दतिया (मध्य प्रदेश): कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सोमवार को अयोध्या राम मंदिर में कथित दान गबन मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को बचा रहे हैं और ट्रस्ट के कामकाज की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है.
दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर में कथित दान चोरी की घटनाओं ने लोगों की आस्था को गहरी चोट पहुंचाई है.
उन्होंने कहा, “आज सबसे बड़ा मुद्दा हमारी सबसे बड़ी आस्था पर लगा आघात है. अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थान पर बने राम मंदिर के लिए निर्मोही अखाड़ा ने 150 साल से ज्यादा और गोरखनाथ ट्रस्ट के महंतों ने करीब 100 साल तक संघर्ष किया. अब उसी रामलला के मंदिर में चढ़ावे की चोरी हो रही है.”
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि 40 दिनों में 71 बार चोरी हुई और CCTV फुटेज भी गायब हो गई.
उन्होंने कहा, “लेखाकार महिपाल सिंह ने शिकायत की, लेकिन कार्रवाई करने की बजाय चंपत राय ने उन्हें ही हटा दिया.”
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि महिपाल सिंह और दिनानाथ वर्मा, जो पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र से जुड़े रहे थे, दोनों RSS के कार्यकर्ता थे और उनकी नियुक्ति चंपत राय ने की थी.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर परियोजना से जुड़े एक सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता दिनानाथ वर्मा ने ठेकेदारों द्वारा 40 प्रतिशत कमीशन मांगे जाने की शिकायत की थी.
दिग्विजय सिंह ने कहा, “एक ईमानदार इंजीनियर ने चंपत राय से 40 प्रतिशत कमीशन की शिकायत की. अगले ही दिन उनसे कह दिया गया कि अब आपकी ज़रूरत नहीं है.”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, “PM मोदी ऐसे व्यक्ति चंपत राय को बचा रहे हैं. ट्रस्ट की जवाबदेही और जिम्मेदारी उन्हीं की है. इस ट्रस्ट का गठन भी उन्हीं के नेतृत्व में हुआ था.”
दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की धार्मिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि सभी शंकराचार्यों ने कहा है कि मंदिर में स्थापित रामलला की मूर्ति बाल स्वरूप में नहीं है.
उन्होंने यह भी कहा कि उनके क्षेत्र में भगवान राम की मूर्तियां हमेशा सफेद पत्थर से बनाई जाती हैं, जबकि अयोध्या में काले पत्थर की मूर्ति स्थापित की गई.
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मंदिर में कलश और ध्वज स्थापित होने से पहले ही प्राण प्रतिष्ठा कर दी गई, जो धार्मिक परंपराओं के खिलाफ है.
उन्होंने यह भी कहा कि प्राण प्रतिष्ठा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यजमान की भूमिका अकेले निभाई, जबकि सनातन परंपरा के अनुसार यजमान को अपनी पत्नी के साथ बैठना चाहिए.
उन्होंने कहा, “प्राण प्रतिष्ठा में यजमान अकेला नहीं बैठता. उसे अपनी पत्नी के साथ बैठना चाहिए. यह सनातन धर्म की परंपराओं और नियमों के खिलाफ है.”
अपनी बात खत्म करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा, “इसलिए ये धार्मिक लोग नहीं हैं, बल्कि चंदा चोर हैं.”