चेन्नई: तमिलनाडु में अधर में लटकी विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) अब चुनाव के बाद गठबंधन के विकल्प तलाश रही है.
दिप्रिंट को मिली जानकारी के मुताबिक, पार्टी खासकर कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के साथ बातचीत कर रही है, जो पहले द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) का हिस्सा थीं.
कांग्रेस के महासचिव (संगठन) के. सी. वेणुगोपाल ने मंगलवार शाम मीडिया से कहा कि टीवीके प्रमुख विजय ने तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस से समर्थन मांगा है.
उन्होंने कहा, “कांग्रेस साफ है कि तमिलनाडु का जनादेश एक धर्मनिरपेक्ष सरकार के लिए है, जो संविधान की पूरी भावना के साथ रक्षा करे. कांग्रेस नहीं चाहती कि भारतीय जनता पार्टी या उसके सहयोगी किसी भी तरह से तमिलनाडु में सरकार चलाएं. इसलिए कांग्रेस नेतृत्व ने तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी को निर्देश दिया है कि वह राज्य की भावना को ध्यान में रखते हुए विजय के अनुरोध पर अंतिम फैसला ले.”
कांग्रेस के इस रुख पर डीएमके के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने कहा कि उनकी पार्टी इस कदम का समर्थन नहीं करती. उन्होंने एक्स पर लिखा, “यह उनका एकतरफा फैसला है.”
उन्होंने कांग्रेस को “पीठ में छुरा घोंपने वाला” बताया और कहा कि इस चुनाव में कांग्रेस को जो पांच सीटें मिलीं, वो भी डीएमके की वजह से मिलीं.
उन्होंने एक्स पर लिखा, “जब भारतीय जनता पार्टी/राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राहुल गांधी को ‘पप्पू’ कहकर ट्रोल कर रहे थे, तब हमारे नेता एम. के. स्टालिन ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताया था.”
इस बीच अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) ने भी कहा है कि अगर विजय संपर्क करते हैं, तो वह साथ आने को तैयार है. एआईएडीएमके के प्रवक्ता कोवाई सत्यन ने दिप्रिंट को दिए इंटरव्यू में कहा, “अगर विजय संपर्क करते हैं, तो एआईएडीएमके सरकार में शामिल होने के लिए तैयार है.”
पार्टी के विधायक सी. वी. शन्मुगम बातचीत की अगुवाई कर रहे हैं और सभी विधायकों ने टीवीके को समर्थन देने पर सहमति जताई है.
234-सदस्यों वाली तमिलनाडु विधानसभा में साधारण बहुमत के लिए 118 सीटों की ज़रूरत होती है. इससे चुनाव के बाद तेज बातचीत, गठबंधन बनाने और राजनीतिक बदलाव का माहौल बन गया है. विजय की टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं.
पट्टाली मक्कल कच्ची (पीएमके), जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा थी, के पास 4 सीटें हैं और पार्टी को उम्मीद है कि उसे भी गठबंधन की बातचीत के लिए बुलाया जाएगा.
टीवीके के डीएमके या एआईएडीएमके से संपर्क करने की संभावना कम है, क्योंकि वह खुद को एक नया विकल्प दिखाना चाहती है. चुनाव से पहले टीवीके ने अकेले चुनाव लड़ा और खुद को द्रविड़ पार्टियों और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ रखा. पार्टी का मुख्य विकल्प छोटे दलों के साथ गठबंधन करना है, जिसमें कांग्रेस (5 सीट), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीआई-एम), विदुथलाई चिरुथाइगल कच्ची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) शामिल हैं.
टीवीके को सरकार बनाने के लिए 10 सीटों की जरूरत है और अगर कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई-एम, आईयूएमएल और वीसीके साथ आते हैं, तो गठबंधन के पास 121 सीटें हो जाएंगी, जो बहुमत 118 से ज्यादा है.
हालांकि, टीवीके के सूत्रों ने अभी तक छोटे दलों से बातचीत की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उन्होंने कहा है कि वे “साफ-सुथरी सरकार” बनाएंगे. टीवीके के संयुक्त महासचिव सी. टी. आर. निर्मल कुमार ने संपर्क करने पर कोई जवाब नहीं दिया.
टीवीके प्रमुख विजय ने मंगलवार को एक बयान जारी किया. उन्होंने कहा, “पार्टी की शुरुआत से ही हमें समर्थन करने वालों से ज्यादा लोग हमारा मजाक उड़ाते थे.”
विजय ने कहा, “हमने कहा था कि यह चुनाव—जिसने पूरे भारत की राजनीति को हिला दिया—एक ‘चमत्कारी चुनाव’ होगा. अब यह बात हर तरह से सही साबित हो गई है…इस नतीजे से साफ हो गया है कि टीवीके इस राज्य में बदलाव लाने वाली सबसे बड़ी ताकत है.”
विजय का शपथ ग्रहण समारोह गुरुवार को जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में होने की उम्मीद है. वह बुधवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से लोक भवन में मिलेंगे और विधायकों के समर्थन पत्र देकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे.
कांग्रेस टीवीके के साथ शुरुआती बातचीत कर चुकी है और इसे तमिलनाडु में अपनी खोई हुई पकड़ वापस पाने का मौका मान रही है.
कांग्रेस सांसद ससिकांत सेंथिल ने दिप्रिंट से कहा, “आगे की रणनीति पर फैसला हाईकमान ले रहा है. चुनाव नतीजों पर दिल्ली में चर्चा हो रही है.” जब उनसे पूछा गया कि क्या टीवीके ने कांग्रेस को बातचीत के लिए बुलाया है, तो उन्होंने कहा कि इस पर भी दिल्ली में फैसला होगा.
सोमवार को राहुल गांधी ने एक्स पर विजय को जीत की बधाई दी और कहा, “मैंने विजय से बात की और उन्हें टीवीके के शानदार नतीजे पर बधाई दी. यह जनादेश युवाओं की बढ़ती आवाज़ को दिखाता है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.”
मंगलवार को राहुल गांधी का धन्यवाद करते हुए विजय ने एक्स पर लिखा, “हम जनता की सेवा में उत्कृष्टता और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे. राजनीति से ऊपर उठकर हम तमिलनाडु के लोगों के हित को प्राथमिकता देंगे.”
इस बीच सीपीआई (एम) के राज्य सचिव पी. शन्मुगम ने कहा कि सरकार बनाने के मुद्दे पर टीवीके को अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए.
उन्होंने कहा, “टीवीके को खुलकर बताना चाहिए कि वह आगे क्या करना चाहती है. जब तक वे अपनी स्थिति साफ नहीं करेंगे, हम अपना रुख नहीं बता सकते.”
उन्होंने कहा कि अभी तक पार्टी को बातचीत के लिए कोई न्योता नहीं मिला है.
फरवरी 2024 में बनी विजय की पार्टी को करीब 35 प्रतिशत वोट मिले और उसने पेरंबूर और त्रिची ईस्ट सहित कई अहम सीटें जीतीं.
मंगलवार को एम. के. स्टालिन से मुलाकात के बाद वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने कहा, “तमिलनाडु के लोग गठबंधन सरकार चाहते हैं. हमारा लक्ष्य धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करना था, इसलिए हमने टीवीके को मुख्य विरोधी नहीं बनाया, बल्कि भारतीय जनता पार्टी और एआईएडीएमके को निशाना बनाया.”
हालांकि, बाद में उन्होंने कहा, “हम टीवीके के साथ गठबंधन सरकार के बारे में नहीं सोच रहे हैं. हम अभी भी डीएमके के साथ हैं और धर्मनिरपेक्षता के लिए काम करेंगे. हमें टीवीके से किसी निमंत्रण की उम्मीद नहीं है.”
चूंकि, पीएमके को अक्सर जाति आधारित राजनीति के लिए आलोचना झेलनी पड़ती है, इसलिए टीवीके को वीसीके या पीएमके में से किसी एक के साथ गठबंधन का फैसला करना होगा. पीएमके के प्रवक्ता के. बालू और अंबुमणि रामदास के प्रतिनिधियों ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एआईएडीएमके बाहर से समर्थन दे सकती है. राजनीतिक विश्लेषक अरुण कुमार ने कहा, “कांग्रेस का गठबंधन में आना तय है, लेकिन एआईएडीएमके के साथ आने में भारतीय जनता पार्टी एक मुद्दा है. हालांकि, बाहर से समर्थन लिया जा सकता है. टीवीके डीएमके को सत्ता से बाहर रखना चाहती है और उसे अपना मुख्य विरोधी मानती है. टीवीके के कई नेताओं के एआईएडीएमके नेताओं से अच्छे संबंध हैं, इसलिए वहां से भी समर्थन मिल सकता है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: सिल्वर स्क्रीन के स्टार से तमिलनाडु की राजनीति के नए गोल्डन बॉय तक—विजय ने लंबा सफर तय किया