scorecardresearch
Wednesday, 23 September, 2026
होमराजनीतियोगी सरकार की कानून-व्यवस्था का नैरेटिव: 2027 चुनाव के लिए RSS ने BJP के साथ तेज किया ग्राउंडवर्क

योगी सरकार की कानून-व्यवस्था का नैरेटिव: 2027 चुनाव के लिए RSS ने BJP के साथ तेज किया ग्राउंडवर्क

बीजेपी और आरएसएस ज़मीनी स्तर पर तालमेल बिठाकर योगी आदित्यनाथ सरकार के विकास और कानून-व्यवस्था के कामकाज का ब्यौरा मतदाताओं तक पहुंचा रहे हैं और विपक्ष के नैरेटिव का जवाब दे रहे हैं.

Text Size:

लखनऊ: 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने उत्तर प्रदेश में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं. संघ सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि योगी आदित्यनाथ सरकार के विकास और कानून-व्यवस्था के रिकॉर्ड को मतदाताओं तक पहुंचाया जा सके.

16 सितंबर को लखनऊ के एक रिसॉर्ट में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं और RSS के पदाधिकारियों के बीच हुई समन्वय बैठक में संगठन और उसके कार्यकर्ताओं को चुनाव के लिए तैयार करने पर चर्चा हुई. सरकार, पार्टी और संघ के कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया.

हालांकि बीजेपी ने अभी तक अपनी चुनावी रणनीति का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन सूत्रों ने बताया कि RSS चाहता है कि पार्टी 2027 का चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना चेहरा बनाकर लड़े. इसी रणनीति के तहत समन्वय बैठक में सरकार के काम, खासकर उसके “मजबूत कानून-व्यवस्था के संदेश” और विकास योजनाओं को राज्य के गांवों और अलग-अलग समुदायों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया.

उत्तर प्रदेश में RSS के पदाधिकारियों के मुताबिक, संगठन इस बार 2024 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले ज्यादा सक्रिय नजर आ रहा है.

पिछले दो साल में सरकारी अधिकारियों और RSS के बीच तालमेल भी बढ़ा है. वहीं, संघ के पदाधिकारी बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ फीडबैक बैठकें भी कर रहे हैं.

हाल की लखनऊ बैठक में अलग-अलग क्षेत्रों के वरिष्ठ RSS पदाधिकारियों ने भी हिस्सा लिया. इनमें बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष, RSS के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार, बीजेपी के यूपी प्रभारी विनोद तावड़े, RSS के पूर्वी क्षेत्र के प्रचारक अनिल कुमार, अवध प्रांत के प्रचारक कौशल किशोर, कानपुर प्रांत के प्रचारक श्री राम, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महासचिव (संगठन) धर्मपाल सिंह के अलावा कई सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी शामिल थे.

बैठक तीन चरणों में हुई. पहले एक संयुक्त बैठक हुई, जिसमें प्रतिभागियों से चुनाव की तैयारियों को लेकर फीडबैक देने को कहा गया. इसके बाद कानपुर और अवध क्षेत्रों के साथ अलग-अलग बैठकें हुईं.

प्रतिभागियों से फीडबैक लेने के बाद संतोष, अरुण कुमार और तावड़े ने चुनाव की व्यापक रणनीति के बारे में बताया. दिप्रिंट को पता चला है कि उन्होंने बैठक में शामिल लोगों से कहा कि विपक्ष सरकार के खिलाफ एक नैरेटिव बनाने की कोशिश करेगा, लेकिन चुनौती यह है कि बीजेपी और संघ के कार्यकर्ता खुद भी ऐसे नैरेटिव से प्रभावित हो सकते हैं.

एक सूत्र ने नेताओं के हवाले से कहा, “विपक्ष भ्रम पैदा करने की कोशिश करेगा. उसके पास कोई बड़ा मुद्दा नहीं है, लेकिन समस्या यह है कि हमारे अपने लोग भी उस नैरेटिव में फंस रहे हैं. हमारे परिवारों के युवा भी भ्रमित हो रहे हैं. सबसे पहले हमें खुद स्थिति को समझना होगा और फिर अपने लोगों को इसे साफ तौर पर समझाना होगा.”

बैठक में UGC विवाद और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई. प्रतिभागियों से कहा गया कि सरकार इन मुद्दों पर कार्रवाई कर रही है और पेपर लीक के खिलाफ बनाए गए सख्त कानून की जानकारी पार्टी और संघ के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम लोगों तक भी पहुंचाई जानी चाहिए.

सूत्रों के मुताबिक, संदेश यह था कि बीजेपी और RSS को चुनाव से पहले विपक्ष के नैरेटिव को राजनीतिक चर्चा पर हावी नहीं होने देना है.

नेतृत्व ने पदाधिकारियों से यह भी कहा कि वे केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से किए गए कल्याणकारी और विकास कार्यों को सामने रखते हुए अपना खुद का नैरेटिव तैयार करें और लोगों तक पहुंचाएं.

चल रहे एक महीने के “सेवा संकल्प अभियान” को लोगों से संपर्क बढ़ाने और ज्यादा कार्यकर्ताओं और आम लोगों को अभियान से जोड़ने के मौके के तौर पर भी देखा गया.

एक पदाधिकारी ने कहा, “हमें अपना खुद का नैरेटिव तय करना है और केंद्र और राज्य सरकारों के काम को लेकर लोगों के बीच जाना है. सरकार इस समय जो भी काम कर रही है, उसकी जानकारी भी जनता तक पहुंचानी चाहिए.” उन्होंने कहा, “आम लोगों के साथ बातचीत में अब हम सरकार के काम और कानून-व्यवस्था के बारे में ज्यादा बात करेंगे.”

समन्वय बैठक में जमीनी स्तर पर सरकार, बीजेपी और RSS के बीच तालमेल बेहतर करने पर भी ध्यान दिया गया. इसका मकसद था कि कार्यकर्ताओं की ओर से उठाई गई शिकायतों और चिंताओं का जल्दी समाधान किया जा सके.

योगी को आगे बढ़ाने के लिए कानून-व्यवस्था का नैरेटिव

चर्चा से परिचित लोगों के मुताबिक, 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अभियान के नैरेटिव में योगी सरकार का कानून-व्यवस्था का रिकॉर्ड और विकास कार्य अहम हिस्सा रहने की उम्मीद है.

प्रयागराज के एक RSS पदाधिकारी ने कहा कि संगठन के पदाधिकारी 2024 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं.

पदाधिकारी ने कहा, “इसका एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ RSS पदाधिकारियों के साथ अच्छे संबंध हैं. पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रचारक अनिल जी को उनके करीबी माना जाता है. पश्चिमी यूपी के प्रचारक महेंद्र जी के साथ भी उनके संबंध अच्छे माने जाते हैं. कुछ दूसरे प्रांत प्रचारकों के बारे में भी माना जाता है कि वे उनकी पसंद के लोगों में हैं.”

इस पदाधिकारी ने कहा कि वरिष्ठ RSS पदाधिकारियों के साथ योगी की बातचीत कुछ बीजेपी पदाधिकारियों की तुलना में ज्यादा व्यक्तिगत रही है.

उन्होंने कहा, “संघ के पदाधिकारियों के साथ उनकी बातचीत ज्यादा व्यक्तिगत है. संघ और मुख्यमंत्री की कोर टीम के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने की भी कोशिश हुई है. इसमें एक OSD के जरिए तालमेल बढ़ाना भी शामिल है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: BAPS एफिल टावर विवाद हिंदू vs बाकी लोगों का मुद्दा नहीं, मैं इसे गुजराती समस्या के तौर पर देखता हूं


 

share & View comments