(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, 30 अक्टूबर (भाषा) नेपाल और भारत शुक्रवार को अपने सशस्त्र बलों की 10वीं समन्वय बैठक के समापन पर सीमा सुरक्षा को मजबूत करने, तकनीक-अनुकूल सीमा प्रबंधन को बढ़ावा देने एवं द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए।
नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के महानिरीक्षक नारायण दत्त पौडेल और भारत के सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के महानिदेशक संजय सिंघल की अगुवाई में बुधवार को यहां एपीएफ मुख्यालय में एक बैठक शुरू हुई थी।
इस बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
नौवीं बैठक में लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा करते हुए, दोनों पक्षों ने तीन स्तरों—रणनीतिक, परिचालन और कार्य स्तर—पर बेहतर सहयोग एवं त्वरित सूचना विनिमय के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों तथा सीमा-पार अपराधों को नियंत्रित करने की अपनी संयुक्त प्रतिबद्धता दोहरायी।
एपीएफ नेपाल द्वारा जारी एक बयान के अनुसार दोनों पक्षों ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार से द्विपक्षीय सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
इस बैठक में सीमावर्ती क्षेत्र में अवैध खेती, अतिक्रमण और अवैध निर्माण कार्यों को रोकने के लिए संयुक्त प्रयास जारी रखने का निर्णय लिया गया ताकि ‘नो-मैन्स-लैंड’ (किसी के अधिकार क्षेत्र में न आने वाली भूमि) का प्रभावी प्रबंधन हो।
दोनों पक्ष ‘सीमा कार्यबल’ और ‘सर्वे ऑफिशियल्स कमिटी’ के निर्णयों के अनुसार, सीमा स्तंभों के निरंतर रखरखाव, संरक्षण और पुनर्निर्माण के लिए जमीनी स्तर पर आपसी समन्वय को बढ़ावा देने पर सहमत हुए।
बयान में कहा गया है कि सीमा पार के आपराधिक नेटवर्क, अवैध तस्करी, मानव तस्करी, जाली नोट और मादक पदार्थों के प्रवाह को नियंत्रित करने तथा तीसरे देशों के नागरिकों की अनधिकृत आवाजाही को रोकने में समय पर जानकारी साझा करने की प्रभावशीलता को देखते हुए, दोनों पक्षों ने इस तरह के सहयोग को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
दोनों पक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों में तीसरे देशों के नागरिकों की अवैध आवाजाही को रोकने के लिए दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को मजबूत करने, ‘नो-मैन्स-लैंड’ में संयुक्त गश्त करने और संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों के बारे में तुरंत जानकारी साझा करने पर भी सहमत हुए।
उन्होंने पारंपरिक सीमा सुरक्षा प्रणालियों को आधुनिक, तकनीक-अनुकूल ‘स्मार्ट बॉर्डर मैनेजमेंट’ में बदलने के तरीकों पर भी चर्चा की। प्रस्तावित उपायों में ‘नो-मैन्स-लैंड’ में निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाना, प्रमुख सीमा प्रवेश बिंदुओं पर सामान स्कैन करने वाली मशीनें और ‘वॉक-थ्रू’ मेटल डिटेक्टर तैनात करना, तथा ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ाना शामिल था।
अगली समन्वय समिति बैठक अगले साल भारत में होगी। ये बैठकें 2012 से आयोजित की जा रही हैं।
भाषा राजकुमार पवनेश
पवनेश
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