नई दिल्ली: नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) ने मध्य प्रदेश के चार बी.एड. कॉलेजों में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए एक स्वतंत्र तथ्य जांच और सत्यापन समिति बनाई है. इन गड़बड़ियों में कॉलेजों का अपने घोषित पते पर नहीं चलने और जरूरी बुनियादी सुविधाओं की कमी शामिल है.
15 जुलाई के आदेश में, देश में शिक्षक शिक्षा को नियंत्रित करने वाली वैधानिक संस्था एनसीटीई ने कहा कि पांच सदस्यीय समिति, जिसकी अध्यक्षता साउथ बिहार के केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एच.सी.एस. राठौर कर रहे हैं, को पांच कार्य दिवस के भीतर दस्तावेजी और वीडियो सबूतों के साथ एक विस्तृत तथ्य जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है.
यह समिति मीडिया में आई उन खबरों के बाद बनाई गई, जिनमें बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय से जुड़े तीन बी.एड. कॉलेजों में गंभीर गड़बड़ियों का दावा किया गया था. शुरुआती जांच में पता चला कि एक और बी.एड. कॉलेज भी उसी परिसर से चल रहा है. इसके बाद समिति ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाकर चौथे कॉलेज को भी शामिल कर लिया.
समिति के सदस्यों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की संयुक्त सचिव असीमा मंगला, शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के निदेशक भगवती प्रसाद कलाल, शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के निदेशक जे.पी. सिंह, मध्य प्रदेश सरकार के एक नामित प्रतिनिधि और एनसीटीई की पश्चिमी क्षेत्रीय समिति के क्षेत्रीय निदेशक विंग कमांडर विजय राणा शामिल हैं.
एनसीटीई अधिकारियों के अनुसार, समिति का गठन 15 जुलाई को किया गया था और वह जांच शुरू करने के लिए 17 जुलाई को मध्य प्रदेश पहुंच गई.
एनसीटीई ने एक बयान में कहा, “समिति ने सभी कॉलेजों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया है. शुरुआती जांच के दौरान पता चला कि पहले जिन तीन कॉलेजों की जानकारी मिली थी, उनके अलावा एक और कॉलेज भी उसी परिसर से चल रहा था. इसलिए अब चार कॉलेजों की जांच की जा रही है.”
अधिसूचना के अनुसार, समिति को शिक्षक शिक्षा संस्थानों का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करना है. इसके लिए जियोटैग्ड वीडियो और फोटो रिकॉर्ड भी तैयार किए जाएंगे. समिति मीडिया में सामने आए आरोपों की जांच करेगी और संस्थानों द्वारा जमा किए गए रिकॉर्ड, जैसे मान्यता से जुड़े दस्तावेज और परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (पीएआर), की तुलना मौके पर मिली जानकारी से करेगी.
समिति एनसीटीई अधिनियम 1993, एनसीटीई नियमों और तय मानकों का पालन भी जांचेगी. इसमें बुनियादी ढांचा, पढ़ाई की सुविधाएं, प्रयोगशालाएं, जमीन की उपलब्धता, शिक्षकों की संख्या और मान्यता से जुड़ी अन्य शर्तें शामिल हैं.
समिति को पांच कार्य दिवस के भीतर अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है. आदेश में कहा गया है कि यह सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी किया गया है.
एनसीटीई ने कहा, “विभाग ने इसे एक गंभीर लापरवाही माना है. इसलिए पूरी तरह से 360 डिग्री व्यापक समीक्षा करने के बाद, जरूरत के अनुसार नियम तोड़ने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.”
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