Sunday, 3 July, 2022
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शिवराज ने दिया स्कीमों और ‘मामा’ की छवि में सुधार का आदेश- MLAs करेंगे कन्यादान, सीमाओं पर जाएंगे युवक

पिछले वीकएंड पर हुई एक चिंतन बैठक में मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को मध्य प्रदेश की लाडली लक्ष्मी, कन्यादान और तीर्थ दर्शन जैसी कई कल्याण योजनाओं में बदलाव करने का निर्देश दिया, जिनसे उन्हें ‘मामा’ उपनाम मिला था.

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नई दिल्ली: ‘लाभार्थी राजनीति’ हाल ही में संपन्न हुए प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान एक मूलमंत्र बन गया, जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मतदाताओं को लुभाने के लिए, बड़े आक्रामक ढंग से अपनी फ्लैगशिप केंद्रीय योजनाओं का प्रचार किया. लेकिन मध्य प्रदेश में ये एक लंबे समय से पार्टी का चुनावी मुद्दा रहा है और लंबे समय से मुख्यमंत्री चले आ रहे शिवराज सिंह चौहान को जन कल्याण योजनाओं, खासकर कन्याओं और महिलाओं पर केंद्रित स्कीमों के कारण ‘मामा’ तक की उपाधि मिल गयी.

चौहान की स्कीमों ने 2008 और 2013 में और कुछ हद तक 2018 के विधानसभा चुनावों में भी पार्टी को सफलता दिलाई, जब वो कांग्रेस से सिर्फ पांच सीटें पीछे रही और आखिरकार 2020 में सत्ता में आ गई.

अब ऐसा लगता है कि चौहान मतदाताओं के साथ अपने ‘भावनात्मक जुड़ाव’ का रीसेट बटन दबा रहे हैं और 2023 के प्रदेश चुनावों से पहले इन स्कीमों तथा ‘मामा’ की छवि की नए सिरे से ब्रांडिंग की जा रही है.


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पंचमढ़ी में मंथन

पिछले वीकएंड पंचमढ़ी के मनोहर हिल स्टेशन पर एक दो-दिवसीय चिंतन बैठक में सीएम ने अपने मंत्रियों को राज्य सरकार की कई योजनाओं जैसे लाडली लक्ष्मी (कन्याओं के लाभ के लिए एक वित्तीय स्कीम), सीएम कन्यादान योजना (सामुदायिक विवाह स्कीम जिसे महामारी के कारण बंद कर दिया गया) और तीर्थ दर्शन योजना (मुफ्त तीर्थ यात्री स्कीम) आदि में बदलाव करने का निर्देश दिया.

सीएम ने स्थानीय विधायकों से आग्रह किया है कि वो अपने इलाकों में कन्यादानों में शरीक हों, हर गांव में ‘लाडली लक्ष्मी’ क्लब स्थापित करें, इन क्लबों को स्वयं-सहायता समूहों के साथ जोड़ें और उनकी सदस्यों को राज्य के आयोजनों में आमंत्रित करें.

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उन्होंने इस पर भी जोर दिया कि गौ-पालन को बढ़ावा दिया जाए और लोगों को गोबर समेत उसके उत्पादों की आर्थिक संभावनाओं से अवगत कराया जाए. उन्होंने आगे कहा कि इंदौर में बायो-सीएनजी प्लांट के सफल संचालन के बाद एक ‘गोबरधन’ स्कीम को राज्य के दूसरे शहरों में भी लागू किया जाएगा.

चिंतन बैठक के दौरान एक और महत्वपूर्ण स्कीम जिस पर चर्चा हुई, वो थी ‘मां तुझे प्रणाम’. चौहान सरकार द्वारा 2013 में शुरू की गई लेकिन फिर कोविड-19 के कारण बंद कर दी गई इस स्कीम का लक्ष्य, लड़कों और लड़कियों को देश की सीमाओं पर भेजकर युवाओं के बीच देशभक्ति की भावना जगाना और सीमा सुरक्षा को लेकर जागरूकता पैदा करना था.

चिंतन बैठक के दौरान स्मार्ट क्लासरूम्स के साथ सीएम राइज़ स्कूल स्थापित करने, आम बीमारियों के इलाज के लिए संजीवनी क्लीनिक्स और पशुओं के लिए टेली-मेडिसिन शुरू करने पर भी चर्चा की गई.

मध्य प्रदेश बीजेपी महासचिव भगवान दास ने कहा कि ‘चिंतन बैठक’ का आयोजन ये सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि ‘शासन के परिणाम में ज्यादा तालमेल लाया जाए और योजनाओं की खामियों को दूर किया जाए’.

दास ने दिप्रिंट से कहा, ‘ज्यादा केंद्रित दृष्टिकोण के लिए पार्टी ने लाभार्थियों की मैपिंग का अपना कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें उन लोगों की सूची बनाई जा रही है, जिन्होंने केंद्र और राज्य की योजनाओं से लाभ उठाया है. (पार्टी) संगठन की भूमिका सरकारी प्रयासों को विस्तार देने की है. चुनावों में बेहतर नतीजे हासिल करने के लिए जल्दी शुरुआत करना अच्छा रहेगा’.

एक प्रदेश बीजेपी नेता ने नाम न बताने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा कि शिवराज चौहान सरकार का ‘सबसे बड़ा यूएसपी’ उसका ‘महिला मतदाताओं के साथ जुड़ाव है’.

नेता ने कहा, ‘शिवराज ने ये स्कीमें 2008 में शुरू की थीं. बहुत से राज्यों ने इनका अनुसरण किया है. कुछ राज्यों ने साइकिलें और वज़ीफे देकर कन्याओं को सशक्त किया है लेकिन उनकी ‘लाडली लक्ष्मी’ एक एम्पलीफायर योजना थी, जिसका लक्ष्य कन्याओं को सशक्त बनाना था. उनके साथ जुड़ाव बढ़ाकर उन्हें ऐसे कौशल से लैस करने की जरूरत है, जिससे उन्हें रोज़गार भी मिल सके’.

उन्होंने आगे कहा, ‘हमने अनुभव से सीखा है कि सिर्फ ये सुनिश्चित करना काफी नहीं है कि लोग लाभान्वित हो जाएं. इसकी खुशी मनाना और दूसरों तक पहुंचने के काम में लाभार्थियों को शरीक करना भी जरूरी होता है. इसलिए अब हमारा फोकस दोनों पर है, जिससे कि वो लोगों के दिमाग में लंबे समय तक बना रहे’.


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देशभक्ति, तीर्थ यात्राएं, ‘मामा’ की छवि में सुधार

चिंतन बैठक के दौरान मंत्री परिषद ने इस पर भी विचार विमर्श किया कि पुरानी स्कीमों में संशोधन करके उन्हें फिर से ब्रांड किया जाए और मतदाताओं के साथ जुड़ने के लिए अप्रैल में और कार्यक्रम शुरू किए जाएं.

गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने गोबरधन स्कीम पर एक प्रेज़ेंटेशन दिया. पार्टी सूत्रों के अनुसार, सीएम चौहान ने इंदौर मॉडल की तरह गाय पालने और गौमूत्र तथा गोबर के व्यवसायिक इस्तेमाल पर ज्यादा बल देने का सुझाव दिया. पिछले महीने, पीएम मोदी ने इंदौर में एक बायो-सीएनजी संयंत्र का उद्घाटन किया था.

गौ-पालन को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार के गाय का गोबर खरीदने पर भी बैठक में चर्चा की गई.

‘मां तुझे प्रणाम’ स्कीम के तहत तय किया गया कि देश भक्ति की प्रेरणा लेने के लिए युवा अपने गांवों की मिट्टी लेकर, सीमावर्त्ती इलाकों की यात्रा करेंगे.

लोकप्रिय लाडली लक्ष्मी और कन्यादान योजनाओं को भी नए रूप में पेश किया जाएगा. चौहान ने कहा कि हर गांव में एक ‘लाडली लक्ष्मी’ क्लब होना चाहिए, जिसे ऐसे स्वयं-सहायता समूहों से जोड़ा जाना चाहिए, जो नर्सिंग तथा दूसरे कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण कोर्स चलाते हैं. मई में, ‘लाडली लक्ष्मी’ स्कीम का जश्न मनाने के लिए एक राज्यव्यापी समारोह आयोजित किया जाएगा, राज्य सरकार हर अविवाहित कन्या को 21 वर्ष की हो जाने पर 1.8 लाख रुपए उपलब्ध कराएगी.

लाडली लक्ष्मी स्कीम का दूसरा चरण- जिसमें क्लब स्थापित किए जाएंगे, कौशल विकास किया जाएगा और लाभार्थियों को राज्य के आयोजनों में आमंत्रित किया जाएगा- 2 मई से शुरू होगा जिसे राज्य में ‘लाडली लक्ष्मी दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा. सीएम के अनुसार इस स्कीम के करीब 43 लाख लाभार्थी हैं.

चौहान ने ये भी ऐलान किया कि ‘तीर्थ दर्शन स्कीम’ जो कोविड-19 के चलते तीन साल के लिए रुकी हुई थी, 18 अप्रैल को फिर से शुरू की जाएगी, जब पूरा मंत्रिमंडल उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर की यात्र पर जाएगा.

गृह मंत्री मिश्रा ने बताया, ‘18 अप्रैल को चार ट्रेनें काशी विश्वनाथ जाएंगी. एक में मुख्यमंत्री अपनी मंत्रिपरिषद के साथ यात्रा करेंगे. पूरा मंत्रिमंडल पवित्र गंगा में स्नान करेगा. वो कबीर चौरा भी जाएंगे. दूसरी ट्रेन में वो लोग सफर करेंगे, जिन्होंने स्कीम के अंतर्गत पंजीकरण कराया है’.

इसी तरह कन्या विवाह योजना, जो इसी तरह कोविड के चलते रुक गई थी, 21 अप्रैल को फिर से शुरू की जाएगी. लाभार्थियों के दी जाने वाली राशि मौजूदा 51,000 रुपए से बढ़ाकर, 55,000 हज़ार रुपए कर दी जाएगी.


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सीएम-राइज़ स्कूल्स और संजीवनी क्लीनिक्स

चिंतन बैठक के दौरान ‘सीएम-राइज़ स्कूल’ स्कीम पर भी चर्चा की गई. इस स्कीम के अंतर्गत, जो 2020 में घोषित की गई थी, राज्य सरकार ऐसे विशिष्ट स्कूल स्थापित करेगी, जो केंद्र सरकार के अपने समकक्षों के समान स्तर के होंगे और मौजूदा सरकारी स्कूलों में भी सुधार लाया जाएगा.

ये भी ऐलान किया गया कि प्रत्येक सीएम-राइज़ स्कूल बिल्डिंग के निर्माण पर 24 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे, जो एक लाइब्रेरी, लैब, स्मार्ट क्लास और खेल के मैदान से सुसज्जित होंगे. 13 जून से उनमें पढ़ाई शुरू हो जाएगी. शुरुआत में ऐसे 350 स्कूल बनाने की योजना है.

एक मंत्री ने, जो बैठक में शामिल थे, नाम छिपाने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया: ‘मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक्स 22 अप्रैल से उन शहरों में शुरू किए जाएंगे, जिनकी आबादी 25,000 तक है. यहां पर आम बीमारियों के इलाज की सुविधा रहेगी. एक साल के भीतर ये क्लीनिक राज्य की सभी शहरी इकाइयों में शुरू कर दिए जाएंगे. कोविड की वजह से ये स्कीम रुक गई थी लेकिन अब इसे शुरू किया जाए’.

बीजेपी नेता ने आगे कहा कि हालांकि आम आदमी पार्टी (आप) उनके राज्य में कोई चुनौती नहीं है लेकिन संजीवनी क्लीनिक्स और सीएम-राइज़ स्कूलों के विचार का, दिल्ली में आप से कोई वास्ता नहीं है. उन्होंने आगे कहा, ‘ये मूल रूप से (एमपी) सरकार का विचार था, जिसे कोविड की वजह से 2020 में शुरू नहीं किया जा सका था’.

पशुओं के इलाज के लिए वेटरिनरी टेलीमेडिसिन के बंदोबस्त और फसलों की बीमारियों के लिए फोन परामर्श सुविधाओं की भी शुरुआत की जाएगी और 1 जून से राज्य में एक साइबर तहसील प्रणाली स्थापित की जाएगी.

14 अप्रैल को बाबा साहेब आंबेडकर की जयंती के मौके पर एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. ‘कबीर महाकुंभ’ और ‘वाल्मीकि महाकुंभ’ का भी आयोजन किया जाएगा.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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