श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बीजेपी की ओर से भेजे गए मानहानि नोटिस को “सम्मान की बात” बताया. उन्होंने कहा कि वह ऐसी राजनीतिक ताकत हैं, जिसे बीजेपी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती.
सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उमर अब्दुल्ला ने कहा, “मुझे कोई समन नहीं मिला है. मुझे सिर्फ एक वकील का पत्र मिला है. मैं इसे अपने लिए सम्मान मानता हूं. मैं ऐसी राजनीतिक ताकत हूं, जिसे वे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते. साथ ही, यह भी दिखाता है कि बीजेपी राजनीतिक लड़ाई कैसे लड़ती है. वह राजनीतिक लड़ाई को अदालतों के पीछे छिपकर लड़ती है.”
इससे पहले सोमवार को जम्मू-कश्मीर बीजेपी ने उमर अब्दुल्ला को कानूनी नोटिस भेजा था.
यह नोटिस उमर अब्दुल्ला के उस आरोप के बाद भेजा गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजेपी ने उनकी सरकार गिराने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों को 20 से 30 करोड़ रुपये, मंत्री पद और राज्य का दर्जा बहाल करने का लालच दिया था.
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से जम्मू-कश्मीर के कई वरिष्ठ बीजेपी नेता लगातार नेशनल कॉन्फ्रेंस और उसके नेतृत्व पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं.
उन्होंने कहा, “पिछले कुछ महीनों में जम्मू-कश्मीर बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं, खासकर एक नेता ने, नेशनल कॉन्फ्रेंस और उसके नेतृत्व पर बार-बार झूठे और मानहानिकारक आरोप लगाए हैं. अब हम भी उस नेता और कुछ अन्य बीजेपी नेताओं को कानूनी नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू करेंगे.”
वहीं, बीजेपी की ओर से यह कानूनी नोटिस अधिवक्ता परिमोक्ष सेठ ने पार्टी के जम्मू-कश्मीर अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सत पाल शर्मा की ओर से भेजा है.
नोटिस में उमर अब्दुल्ला के आरोपों को “झूठा, बेबुनियाद और मानहानिकारक” बताया गया है.
नोटिस के मुताबिक, 11 जुलाई को श्रीनगर में एक कार्यक्रम के दौरान उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया था कि बीजेपी पदाधिकारियों ने जम्मू क्षेत्र के नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायकों से संपर्क कर उन्हें 20-30 करोड़ रुपये, मंत्री पद और राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था, ताकि वे बीजेपी में शामिल हो जाएं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील, जो बीजेपी से जुड़े हैं, उन्होंने भी एनसी विधायकों को रिश्वत देने की पेशकश की थी.
बीजेपी के नोटिस में कहा गया है कि ये सभी आरोप पूरी तरह झूठे, दुर्भावनापूर्ण और तथ्यों से परे हैं तथा इससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है.
नोटिस में उमर अब्दुल्ला से मांग की गई है कि वे 7 दिनों के भीतर लिखित रूप से अपने आरोप वापस लें, बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगें और भविष्य में बीजेपी के खिलाफ ऐसे बयान देने या फैलाने से बचें.
नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया, तो उनके खिलाफ दीवानी और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी. साथ ही 100 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे समेत कानून के तहत उपलब्ध अन्य कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे.