नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने कहा कि शनिवार सुबह 7.44 बजे सोनम वांगचुक को CJP के जंतर-मंतर के पास चल रहे प्रदर्शन स्थल से “शिफ्ट” किया गया. उस समय वह पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे.
दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्रवाई को सही ठहराते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह का हवाला दिया.
पुलिस ने X पर लिखा, “माननीय हाई कोर्ट के आदेश और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के अनुसार, श्री सोनम वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें जरूरी इलाज के लिए अस्पताल शिफ्ट किया गया है.”
दिल्ली हाई कोर्ट का यह आदेश 16 जुलाई को उस जनहित याचिका (PIL) पर आया था, जिसमें अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई थी.
वकील आर.के. सैनी की ओर से दाखिल PIL का निपटारा करते हुए अदालत ने निर्देश दिया था कि वांगचुक की सेहत की रोज निगरानी की जाए और डॉक्टरों की राय के आधार पर जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज दिया जाए.
यह निर्देश तब दिया गया, जब केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वांगचुक की मेडिकल जांच रोज होगी और प्रशासन उन्हें हर जरूरी चिकित्सा सुविधा देगा.
दो पन्नों के अपने आदेश में बेंच ने कहा, “सीखे हुए सॉलिसिटर जनरल की ओर से दिए गए आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए हम केवल इतना कहते हैं कि हर नागरिक का जीवन बहुमूल्य है और सरकार की ओर से उसे बचाने के लिए हर संभव चिकित्सा प्रयास किया जाना चाहिए. हम सॉलिसिटर जनरल के रुख की सराहना करते हैं और निर्देश देते हैं कि श्री सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति की क्लीनिकल और अन्य तरीकों से रोज नियमित निगरानी की जाए. डॉक्टरों की राय के आधार पर उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए जो भी मेडिकल हस्तक्षेप जरूरी हो, वह किया जाए.”
मेहता, जो वर्चुअली अदालत में पेश हुए थे, उन्होंने यह भी कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि सरकारी डॉक्टर रोज वांगचुक की जांच करें और नियमित मेडिकल रिपोर्ट तैयार करें.
सरकारी डॉक्टरों को वांगचुक की नियमित जांच करने का निर्देश देते हुए बेंच ने अपने आदेश में मेहता के रुख की भी सराहना की.
हालांकि हाई कोर्ट ने पुलिस या प्रशासन को वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाने का कोई खास निर्देश नहीं दिया था. अदालत के आदेश का मकसद सिर्फ यह सुनिश्चित करना था कि उनकी सेहत की रोज निगरानी हो और डॉक्टर जरूरत के मुताबिक इलाज दें.
इन निर्देशों से अधिकारियों को डॉक्टरों की राय के आधार पर उनकी जान बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार मिलता है.
CJI को पत्र याचिका
वकील नरेंद्र मिश्रा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक पत्र याचिका भेजी है, जिसकी कॉपी ThePrint के पास है. इसमें “नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे श्री सोनम वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारियों के जीवन, स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए तत्काल निर्देश” देने की मांग की गई है.
चार पन्नों की इस चिट्ठी को रिट याचिका मानने का अनुरोध किया गया है. मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत सोनम वांगचुक और अन्य शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए उचित निर्देश जारी करे. उन्होंने दिल्ली पुलिस और अन्य अधिकारियों को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन और भूख हड़ताल जारी रखने की अनुमति देने का भी निर्देश देने की मांग की है.
याचिका में यह भी मांग की गई है कि प्रदर्शन स्थल पर पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. इसमें दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक योग्य डॉक्टर, आपातकालीन चिकित्सा उपकरण, दवाइयां और सोनम वांगचुक व अन्य भूख हड़ताल कर रहे लोगों की समय-समय पर मेडिकल जांच शामिल हो.
याचिका में यह भी मांग की गई है कि दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में दखल न दें और कानून के मुताबिक जरूरी स्थिति को छोड़कर अनावश्यक या जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल न करें.
याचिका में कहा गया है, “अगर यह पाया जाता है कि श्री सोनम वांगचुक को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है, तो कानून के मुताबिक उनकी रिहाई के लिए उचित निर्देश दिए जाएं. साथ ही पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे तुरंत श्री सोनम वांगचुक को तय किए गए प्रदर्शन स्थल पर वापस पहुंचाएं, ताकि उनके नेतृत्व में कानून के मुताबिक शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रह सके.”
दिल्ली पुलिस ने कहा, “माननीय अदालत के आदेश का पालन करते समय जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई में रुकावट डालने की कोशिश की, जिससे थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी हुई. हालांकि पुलिस ने पूरा संयम बरता और वांगचुक को सुरक्षित तरीके से शिफ्ट किया.”
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने सफदरजंग अस्पताल से X पर पोस्ट किया, जहां उन्हें भर्ती कराया गया है. उन्होंने लिखा, “मेरी, उनके परिवार और पिछले 20 दिनों से उनकी सेहत पर नजर रखने वाले डॉक्टरों की सहमति के बिना उन्हें मुंह से या नस के जरिए कुछ भी न दिया जाए.”
59 वर्षीय सोनम वांगचुक, जो NEET पेपर लीक के मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं, 18 जुलाई को अपने अनशन के 21वें दिन में पहुंच गए.
इस हफ्ते की शुरुआत में उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया था, जिसमें लोगों से 20 जुलाई, सोमवार को संसद मार्च में शामिल होने की अपील की थी. उसी दिन संसद का मानसून सत्र भी शुरू हो रहा है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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