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Monday, 22 June, 2026
होमविदेशकीर स्टार्मर ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद से दिया इस्तीफा, 10 वर्षों में ऐसा करने वाले छठे PM

कीर स्टार्मर ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद से दिया इस्तीफा, 10 वर्षों में ऐसा करने वाले छठे PM

संसद में 174 सीटों का बहुमत होने के बावजूद, उनके पद छोड़ने की चर्चा तब शुरू हुई जब ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम ने मेकरफील्ड उपचुनाव में बड़ी जीत हासिल की.

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नई दिल्ली: आधुनिक ब्रिटिश इतिहास में लेबर पार्टी को सबसे बड़ी चुनावी जीतों में से एक दिलाने के दो साल बाद, कीर स्टार्मर ने सोमवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.

दिलचस्प बात यह है कि उनका इस्तीफा उस घोषणा के एक दिन बाद आया है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा था कि स्टार्मर इस्तीफा देंगे.

अपने इस्तीफे के भाषण में स्टार्मर ने कहा कि वह “पूरी गरिमा के साथ स्वीकार करते हैं” कि अगले चुनाव में लेबर पार्टी का नेतृत्व करने के लिए वह सबसे उपयुक्त व्यक्ति नहीं हैं.

174 सीटों के बड़े संसदीय बहुमत के बावजूद, स्टार्मर के जाने की संभावना पर चर्चा तब तेज हो गई जब 56 वर्षीय एंडी बर्नहैम, जो ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर और लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, ने पिछले सप्ताह मेकरफील्ड उपचुनाव में शानदार जीत हासिल की.

बर्नहैम ने संसद की सीट जीती और औपचारिक रूप से पार्टी नेतृत्व की दौड़ में उतर गए. लेबर पार्टी के 100 से अधिक सांसद, जो हाउस ऑफ कॉमन्स में पार्टी की कुल ताकत का लगभग एक चौथाई हैं, पहले ही सार्वजनिक रूप से स्टार्मर से इस्तीफा देने या अपने जाने का समय बताने की मांग कर चुके थे.

गुरुवार को चुनाव नतीजों के बाद, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार विदेश मंत्री यवेट कूपर, गृह मंत्री शबाना महमूद और परिवहन मंत्री हाइडी अलेक्जेंडर सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों ने निजी तौर पर प्रधानमंत्री को अपने पद छोड़ने की तैयारी शुरू करने की सलाह दी थी.

पिछले कुछ महीनों में स्टार्मर की लोकप्रियता में तेज गिरावट आई है. लेबर सांसद सरकार के कई विवादास्पद फैसलों से नाराज थे, जिनमें कल्याण सुधारों को संभालने का तरीका और पीटर मेंडलसन को वाशिंगटन में राजदूत नियुक्त करना शामिल है. इस नियुक्ति के बाद जेफ्री एप्स्टीन के साथ मेंडलसन के संबंधों पर फिर से सवाल उठने लगे थे.

द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, यूगव सर्वे में केवल 19 प्रतिशत ब्रिटिश लोगों की स्टार्मर के बारे में सकारात्मक राय थी. इससे वह लेबर पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं से पीछे थे. लेकिन बर्नहैम की बड़ी उपचुनावी जीत ने असंतोष को नेतृत्व संकट में बदल दिया.

उन्होंने आधे से ज्यादा वोट हासिल किए और उत्तर-पश्चिम इंग्लैंड की इस सीट पर लेबर की बढ़त को 9,000 से अधिक वोटों तक बढ़ा दिया. इसके साथ ही बर्नहैम पार्टी के सबसे मजबूत विकल्प के रूप में उभरे.

अपनी जीत के भाषण में उन्होंने लेबर पार्टी को चेतावनी दी कि उसके पास “बदलने का आखिरी मौका” है. इस बयान को व्यापक रूप से स्टार्मर को सीधी चुनौती माना गया.

रिपोर्टों के अनुसार, ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर के रूप में बर्नहैम ने उन इलाकों में रिफॉर्म यूके और उसके नेता निगेल फराज का खुलकर मुकाबला करने की पहचान बनाई है, जहां लेबर पार्टी कामकाजी वर्ग का समर्थन बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है. रिफॉर्म यूके राष्ट्रीय जनमत सर्वेक्षणों में लगातार आगे चल रही है, इसलिए कई लेबर सांसद बर्नहम को पार्टी की सबसे मजबूत चुनावी ताकत मानने लगे हैं.

2016 से अब तक ब्रिटेन में छह प्रधानमंत्री हो चुके हैं. डेविड कैमरन और थेरेसा मे से लेकर बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस, ऋषि सुनक और अब स्टार्मर तक.

स्टार्मर का उदय और पतन

स्टार्मर 2024 में सत्ता में आए थे. उन्होंने कंजर्वेटिव पार्टी की लंबे समय तक चली अंदरूनी खींचतान के बाद स्थिरता का वादा किया था. लेकिन समय के साथ उनकी सरकार को जनता का समर्थन कम मिलता गया, नीतियों में बार-बार बदलाव हुए और उसकी राजनीतिक दिशा को लेकर सवाल बढ़ते गए.

द गार्जियन ने स्टार्मर के इस्तीफे के बाद एक लेख में लिखा, “स्टार्मर के सबसे करीबी सहयोगी और समर्थक भी मानेंगे कि गलती काफी हद तक उन्हीं की थी. आधुनिक दौर में कोई भी प्रधानमंत्री कागजों पर इस पद के लिए इतना उपयुक्त नहीं दिखा और व्यवहार में इतना अयोग्य साबित नहीं हुआ.”

लेख में आगे कहा गया, “स्टार्मर की व्यक्तिगत लोकप्रियता इतनी खराब थी कि सिर्फ़ (लिज़) ट्रस ने ही उन्हें आधुनिक पोलिंग इतिहास का सबसे अलोकप्रिय PM बनने से बचाया. इसमें कहा गया है कि फ़ोकस ग्रुप ने उन्हें ‘जेलीफ़िश’ और ‘डोरमैट’ जैसे शब्दों से भी संबोधित किया.”

बर्नहैम सोमवार को सांसद के रूप में शपथ लेंगे. स्टार्मर ने अपने इस्तीफे के भाषण में कहा कि अगर बर्नहैम के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं होता है तो वह जुलाई के मध्य तक प्रधानमंत्री पद संभाल लेंगे. अगर चुनाव होता है तो अगस्त के अंत तक नया प्रधानमंत्री चुन लिया जाएगा.

उन्होंने कहा, “मैं लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति से अनुरोध करूंगा कि वह समय-सारिणी तय करे. 9 जुलाई से नामांकन शुरू होंगे और गर्मियों की छुट्टियों से पहले प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. यदि मुकाबला होता है, तो इससे यह सुनिश्चित होगा कि सितंबर में संसद लौटने से पहले नया नेता चुन लिया जाए. जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, मैं प्रधानमंत्री पद पर बना रहूंगा और सत्ता का सुचारु हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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