नई दिल्ली: गुरुवार को राज्यसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो गई.
बहस की शुरुआत तब हुई जब विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘मनुस्मृति’ का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तत्व पाठ्यक्रम में शामिल किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि ‘मनुस्मृति’ (प्राचीन हिंदू कानून और सामाजिक ग्रंथ) में लिखा है कि अगर कोई शूद्र (अछूत) वेद सुन ले तो “उसके कानों में पिघला हुआ शीशा भर देना चाहिए”. अगर वह वेद पढ़े तो “उसकी जीभ काट देनी चाहिए”. और अगर वह वेद के शब्द याद रखे तो “उसका शरीर टुकड़े-टुकड़े कर देना चाहिए”. हालांकि खड़गे ने यह नहीं बताया कि वह किस पाठ्यक्रम की बात कर रहे थे. ‘मनुस्मृति’ का जिक्र NCERT, दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य सरकारी कॉलेजों के पाठ्यक्रम में मिलता है.
खड़गे की इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध और नारेबाजी की. सदन के नेता जे. पी. नड्डा ने मांग की कि खड़गे जिन उद्धरणों का जिक्र कर रहे हैं, उनकी पुष्टि की जाए.
राज्यसभा के सभापति ने पूछा कि इस विधेयक का ‘मनुस्मृति’ से क्या संबंध है. नड्डा ने कहा कि ‘मनुस्मृति’ पर की गई टिप्पणी से अशांति फैल सकती है और यह तथ्यों पर आधारित नहीं है. उन्होंने कहा कि सदन में केवल मूल ग्रंथ के उद्धरण ही पढ़े जाने चाहिए. इससे पहले भी नड्डा ने खड़गे से असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल न करने को कहा था.
लोकसभा से बुधवार को पारित इस विधेयक में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन किया गया है. इसके तहत संगठित परीक्षा अपराधों के लिए न्यूनतम सजा बढ़ाकर सात साल कर दी गई है, जिसे अधिकतम 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है. अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये किया गया है. पेपर लीक की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाने, जांच दो महीने में पूरी करने और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमा खत्म करने के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने का भी प्रावधान किया गया है.
खड़गे ने करीब एक घंटे तक भाषण दिया. उस दौरान सोनिया गांधी और कांग्रेस नेता जयराम रमेश भी सदन में मौजूद थे. उन्होंने पूछा कि सरकार ने कानून में संशोधन करने के लिए दो साल इंतजार क्यों किया.
उन्होंने कहा, “अगर आपको यही करना था तो 2024 में क्यों नहीं किया. अब दो साल बाद क्यों कर रहे हैं. क्योंकि उस समय आप राजनीति करना चाहते थे.” उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान भी पेपर लीक का मुद्दा उठाया था.
खड़गे ने कहा कि यह विधेयक पेपर लीक रोकने के लिए कोई मजबूत व्यवस्था नहीं देता. उन्होंने कहा, “इस विधेयक में पेपर लीक होने से रोकने का कोई मजबूत तंत्र नहीं है. आपने सिर्फ आंकड़े बदल दिए हैं.” उन्होंने इसे “सड़कों पर उतरे छात्रों और युवाओं को शांत करने की कोशिश” बताया.
उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में 152 पेपर लीक हुए हैं और मौजूदा सरकार के दौरान 1.25 लाख छात्रों ने आत्महत्या की है. उन्होंने कहा कि NEET का पेपर 2015, 2016, 2021, 2024 और 2026 में लीक हुआ और 2024 मामले का मुख्य आरोपी जमानत पर बाहर है.
नियुक्तियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “प्रोफेसर और कुलपति चुनने का सिर्फ एक ही मापदंड है कि उनका RSS से संबंध है या नहीं.” उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों में 30 लाख से ज्यादा पद खाली हैं. उन्होंने इन रिक्तियों को आरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि इनमें से आधे पद अनुसूचित जाति के लोगों को मिलेंगे.
20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए, जब दिल्ली पुलिस पर जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन इस्तेमाल करने का आरोप लगा था, खड़गे ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल की रिपोर्ट में पैलेट से लगी चोटों की पुष्टि हुई है. हालांकि सरकार ने पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया है.
खड़गे ने पूछा, “20 जुलाई को लाठीचार्ज और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? पुलिस, CRPF और RAF किसके नियंत्रण में आते हैं?” उन्होंने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसका जवाब दें या इस्तीफा दें.
उन्होंने कहा, “प्रदर्शन के बाद से गृह मंत्री संसद में क्यों नहीं आए? क्या उनका मुंह सिल दिया गया है?” उन्होंने कहा, “आप कमरे में बैठकर जवाबदेही से बच रहे हैं, लेकिन हम आपको बाहर लाकर जवाब मांगेंगे.”
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार वही काम पूरा कर रही है जो UPA सरकार अधूरा छोड़ गई थी. उन्होंने पूछा, “जब UPA की सरकार थी तब कांग्रेस ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी क्यों नहीं बनाई?” उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में सरकार पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और नए कानून के तहत मुकदमा शुरू हो चुका है. नड्डा ने भी कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वह मानसून सत्र में बाधा डाल रहा है.
टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र और उनके परिवार “टूटे हुए सपनों” के साथ रह गए हैं. उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के सांसदों पर इसका असर नहीं पड़ता क्योंकि उनके बच्चे विदेश में पढ़ते हैं. उन्होंने कहा, “उन्हें सिर्फ ‘मन की बात’ समझ आती है, ‘जन की बात’ नहीं.”
बीजेपी सांसद बृज लाल ने गृह मंत्री अमित शाह का बचाव करते हुए कहा कि शाह “देश के पहले गृह मंत्री हैं जो सीमा पर जाकर सैनिकों से मिले.” वहीं विपक्षी सांसदों ने छात्र आंदोलन को कथित विदेशी फंडिंग मिलने संबंधी टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से माफी मांगने की भी मांग की.
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