चेन्नई: इंडिया गठबंधन के सबसे मजबूत सहयोगियों में शामिल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) और कांग्रेस के रिश्तों में अब खुली दरार दिखने लगी है. डीएमके ने शुक्रवार को लोकसभा में कांग्रेस से अलग बैठने की आधिकारिक मांग कर दी.
डीएमके संसदीय दल की नेता कनिमोझी करुणानिधि ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर अलग सीटिंग अरेंजमेंट की मांग की. उन्होंने “बदले हुए राजनीतिक हालात” का हवाला देते हुए कहा कि अब डीएमके सांसदों का कांग्रेस सांसदों के साथ बैठना उचित नहीं है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद दोनों दलों के रिश्तों में तेजी से तनाव बढ़ा. इसकी सबसे बड़ी वजह कांग्रेस का अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) को सरकार बनाने के लिए समर्थन देना माना जा रहा है.
2004 से डीएमके और कांग्रेस का गठबंधन काफी मजबूत माना जाता था, लेकिन पिछले 48 घंटों में यह रिश्ता लगभग टूट गया.
कनिमोझी ने अपने पत्र में लिखा, “बदले हुए राजनीतिक हालात और कांग्रेस के साथ हमारा गठबंधन खत्म होने के कारण अब हमारे सांसदों का मौजूदा सीटिंग अरेंजमेंट में उनके साथ बैठना उचित नहीं है.”
उन्होंने स्पीकर से डीएमके संसदीय दल के सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया.
डीएमके ने कहा कि वह लोकसभा में अपनी जिम्मेदारियां बेहतर तरीके से निभाने के लिए अलग सीटिंग चाहती है.
तमिलनाडु चुनाव में डीएमके गठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर पाया, जबकि विजय की टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. इसके बाद कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया, जिससे डीएमके नाराज़ हो गई.
लोकसभा में 22 सांसदों वाली डीएमके विपक्ष की चौथी सबसे बड़ी पार्टी है. ऐसे में उसका कांग्रेस से अलग बैठने का फैसला INDIA गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
इससे पहले गुरुवार को डीएमके विधायक दल की बैठक में कांग्रेस के फैसले की कड़ी आलोचना की गई थी. डीएमके नेताओं ने इसे “अचानक राजनीतिक बदलाव” और “विश्वासघात” बताया.
डीएमके नेताओं ने कहा कि कांग्रेस को राज्यसभा की एक सीट और 28 विधानसभा सीटें डीएमके की “धैर्य और उदारता” की वजह से मिली थीं.