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Monday, 19 October, 2026
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‘जो राम मंदिर में चोरी नहीं रोक सके, पेपर लीक कैसे रोकेंगे?’ मोदी सरकार पर अखिलेश का हमला

लोकसभा में सपा सांसद ने अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान चोरी का ज़िक्र करते हुए बीजेपी पर निशाना साधा. कहा, जो वहां चोरी नहीं रोक सके, वे पेपर लीक कैसे रोकेंगे.

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नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अखिलेश यादव ने मंगलवार को छात्र आंदोलन को लेकर मोदी सरकार के रवैये पर तीखा हमला बोला और पिछले हफ्ते दिल्ली में हुई घटनाओं की तुलना आपातकाल (इमरजेंसी) से की.

लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान अखिलेश ने कहा, “मैंने इमरजेंसी नहीं देखी, लेकिन उस दौर की झलक हमने देश की राजधानी में ज़रूर देखी.”

20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान संसद के पास हजारों छात्र प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने पर उसकी काफी आलोचना हुई थी.

अखिलेश ने कहा, “मुद्दा कानून का नहीं है, आपकी नीयत का है. जिस दिन आपकी नीयत साफ हो जाएगी, परीक्षा व्यवस्था भी साफ हो जाएगी.”

उनका यह बयान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के सवाल के जवाब में आया. रिजिजू ने विपक्ष से पूछा था, “क्या बेहतर है—सरकार छात्र आंदोलन की बात सुनकर संसद में कानून लाए या फिर आंदोलन दबाने के लिए पूरे देश में इमरजेंसी लगा दे?”

पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन करने वाले इस विधेयक पर मानसून सत्र में छह दिन तक चले गतिरोध के बाद चर्चा शुरू हुई.

अखिलेश यादव ने अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान चोरी को लेकर भी बीजेपी पर तंज कसा. उन्होंने कहा, “जो लोग राम मंदिर में चोरी नहीं रोक सके, वे पेपर लीक कैसे रोकेंगे?”

उन्होंने सरकार को कथित दान चोरी से जोड़ते हुए कहा कि इस मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रही है. यादव ने कहा, “जिन लोगों ने राम मंदिर में दान की चोरी होने दी, वही लोग पेपर भी लीक होने दे रहे हैं. यहां तक कि ‘गुप्त दान’ भी गायब हो गया. यह महापाप है.”

अखिलेश ने कहा कि सरकार अपने वादे पर कायम नहीं रहती. “बीजेपी सरकार भरोसा नहीं देती, सिर्फ जुमले देती है.”

उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में छात्रों के साथ उनके माता-पिता और परिवार के लोग भी जुड़े. उनके मुताबिक करीब 20 लाख अभ्यर्थी और उनके परिवार प्रभावित हुए, यानी लगभग एक करोड़ लोग सरकार के खिलाफ हो गए.

कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने किसान आंदोलन का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक देखकर सरकार ने “तीन काले कानून” वापस लिए थे और जब सरकार को झुकाया जाता है, तब वह झुकती है.

उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री पद से हटाया गया ताकि प्रधानमंत्री को बचाया जा सके.

अखिलेश ने बीजेपी शासन के दौरान उत्तर प्रदेश में हुए कथित पेपर लीक के मामलों का भी जिक्र किया. उन्होंने सब-इंस्पेक्टर, जूनियर इंजीनियर, लेखपाल, कांस्टेबल भर्ती, तीन बार यूपी-टीईटी और हाईस्कूल-इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं के पेपर लीक का उल्लेख किया.

उन्होंने कहा, “पेपर लीक उस राज्य तक पहुंच गया, जहां से प्रधानमंत्री चुनाव जीतकर आते हैं.” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जेईई (मेन्स) और नीट-यूजी जैसी बड़ी परीक्षाएं कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) में कर्मचारियों की भर्ती आउटसोर्सिंग के जरिए क्यों की गई.

इस दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक का समर्थन करती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए मोदी सरकार के तरीके से सहमत है.

उन्होंने पूछा, “अगर 2024 में आपने सुरक्षित परीक्षा का वादा किया था, तो फिर 2026 में दोबारा आपातकालीन संशोधन लाने की ज़रूरत क्यों पड़ी?”

उन्होंने कहा, “हम इस बिल का समर्थन करते हैं, लेकिन इसे सरकार की बेगुनाही का प्रमाणपत्र नहीं मानते. यह बिल समाधान नहीं, बल्कि सरकार की नाकामी स्वीकार करने जैसा है.”

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि सरकार का एक तय तरीका है. “जब शासन विफल होता है, तो कानून बदल दिया जाता है. जब प्रशासन विफल होता है, तो सजा बढ़ा दी जाती है. जब संस्थाएं विफल होती हैं, तो एक नई समिति बना दी जाती है.”

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जून में पार्टी की हार के बाद पहली बार संसद में बोलते हुए अभिषेक बनर्जी ने पिछले 12 वर्षों के कई परीक्षा घोटालों का जिक्र किया. उन्होंने CBSE, AIPMT, NEET-UG 2024 और UGC-NET समेत कई मामलों का उल्लेख किया.

उन्होंने दावा किया कि CBI की कम से कम 17 जांच और ED की 11 कार्रवाई के बावजूद किसी को सजा नहीं मिली. उन्होंने कहा कि सरकार ने संसद में बताया था कि उसके पास पेपर लीक का कोई डेटा नहीं है. उन्होंने कहा, “सरकार को यह पता है कि उसने कितने शौचालय बनाए हैं, लेकिन यह नहीं पता कि कितने परीक्षा पेपर लीक हुए.”

उन्होंने कहा कि NEET-UG की दोबारा परीक्षा के प्रश्नपत्र ले जाने के लिए सैन्य लॉजिस्टिक्स और विमान का इस्तेमाल किया गया.

बनर्जी ने कहा, “भारत के युवाओं ने हेलीकॉप्टर नहीं, ईमानदारी मांगी थी.”

उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को जवाब में बैरिकेड, लाठीचार्ज, पेलेट गन और आंसू गैस मिली.

उन्होंने NEET पेपर लीक मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहली सुनवाई का जिक्र करते हुए कहा कि CBI की ओर से जमानत का विरोध करने के लिए सुबह 10:45 बजे तक कोई वकील मौजूद नहीं था, इसलिए सुनवाई टल गई.

उन्होंने कहा, “टीवी पर फास्ट ट्रैक न्याय का वादा किया जाता है, लेकिन अदालत के अंदर सरकार अपने ही वकील की मौजूदगी तक सुनिश्चित नहीं कर पाती.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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