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Sunday, 19 July, 2026
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राम मंदिर दान ‘चोरी’ मामले का 2027 UP के विधानसभा चुनावों पर क्या होगा असर?

'दिप्रिंट' ने सीतापुर, हरदोई और बाराबंकी ज़िलों के गांवों का दौरा किया, जहां राम मंदिर चंदा चोरी घोटाले से जुड़ी रील्स ग्रामीणों के सोशल मीडिया फ़ीड पर छाई हुई हैं.

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सीतापुर/हरदोई/बाराबंकी: “हर भक्त के लिए यह दुख की बात है. हम श्रद्धा से दान देते हैं. अगर वही पैसा चोरी हो जाए तो दर्द तो होगा ही.”

सीतापुर जिले के पुरनपुर गांव के 28 वर्षीय राज नारायण शुक्ल अयोध्या राम मंदिर में दान की कथित चोरी के मामले पर बात करते हुए दुखी नजर आए. उन्होंने भी दो बार दान दिया था. पहली बार 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा से पहले 2,100 रुपये और दूसरी बार उसके बाद 1,100 रुपये.

लेकिन मंदिर में जो हुआ, उससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर उनका भरोसा नहीं डगमगाया.

उन्होंने अपने घर के बाहर दिप्रिंट से बातचीत में कहा, “यह मामला ट्रस्ट चलाने वाले लोगों का है, बीजेपी का नहीं. योगी कार्रवाई करेंगे. जो भी दोषी है, उसे सजा मिलनी चाहिए.”

उत्तर प्रदेश में 2017 से योगी आदित्यनाथ की सरकार है. ऐसे में शुक्ल की यह बात मुख्यमंत्री और बीजेपी के लिए राहत देने वाली हो सकती है, क्योंकि विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर है और बीजेपी अगला विधानसभा चुनाव 10 साल की सरकार के बाद लड़ने जा रही है.

राज नारायण शुक्ल के लिए कानून-व्यवस्था ज्यादा बड़ा मुद्दा है और इस मामले में वह योगी सरकार को पूरे अंक देते हैं. उनका कहना है कि योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक कानून-व्यवस्था में सुधार है.

उन्होंने गांव की ओर जाने वाली सड़क की तरफ इशारा करते हुए कहा, “जिस सड़क से आप यहां आए हैं, पहले शाम होते ही वहां काफी गुंडागर्दी होती थी. अब योगी राज में किसकी हिम्मत है?”

कुछ ही दूरी पर रहने वाले 23 वर्षीय आशुतोष शुक्ल ने कहा कि सोशल मीडिया की वजह से राम मंदिर में दान चोरी का मामला अब नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया है.

उन्होंने कहा, “हर गांव में लोग अयोध्या से जुड़े रील देख रहे हैं. अब हर कोई चंपत राय का नाम जानता है, जिन्होंने दान चोरी का मामला सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया, और उनके पूर्व ड्राइवर टिन्नू यादव का नाम भी.”

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “गांव के लोगों ने मंदिर के लिए दान दिया था, इसलिए लोगों में गुस्सा है.”

लेकिन क्या इसका असर वोट पर पड़ेगा? आशुतोष, राज नारायण की तरह, मानते हैं कि नहीं.

For villagers in Sitapur district's Puranpur say law and order is of more immediate concern for them. | Photo: Prashant Srivastava/ThePrint
सीतापुर ज़िले के पूरनपुर के ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए कानून-व्यवस्था ज़्यादा ज़रूरी और तत्काल चिंता का विषय है। | फ़ोटो: प्रशांत श्रीवास्तव/दिप्रिंट

उन्होंने कहा, “इस मुद्दे को चुनाव से नहीं जोड़ना चाहिए.” उन्होंने कहा कि जातीय समीकरण, महंगाई और कानून-व्यवस्था ही वोटिंग के फैसले को प्रभावित करते रहेंगे.

मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों का चुनाव केंद्र सरकार ने किया था, इसलिए प्रधानमंत्री मोदी जिम्मेदार हैं. इसी तरह राज्य पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए थी, इसलिए मुख्यमंत्री योगी भी जिम्मेदार हैं. मीडिया उन्हें बचा रहा है.

शुभम मिश्रा, गोडवा गांव, हरदोई

सीतापुर, हरदोई और बाराबंकी के गांवों में दिप्रिंट को ऊंची जाति के मतदाताओं में, जो बीजेपी का मुख्य वोट बैंक माने जाते हैं, लगभग इसी तरह की राय सुनने को मिली. दान की कथित चोरी पर गुस्सा होने के बावजूद वे बड़े पैमाने पर बीजेपी के साथ खड़े नजर आए.

हालांकि कुछ लोगों ने आलोचना भी की. उनका मानना था कि मंदिर में जो हुआ, उसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों जिम्मेदार हैं.

हरदोई के गोडवा गांव के 25 वर्षीय शुभम मिश्रा ने कहा, “मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों का चुनाव केंद्र सरकार ने किया था, इसलिए प्रधानमंत्री मोदी जिम्मेदार हैं. इसी तरह राज्य पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए थी, इसलिए मुख्यमंत्री योगी भी जिम्मेदार हैं. मीडिया उन्हें बचा रहा है. जवाबदेही ऊपर तक तय होनी चाहिए.”

कुछ किलोमीटर दूर मीनापुर गांव में रहने वाली ओबीसी समुदाय की राम देवी ने कहा कि दान चोरी से ज्यादा उनके लिए खराब सड़कें और सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलना बड़ा मुद्दा है.

'Kai logon ko abhi tak Aawas Yojana aur shauchalay ka labh nahi mila. Vote in muddon par padega,' says Ram Devi for Hardoi when asked if the donation 'theft' case would influence voting choices. | Prashant Srivastava/ThePrint
‘कई लोगों को अभी तक आवास योजना और शौचालय का लाभ नहीं मिला है. वोट पर पड़ेगा वोट,’हरदोई की राम देवी से जब पूछा गया कि क्या दान ‘चोरी’ का मामला मतदान विकल्पों को प्रभावित करेगा, तो उन्होंने कहा | प्रशांत श्रीवास्तव/दिप्रिंट

उन्होंने कहा, “मुझे चंदा चोरी की जानकारी है, लेकिन यहां चुनाव के मुद्दे अलग हैं. सड़कें खराब हैं. कई लोगों को अभी तक आवास योजना और शौचालय का लाभ नहीं मिला है. वोट इन मुद्दों पर पड़ेगा.”

‘चंदा चोरी छोड़िए, यहां अधिकारी चोर हैं’

जो समुदाय किसी एक राजनीतिक दल के स्थायी समर्थक नहीं माने जाते, उनके बीच भी राम मंदिर में दान की कथित चोरी का मामला चर्चा में है. लेकिन यह ऐसा मुद्दा नहीं है, जिसके आधार पर वे अपना वोट तय करेंगे.

हरदोई जिले के मीनापुर गांव के 45 वर्षीय दलित किसान सुक्रू लाल ने कहा, “राम मंदिर में कथित चोरी बड़ा मामला हो सकता है, लेकिन हमारे लिए गांव और ब्लॉक स्तर पर फैला भ्रष्टाचार उससे भी बड़ी समस्या है.”

उन्होंने कहा, “हमने सरकारी योजना के तहत दो बार शौचालय के लिए आवेदन किया, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ. चंदा चोरी छोड़िए, यहां अधिकारी चोर हैं, प्रधान चोर हैं. जनता का हक खा रहे हैं.”

राम मंदिर में कथित चोरी एक बड़ा मुद्दा हो सकता है, लेकिन हमारे लिए गांव और ब्लॉक स्तर पर भ्रष्टाचार ज़्यादा बड़ी समस्या है.

दलित किसान सुक्रू लाल, हरदोई  

उनके पड़ोस में रहने वाली 49 वर्षीय दलित महिला आशा कुमारी ने इस रिपोर्टर को अपने फूस के घर में बुलाया. उन्होंने कहा, “सरकारी आवास योजना के तहत हमें बेहतर घर मिलना चाहिए, लेकिन कोई हमारी मदद नहीं कर रहा. हम अपना घर तक नहीं बनवा सकते, तो मंदिर में दान कैसे दें?”

उत्तर प्रदेश के इन तीनों जिलों के गांवों में लोगों से हुई बातचीत से पता चला कि दान चोरी से जुड़े रील और वीडियो उनके सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहे हैं.

मंदिर में जो हुआ, उससे लोग नाराज हैं. लेकिन इस मुद्दे ने अभी तक राजनीतिक रंग नहीं लिया है, जबकि विपक्षी दल, खासकर समाजवादी पार्टी, इस मामले को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर लगातार हमला कर रहे हैं.

जून की शुरुआत में दान चोरी के आरोप सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था.

SIT ने अभी तक अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंपी है. इस बीच मंदिर में दान गिनने की प्रक्रिया से जुड़े ट्रस्ट के आठ कर्मचारियों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है.

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है. हालांकि पुलिस की किसी भी एफआईआर में उनके नाम नहीं हैं. दिप्रिंट से बात करने वाले लोगों का मानना है कि यह बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश है.

सीतापुर के अंबरपुर गांव की एक चाय की दुकान पर जब गुरुवार दोपहर दिप्रिंट पहुंचा, तब लोग दान चोरी के मामले पर चर्चा कर रहे थे. अयोध्या नियमित रूप से जाने वाले योगेंद्र प्रताप सिंह और दुर्गेश सिंह ने कहा कि उन्हें इस घटना से व्यक्तिगत तौर पर ठगा हुआ महसूस हुआ.

Yogendra Pratap and Durgesh Singh of Ambrapur village of Sitapur. 'Har Hindu ko dukh hua hai', says Yogendra on donation 'theft''. Prashant Srivastava/ThePrint
सीतापुर के अंबरापुर गांव के योगेन्द्र प्रताप और दुर्गेश सिंह। दान की ‘चोरी’ पर बोले योगेन्द्र, ‘हर हिंदू को दुख हुआ है’ प्रशांत श्रीवास्तव/दिप्रिंट

योगेंद्र प्रताप ने कहा, “हमने भी मंदिर निर्माण के समय दान दिया था. हर हिंदू को दुख हुआ है.”

उन्होंने आगे कहा, “अभी सिर्फ छोटी मछलियां पकड़ी गई हैं. बड़ी मछलियों को अभी तक छुआ भी नहीं गया.”

जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका असर अगले साल उनके वोट पर पड़ेगा, तो उन्होंने कहा, “हम ठाकुर हैं. समझ जाइए.”

हम मोदी जी या योगी जी से क्यों नाराज होंगे? हम तो उन लोगों से नाराज हैं जिन्होंने हमारा दान चुराया.

सीमा कुमारी, हैदरगढ़ ब्लॉक, बाराबंकी

दुर्गेश सिंह ने कहा कि अब उनका मंदिर में दान देने का मन नहीं करता.

उन्होंने कहा, “कोविड देखा, किसान आंदोलन देखा. इतने बड़े-बड़े मुद्दे आए. मुझे नहीं लगता कि सिर्फ इस मुद्दे से बीजेपी को बड़ा नुकसान होगा.” उन्होंने कहा कि बीजेपी कोविड महामारी और किसान आंदोलन जैसे बड़े संकटों का भी सामना कर चुकी है.

बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ ब्लॉक में सीमा कुमारी ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद वह अपने 50 से ज्यादा पड़ोसियों के साथ अयोध्या गई थीं.

उन्होंने कहा, “हम मोदी जी या योगी जी से क्यों नाराज होंगे? हम तो उन लोगों से नाराज हैं जिन्होंने हमारा दान चुराया.”

वहीं 45 वर्षीय कारोबारी रितेश गुप्ता ने कहा कि उन्हें भी दान चोरी से दुख हुआ है, लेकिन चुनाव सिर्फ इसी मुद्दे पर नहीं लड़ा जाएगा.

उन्होंने कहा, “UGC (इक्विटी रेगुलेशन) 2027 के चुनाव का मुद्दा बन सकता है, लेकिन राम मंदिर के दान का मामला नहीं. लोगों को विपक्ष की राजनीति से भी दिक्कत है.”

हालांकि समाजवादी पार्टी का मानना है कि “दान चोरी” का मुद्दा इतनी आसानी से खत्म नहीं होगा और आगे चलकर इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया जा सकता है.

अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडे ने दिप्रिंट से कहा, “हम इस मुद्दे को हर घर तक ले जाएंगे. अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इसका चुनाव पर असर नहीं पड़ेगा. असर जरूर पड़ेगा. कुछ महीने इंतजार कीजिए. हमारे पास योजना है कि यह मुद्दा हर घर तक पहुंचे.”

उत्तर प्रदेश की राजनीतिक विश्लेषक शिल्प शिखा सिंह का कहना है कि राम मंदिर दान विवाद चुनावी मुद्दा तभी बन सकता है, जब विपक्ष 2027 के विधानसभा चुनाव तक लोगों का ध्यान इस मुद्दे पर बनाए रख सके.

उन्होंने कहा कि इसके लिए गांव-गांव जाकर लगातार संगठनात्मक काम करना होगा.

उन्होंने कहा, “यह मुद्दा भावनात्मक रूप से लोगों से जुड़ा है, क्योंकि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सवाल है. लेकिन अगर इसे चुनावी असर में बदलना है, तो विपक्ष को आने वाले महीनों तक इस मुद्दे को लगातार जिंदा रखना होगा. इसके लिए उन्हें अभी से गांव स्तर पर काम शुरू करना होगा.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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