानीय लोग मणिपुर के मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास के मुख्य गेट के बाहर ले आए और वहां रख दिए.
उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के कई गोले दागे.
पहले बताए गए पुलिस अधिकारी ने कहा, “इसके बाद शवों को जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) ले जाया गया.”
घटना के बाद मुख्यमंत्री के आवास के अंदर और आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई. बंगले के पास से गुजरने वाले रास्ते पर लोगों की आवाजाही रोक दी गई और लोगों को उस इलाके से गुजरने नहीं दिया गया.
कुकी-जो संगठन ने क्या कहा
इस बीच, खामेनलोक एरिया कोर कमेटी (KACCO) ने इस घटना पर दुख और गहरी चिंता जताई.
संगठन ने एक बयान में कहा, “हम मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताते हैं और उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हैं. 2 से 4 जून 2023 के दौरान हमारा अपना इलाका जलाकर तबाह कर दिया गया था. इसके बावजूद खामेनलोक इलाके के लोग फिर से बसने, अपने घरों और इलाकों को दोबारा बनाने और शांति से साथ रहने की उम्मीद लगाए हुए हैं.”
बयान में आगे कहा गया, “अज्ञात लोगों की ओर से की गई हिंसा की इस दुखद और बेवजह की घटना ने हमारे इलाके के लोगों की उम्मीदों को गहरा झटका दिया है. इससे उस कमजोर शांति को भी खतरा है, जिसे बहाल करने के लिए हम लगातार कोशिश कर रहे हैं. KACCO शांति बनाए रखने के अपने इरादे पर कायम है. हमने अपने इलाके में आपसी मेलजोल बनाए रखने, एक-दूसरे को समझने और संघर्ष रोकने के लिए लगातार हर संभव कोशिश की है. हिंसा कभी भी किसी समस्या का समाधान नहीं रही है और न ही कभी होगी.”
इसके अलावा, कुकी-जो संगठन ने सरकार, सुरक्षाबलों और आम लोगों समेत सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि वे “इलाके की सुरक्षा करने और लोगों को सुरक्षित रखने के लिए तुरंत कदम उठाएं.”
बयान में कहा गया, “हर समुदाय के निर्दोष लोगों को लगातार डर, धमकी और असुरक्षा के बिना जीने दिया जाना चाहिए. इसके अलावा, हम इस तरह की बेवजह की हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों समेत सभी से अपील करते हैं कि वे इंसानी जान की कीमत समझें और ऐसे काम बंद करें, जिनसे समुदायों के बीच अविश्वास और बढ़ता है.”
KACCO ने उन ‘शरारती तत्वों’ को लेकर भी चेतावनी दी, जो इस घटना का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं.
बयान में कहा गया, “इस बात की गंभीर आशंका है कि कुछ लोग अपने निजी हितों के लिए और शरारती तत्व इस घटना के लिए झूठे तौर पर KACCO और इलाके में रहने वाले कुकी-जो समुदाय को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश कर सकते हैं. ऐसा करके वे और हिंसा भड़काना और समुदायों के बीच बंटवारा बढ़ाना चाहते हैं.”
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