नई दिल्ली: जहां एक ओर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पश्चिम एशिया में शांति के लिए चार-सूत्रीय योजना पेश की, वहीं चीन ने अमेरिका को चेतावनी दी कि वह उन “मनगढ़ंत रिपोर्टों” के आधार पर टैरिफ न लगाए, जिनमें दावा किया गया है कि बीजिंग ईरान को हथियार सप्लाई कर रहा है.
चीन की यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के उस बयान के ठीक एक दिन बाद आई, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि अगर यह साबित हो जाता है कि चीन ईरान को हथियार दे रहा है, तो वह 50 प्रतिशत टैरिफ लगा देंगे.
ट्रंप की यह टिप्पणी न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के जवाब में आई थी, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास ऐसी जानकारी है कि चीन ने हाल के हफ्तों में “अमेरिका और इज़राइल के साथ अपने संघर्ष के लिए ईरान को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलों की एक खेप भेजी हो सकती है.”
इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मंगलवार को इन रिपोर्टों को “पूरी तरह से मनगढ़ंत” बताया.
उन्होंने अपनी साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “चीन सैन्य उत्पादों के निर्यात के मामले में हमेशा सावधानी और जिम्मेदारी से काम करता है, और चीन के कानूनों, नियमों तथा उचित अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुसार सख्त नियंत्रण रखता है. ईरान को सैन्य सहायता देने का आरोप लगाने वाली मीडिया रिपोर्टें पूरी तरह से मनगढ़ंत हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “अगर अमेरिका इन आरोपों के आधार पर चीन पर टैरिफ बढ़ाने की कार्रवाई करता है, तो चीन भी जवाबी कदम उठाएगा.”
उनका यह बयान उसी दिन आया, जिस दिन शी चिनफिंग ने अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की और पश्चिम एशिया में शांति के लिए चार-सूत्रीय प्रस्ताव की रूपरेखा पेश की. इस प्रस्ताव का मुख्य ज़ोर खाड़ी क्षेत्र और व्यापक क्षेत्र के लिए एक “साझा, व्यापक, सहयोगात्मक और टिकाऊ” सुरक्षा ढांचे पर था.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने रविवार को रिपोर्ट दी थी कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास ऐसी जानकारी है कि चीन ने हाल के हफ्तों में “अमेरिका और इज़राइल के साथ अपने संघर्ष के लिए ईरान को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलों की एक खेप भेजी हो सकती है.”
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह खुफिया जानकारी “पूरी तरह से पुख्ता नहीं है” कि मिसाइलों की कोई खेप भेजी गई है, और इस बात का भी “कोई सबूत नहीं है” कि अब तक अमेरिकी या इज़राइली सेनाओं के खिलाफ चीनी मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया हो. हालांकि, ईरान को मिसाइलें भेजने के मुद्दे पर बीजिंग में चल रही बहस से “इस बात का अंदाज़ा लगता है कि चीन इस संघर्ष में खुद को किस हद तक एक हितधारक के रूप में देखता है.”
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के संभावित समर्थन से जुड़ी अमेरिकी खुफिया जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि रूस ने ईरान को उपग्रह से जुड़ी खुफिया जानकारी मुहैया कराई है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इससे ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को अमेरिकी जहाजों के साथ-साथ पश्चिम एशिया भर में सैन्य और राजनयिक ठिकानों को निशाना बनाने में मदद मिली है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस तरह का समर्थन दिखाता है कि कैसे अमेरिका के विरोधी वाशिंगटन के लिए “लागत बढ़ाने” और संभावित रूप से अमेरिकी सेना को युद्ध में उलझाने की कोशिश कर रहे हैं.
इस रिपोर्ट के बाद, सोमवार को ट्रंप ने चीन पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी. ऐसी खबरें थीं कि चीन ईरान को कंधे से दागी जाने वाली एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलें “भेज” रहा है. फॉक्स न्यूज़ पर ‘संडे मॉर्निंग फ्यूचर्स’ में मारिया बार्टिरोमो से बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि उन्हें “संदेह है कि चीन इस तरह की हरकतें जारी रखेगा.”
उन्होंने कहा था, “अगर हमें पता चलता है कि चीन ऐसा कर रहा है—क्योंकि मैं खबरें सुनता हूं, हालाँकि मेरे लिए खबरों का ज़्यादा मतलब नहीं होता क्योंकि वे अक्सर झूठी होती हैं—लेकिन मैं खबरें सुन रहा हूँ कि चीन कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलें, जिन्हें ‘शोल्डर मिसाइल’ या एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल कहा जाता है, दे रहा है.”
पिछले हफ़्ते, किसी खास देश का नाम लिए बिना, ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर कोई देश ईरान को हथियार सप्लाई करता हुआ पाया गया, तो उस देश से होने वाले आयात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा. यह चेतावनी उन्होंने तेहरान के साथ दो हफ़्ते के संघर्ष-विराम पर सहमत होने के कुछ ही घंटों बाद दी थी.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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