नई दिल्ली: आधी रात में, जब राजधानी के आसपास हजारों लोग सड़कों पर फंसे हुए थे, तब पाकिस्तान की सरकार और सेना के जनरलों ने स्वतंत्रता दिवस का एक भव्य समारोह आगे बढ़ाया. इसमें मई 2025 में भारत के साथ हुई सैन्य झड़प में सरकार जिसे अपनी “शानदार जीत” बताती है, उसकी याद में बनाए गए एक स्मारक का उद्घाटन किया गया.
यादगार-ए-फतह या विजय स्मारक का उद्घाटन इस्लामाबाद में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने किया. यह समारोह पाकिस्तान के सैनिकों को सम्मान देने और मरका-ए-हक (सच्चाई की लड़ाई) को याद करने के लिए आयोजित किया गया था. भारत में इसे ऑपरेशन सिंदूर कहा जाता है. यह 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच चार दिन तक चला सैन्य संघर्ष था.
समारोह में देश के राजनीतिक, सैन्य और न्यायिक प्रतिष्ठान के लोग शामिल हुए. इनमें राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, सीनेट के चेयरमैन सैयद यूसुफ रजा गिलानी, नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज सादिक, उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सीनेटर मोहम्मद इशाक डार, पाकिस्तान के चीफ जस्टिस याह्या अफरीदी, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर, एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू, चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल नावेद अशरफ, केंद्रीय मंत्री, प्रांतीय राजनीतिक नेतृत्व, सांसद, राजनयिक और सशस्त्र बलों के अधिकारी शामिल थे.
इस समारोह का संदेश साफ था. प्रधानमंत्री ने स्मारक को पाकिस्तान के संकल्प और दृढ़ता का प्रतीक बताया और फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर के नेतृत्व की तारीफ की. शरीफ ने कहा कि मरका-ए-हक में पाकिस्तान की “उल्लेखनीय जीत” से देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है. इसके बाद एक खास लाइट-एंड-साउंड शो हुआ, जिसमें पाकिस्तान के इतिहास और सैन्य सफर के महत्वपूर्ण अध्यायों की तस्वीरें स्मारक पर दिखाई गईं. इनमें मरका-ए-हक से जुड़ी घटनाएं भी शामिल थीं.
आधी रात को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने यादगार-ए-फतह पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और उस समय राष्ट्रगान बजाया गया.
फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री मोहम्मद शहबाज शरीफ को यादगार-ए-फतह के खास स्मृति चिह्न भी दिए. और फिर जश्न का दूसरा पक्ष भी सामने आया.
हर कोई खुश नहीं था.
आजादी का जश्न
जब पाकिस्तान का नेतृत्व आधी रात के समारोह के लिए इकट्ठा हुआ, तब हजारों आम लोग इस्लामाबाद की सड़कों पर फंसे हुए थे. राजधानी कुछ ऐसी लग रही थी जैसे स्वतंत्रता दिवस पर ट्रैफिक का ऐसा प्रयोग हो रहा हो, जिसमें शामिल होने के लिए किसी ने खुद से हामी नहीं भरी थी.
पाकिस्तानी लेखक इम्तियाज गुल ने X पर लिखा, “जब शासक नए स्मारक का आनंद ले रहे थे, तब सच में हजारों ‘भेड़ें, गुलाम’ मरी रोड, इस्लामाबाद हाईवे के कुछ हिस्सों पर फंसे हुए थे. I-8 के लोग घंटों तक लगभग कर्फ्यू जैसी स्थिति में रहे.”
X यूजर अरसलान रजा ने लिखा, “बस इस्लामाबाद की सड़कों को देखिए कि स्वतंत्रता दिवस पर आम जनता किस तरह की परेशानी झेल रही है.”
पाकिस्तान रॉयटर्स के पत्रकार आसिफ शहजाद ने पूरी तरह जाम पड़े इस्लामाबाद की Google इमेज शेयर करते हुए कैप्शन लिखा, “यह कैसी आजादी है कि जश्न मनाने के लिए आपको पूरे शहर की घेराबंदी करनी पड़ती है?”
इसके बाद उन्होंने अपने ही सवाल का तंज करते हुए जवाब दिया, “घर की खातिर सौ तकलीफें सह लो, आखिर घर अपना ही होता है.”
फरहान फारूक हैदर ने यादगार-ए-फतह को कब्र बताया. उन्होंने लिखा, “मकबरा बना दिया.”
एक अन्य यूजर, @masatmithizaat, ने इतिहास को लेकर एक बड़ी बात कही, “हर साल याद दिलाया जाना चाहिए: पाकिस्तान का जन्म एक राजनीतिक पार्टी के राजनीतिक संघर्ष से हुआ था. सेना ने इसमें हिस्सा नहीं लिया था और सेना के अधिकारियों ने इसका जोरदार विरोध किया था. यह नागरिकों के वोट से बना देश है, किसी जूते पहनने वाले फौजी को आपको इसके उलट मत बताने दीजिए.”
इसके बाद वही भारतीय नैरेटिव, जिसका पाकिस्तान विरोध करना चाहता है, फिर सामने आया. एक नाराज पाकिस्तानी X यूजर ने पूछा, “पाकिस्तान के कॉकरोच कब बाहर आएंगे?”
X यूजर नईम गुल ने आगे कहा, “यह अजीब देशों की वही त्रासदी है जो आज भी जारी है. ये कॉकरोच कब बाहर आएंगे या बाहर निकाले जाएंगे, कुछ पता नहीं.”
इसके बाद राजनीति, सेना और समारोह में किसे नहीं बुलाया गया, इसे लेकर शिकायतें शुरू हो गईं.
कार्यक्रम और लाइव टीवी पर नजर आने वाली एकमात्र मुख्यमंत्री मरियम नवाज थीं. पाकिस्तानी पूछ रहे हैं, “उन्हें यह ‘अनुचित बढ़ावा’ क्यों दिया जा रहा है?”
X यूजर Guch49 ने लिखा, “इस कार्यक्रम में सिर्फ मरियम सफदर को ही क्यों बुलाया गया, दूसरे प्रांतों के मुख्यमंत्री फील्ड मार्शल के दुश्मन हैं. मैं उससे नफरत करता हूं क्योंकि वह मरियम सफदर को अनुचित बढ़ावा दे रहा है.”
इस समारोह ने पाकिस्तान के ऑनलाइन व्यंग्य करने वालों को भी काफी सामग्री दी. Pehn Di Siri ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन और सऊदी क्राउन प्रिंस की खिलौना तुरही बजाते हुए एक तस्वीर शेयर की और लिखा, “पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर सऊदी अरब और तुर्की.”
डॉन के पूर्व संपादक सिरिल अल्मेडा ने भी एक सुझाव दिया, “अगर CCD आज रात बाजे निकाल दे, तो उसे काफी सद्भावना मिल सकती है.”
CCD का मतलब क्राइम कंट्रोल डिपार्टमेंट है. यह पंजाब पुलिस की एक विशेष और विवादित जांच इकाई है. इसे 2025 की शुरुआत में मुख्यमंत्री मरियम नवाज की पंजाब सरकार ने बनाया था. इस इकाई का गठन प्रांत में बड़े संगठित अपराध, गिरोह और गंभीर अपराध से निपटने के लिए किया गया था.
इसके बाद शायद पूरे समारोह का सबसे व्यंग्यात्मक पल आया.
अपने भाषण में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मुनीर को अपना “पसंदीदा फील्ड मार्शल” बताया था.
उन्होंने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति ने सैयद आसिम मुनीर का नाम 90 बार लेते हुए कहा कि वह मेरे सबसे अच्छे फील्ड मार्शल हैं. आसिम मुनीर उनके फील्ड मार्शल नहीं हैं, वह हमारे फील्ड मार्शल हैं.”
इस बात पर मंच पर मुस्कान और तालियां देखने को मिलीं. वीडियो में यह सुनने के बाद मुनीर, शरीफ के साथ मुस्कुराते हुए नजर आए और फिर तालियां बजाने लगे.
देश के सैन्य प्रमुख की राष्ट्रपति की ओर से की गई “अहंकार को खुश करने वाली” तारीफ कई लोगों को पसंद नहीं आई. X यूजर माजिद तमीूर ने X पर लिखा, “एक समय था जब या तो PPP या PMLN प्रतिष्ठान के खिलाफ लड़ते थे, जिसमें से एक ने प्रतिष्ठान के समर्थन से भी लड़ाई लड़ी थी. लेकिन आज दोनों GHQ की सुरक्षा और सत्ता के आशीर्वाद के साए में हैं. पाकिस्तान की राजनीति उथल-पुथल में नहीं, बल्कि पूरी तरह रुकी हुई है.”
एक अन्य X यूजर अहमद हसन बोबक ने आलोचना को और सीधे शब्दों में कहा, “यह आजादी का जश्न नहीं है, बल्कि राजा ने वारिसों को खुश करने के लिए दरबार सजाया है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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