नई दिल्ली: उत्तराखंड के चमोली जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच गुरुवार को एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की निर्माणाधीन सुरंग में कीचड़ और मलबे का एक बड़ा हिस्सा घुस गया. इस हादसे में सात मजदूरों की मौत हो गई. तीन लापता लोगों को खोजने के लिए कई एजेंसियों का सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है.
अधिकारियों ने बताया कि करीब 80 बचावकर्मियों की टीम सीने तक गहरे पानी और मलबे के बीच से गुजरकर फंसे मजदूरों को खोजने और बचाने में जुटी है. गुरुवार शाम 7 बजे शुरू हुआ ऑपरेशन शुक्रवार तक जारी रहा. बचावकर्मी लोहे से बने चप्पू वाले अस्थायी ड्रम राफ्ट और भारी खुदाई वाली मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
सुरंग के दोनों सिरों से पानी निकालने के लिए कम से कम 10 पानी पंप करने वाली मशीनें लगाई गई हैं. यहां सीमेंट भरने का काम चल रहा था.
जिला अधिकारियों ने दिप्रिंट को बताया कि जब यह घटना निर्माणाधीन टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) की मायापुर (पीपलकोटी) सुरंग में हुई, तब साइट पर 22 मजदूर काम कर रहे थे. पानी मिट्टी और दूसरे मलबे के साथ तेजी से सुरंग में घुसा और सभी मजदूर फंस गए.
बचाव दल 19 मजदूरों को बाहर निकालने में सफल रहा, जिनमें से सात की मौत हो गई. अधिकारियों ने बताया कि बाकी तीन मजदूरों को खोजने के लिए बचाव अभियान जारी है.
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के एक अधिकारी ने बताया कि मौके पर टीमें बारी-बारी से ऑपरेशन कर रही हैं. NDRF, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (DDRF) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) मिलकर बचाव अभियान चला रहे हैं. स्थानीय पुलिस और CISF के जवान भी ऑपरेशन में मदद कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, “यह बहुत बड़ा इलाका है, करीब 900 मीटर, जो पानी से भरा हुआ है और पानी के नीचे कीचड़ भी है. इसकी वजह से 900 मीटर के इस इलाके में सर्च ऑपरेशन करना मुश्किल हो रहा है.”
उन्होंने कहा कि कम दिखाई देना भी बचाव अभियान में रुकावट बन रहा है.
भारी बारिश, सुरंग में भरा पानी
चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने दिप्रिंट को बताया कि घटना से पहले कई दिनों से जिले में भारी बारिश हो रही थी. पंवार ने कहा, “करीब शाम 6.30 से 6.45 बजे के बीच सुरंग में 1.8 किलोमीटर के निशान पर एक जगह से मलबा और पानी तेजी से बाहर आया. वहां मौजूद मजदूर इसमें फंस गए.”
उन्होंने बताया, “सभी चट्टानों और पहाड़ियों की दरारों में बारिश का पानी जमा था. दो दिनों तक धूप निकली, जिससे गैस जैसा दबाव बना और सुरंग के ऊपर जमा पानी ने पूरी ताकत से इन दरारों को तोड़ दिया.”
THDC के विष्णुगढ़-पीपलकोटी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में टेल रेस टनल (TRT), जो टरबाइन से गुजरने के बाद पावरहाउस से पानी को बाहर ले जाती है, करीब 3 किलोमीटर लंबी है.
एक जिला अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “सुरंग के करीब 1.50 किलोमीटर लंबे हिस्से में सुरंग के धंसने या जमीन बैठने के कारण मलबा और पानी अंदर आने की स्थिति पैदा हुई. इसके कारण सुरंग के अंदर कुछ मजदूर फंस गए.”
लंबी रात
आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने दिप्रिंट को बताया, “हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे के साथ आया पानी था. सभी मजदूरों के लिए इधर-उधर जाना और बाहर निकलना मुश्किल था. बाहर निकलने के सभी रास्ते बंद थे. मलबा बहुत भारी था.”
NDRF अधिकारियों ने भी बताया कि उनकी बचाव टीम के पास जरूरी उपकरण और डॉग स्क्वॉड है.
रेस्क्यू साइट पर तैनात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “पानी सीने तक था. शुरुआत में हम आठ लोगों के पहले समूह को बचाने में सफल रहे. यहां फायर टीम को लगाया गया था. हमें ज्यादा समझदारी और तेजी से काम करने की रणनीति बनानी पड़ी, क्योंकि लोगों को हाथ से बचाना मुश्किल था. हमारा पहला विचार ड्रम की मदद से एक राफ्ट बनाने का था. हमने लोहे से उसका चप्पू बनाया. राफ्ट काफी काम आया.”
उन्होंने कहा कि अगला लक्ष्य एक बार में ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाना था, इसलिए एक बड़े राफ्ट की जरूरत थी.
अधिकारी ने बताया कि सुरंग में लगाई गई खुदाई करने वाली मशीनें काफी काम आईं. ऊपर बताए गए अधिकारी ने कहा, “इससे पानी के तेज बहाव के बीच आगे बढ़ने में मदद मिली. इसकी बाल्टी का इस्तेमाल एक साथ कई लोगों को ले जाने के लिए किया गया.”
उन्होंने कहा, “लक्ष्य था कि हम ज्यादा से ज्यादा तरीकों का इस्तेमाल करें. सुरंग के अंदर रोशनी थी, लेकिन हमें पता था कि मजदूर घबराए हुए होंगे.”
बचाव अभियान के दौरान मशीनें लगातार पानी बाहर निकाल रही थीं.
NDRF के एक अन्य असिस्टेंट कमांडेंट ने बताया कि पानी की मात्रा कम करने के लिए एक मशीन लगाई गई थी. उन्होंने कहा, “जैसे ही पानी का स्तर कम होने लगा, स्थिति साफ होने लगी. अंदर पानी का स्तर बढ़ने के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण थी.”
उत्तराखंड, झारखंड और बिहार के मजदूर
जिला अधिकारियों ने दिप्रिंट को बताया कि मौके पर काम कर रहे मजदूर उत्तराखंड, झारखंड, बिहार और दूसरे राज्यों से थे. मृतकों की पहचान प्रदीप सिंह, मुकेश, दुर्लभ शर्मा, विजय, जितेंद्र कुमार, लोकेश्वर और भुवनेश्वर के रूप में हुई है.
वे हेल्पर, मिस्त्री, वेल्डर, फोरमैन, स्टील फिट्टर, मार्लो ऑपरेटर, टैमरॉक ऑपरेटर और खलासी के तौर पर काम कर रहे थे.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार से फोन पर बात कर घटना की विस्तृत जानकारी ली और तुरंत सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
धामी ने झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से भी फोन पर बात की और सुरंग हादसे से प्रभावित मजदूरों को हर संभव मदद का भरोसा दिया.
उन्होंने कहा कि अगर किसी मजदूर को बेहतर इलाज के लिए किसी बड़े अस्पताल में भेजने की जरूरत पड़ती है, तो उसके लिए भी उचित व्यवस्था की जाएगी.
जिला अधिकारियों ने बताया कि कुछ मजदूरों को गंभीर चोटें आई हैं और उनकी हालत स्थिर की जा रही है, जबकि मामूली चोट वाले मजदूरों को एक्स-रे के लिए भेजा गया है.
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