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Friday, 8 May, 2026
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शुभेंदु अधिकारी बनेंगे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री, कभी ममता के सबसे करीबी थे अब उन्हीं की सत्ता खत्म की

2011 में ममता बनर्जी की जीत के बड़े चेहरे रहे अधिकारी 2020 में TMC छोड़ BJP में आए और अब खुद बंगाल की सत्ता तक पहुंच गए.

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नई दिल्ली: “बंगाल आपको सत्ता से बाहर कर देगा” भारतीय जनता पार्टी नेता शुभेंदु अधिकारी ने पिछले साल नवंबर में पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को चेतावनी देते हुए कहा था. उस समय ज्यादातर लोगों ने इसे सामान्य राजनीतिक बयान माना था.

लेकिन छह महीने बाद वही बात सच साबित होती दिख रही है. शुक्रवार को शुभेंदु अधिकारी को बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया, जिसके बाद वह पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री बन गए हैं. शनिवार को कोलकाता में वह शपथ लेंगे और राज्य में 15 साल पुराने तृणमूल शासन का अंत हो जाएगा.

ममता बनर्जी के सबसे बड़े राजनीतिक विरोधी माने जाने वाले अधिकारी ने अब उनकी सत्ता अपने हाथ में ले ली है.

इस चुनाव में अधिकारी बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे बनकर उभरे. बीजेपी ने 293 सीटों वाली विधानसभा में 207 सीटें जीतीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस सिर्फ 80 सीटों पर सिमट गई.

कभी ममता के करीबी सहयोगी रहे अधिकारी ने इस जीत को और बड़ा बना दिया, क्योंकि उन्होंने दो सीटों से जीत हासिल की और साथ ही ममता बनर्जी को उनके गढ़ भवानीपुर में भी हरा दिया.

यह दूसरी बार है जब अधिकारी ने ममता को हराया है. इससे पहले 2021 विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट पर ममता को सिर्फ 1,956 वोटों से हराया था. हालांकि, बाद में ममता भवानीपुर उपचुनाव जीतकर फिर मुख्यमंत्री बनी थीं.

अब बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री बनने के साथ अधिकारी की राजनीतिक यात्रा पूरी तरह बदल चुकी है और यह सब उन्होंने सिर्फ छह साल में कर दिखाया.

बीजेपी के कई नेताओं का कहना है कि शुभेंदु अधिकारी ने पार्टी में अपनी अलग पहचान बनाई है. अधिकारी 2020 में बीजेपी में शामिल हुए थे. इससे पहले वह टीएमसी में थे, लेकिन ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव के बाद उनके रिश्तों में तनाव आ गया था.

टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि अधिकारी 2007 के नंदीग्राम आंदोलन के बड़े चेहरों में थे. इसी आंदोलन ने बंगाल में 34 साल पुराने वामपंथी शासन को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई थी.

उस समय अधिकारी को ममता बनर्जी का “राइट हैंड” माना जाता था. उन्होंने टीएमसी को ज़मीनी स्तर पर मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी.

2011 के चुनाव तक ममता बनर्जी सत्ता में पहुंच चुकी थीं और उसी दौर में अधिकारी भी पार्टी में बड़े नेता बन गए थे.

एक वरिष्ठ टीएमसी नेता ने कहा, “नंदीग्राम आंदोलन से ही अधिकारी की पहचान बनी और वह ममता के करीब आए. पार्टी में उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां दी गईं.”

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अधिकारी की संगठन पर मजबूत पकड़ है और जमीनी स्तर पर उनका मजबूत नेटवर्क है.

उन्होंने कहा, “टीएमसी में रहते हुए भी वह पार्टी के अहम चेहरों में थे. बीजेपी में आने के बाद उन्होंने हिंदुत्व के मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों को भी मजबूती से उठाया, जिसका फायदा चुनाव में मिला.”

आक्रामक नेता की छवि

बीजेपी के कई नेता अधिकारी को बंगाल में पार्टी का “आक्रामक चेहरा” मानते हैं. उनका कहना है कि अधिकारी खुलकर बोलने वाले नेता हैं और पीछे हटने वालों में नहीं हैं.

कई नेताओं को हावड़ा के बाली इलाके की एक घटना याद है, जब चुनाव प्रचार के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उनकी रैली में बाधा डालने की कोशिश की थी. उस दौरान अधिकारी काफी गुस्से में आ गए थे और सुरक्षा कर्मियों को उन्हें संभालना पड़ा था.

बीजेपी के एक नेता ने कहा, “अधिकारी जानते हैं कि कहां किस तरह राजनीति करनी है. टीएमसी जैसी पार्टी से मुकाबले में आक्रामक रवैया जरूरी होता है.”

बीजेपी के कई नेता मानते हैं कि नंदीग्राम चुनाव अधिकारी के राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा मोड़ था. वहीं से वह बंगाल और बीजेपी दोनों में बड़े नेता बनकर उभरे.

शुभेंदु अधिकारी का जन्म दिसंबर 1970 में पूर्वी मेदिनीपुर जिले के कांथी के एक राजनीतिक परिवार में हुआ था. उनके पिता सिशिर अधिकारी कांग्रेस के बड़े नेता थे और बाद में टीएमसी में शामिल हो गए थे.

अधिकारी ने विद्यासागर यूनिवर्सिटी से राजनीतिक विज्ञान में पढ़ाई की. जब ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी बनाई, तब अधिकारी परिवार भी उनके साथ जुड़ गया.

बीजेपी नेताओं का कहना है कि लोगों से सीधा जुड़ाव अधिकारी की सबसे बड़ी ताकत है.

बीजेपी के एक नेता ने कहा, “2021 में बीजेपी अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद टीएमसी को टक्कर नहीं दे पाई थी, क्योंकि संगठन मजबूत नहीं था. लेकिन अधिकारी लगातार जनता के बीच रहे और स्थानीय मुद्दों को पार्टी के एजेंडे में लाए.”

बीजेपी के लिए यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी को झटका लगा था. पार्टी की सीटें 2019 की 18 सीटों से घटकर 12 रह गई थीं.

वहीं 2021 विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 215 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी सिर्फ 77 सीटों पर सिमट गई थी.

अब शुभेंदु अधिकारी ने बड़ी जीत दर्ज कर ली है. मुख्यमंत्री बनने के बाद वह क्या करते हैं, इस पर सबकी नज़र रहेगी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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