नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह विवादित धार भोजशाला/कमाल मौला परिसर के पास स्थित एक जमीन मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए उपलब्ध कराए.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने राज्य सरकार को जरूरी व्यवस्था करने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि खसरा नंबर 596, जो विवादित परिसर के पास स्थित दरगाह की जमीन बताई गई है, वहीं नमाज अदा की जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई 2026 के अपने अंतरिम आदेश को स्पष्ट करते हुए कहा, “मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक खसरा नंबर 596, जो दरगाह की जमीन बताई गई है, पर नमाज अदा करने की अनुमति दी जाए.” अदालत ने राज्य सरकार को अपने आदेश का पालन करते हुए जरूरी इंतजाम करने का भी निर्देश दिया.
यह आदेश मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर एक आवेदन पर आया. यह आवेदन उन अपीलों में दायर किया गया था जिनमें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 15 मई के फैसले को चुनौती दी गई है. हाई कोर्ट ने विवादित भोजशाला/कमाल मौला परिसर का धार्मिक स्वरूप मां सरस्वती को समर्पित भोजशाला मंदिर बताया था.
मुस्लिम पक्ष ने शुक्रवार की नमाज के लिए पास की जगह देने की मांग की थी. उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के 14 जुलाई के अंतरिम आदेश के तहत उन्हें विवादित परिसर से करीब एक किलोमीटर दूर जाकर नमाज पढ़नी पड़ रही थी.
अदालत ने कहा कि उसके सामने रखे गए साइट प्लान से पता चलता है कि खसरा नंबर 596 तक जाने के लिए अलग और स्वतंत्र रास्ता है, इसलिए यह जगह इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त है.
अदालत ने कहा, “हमारे सामने पेश किए गए साइट प्लान से पता चलता है कि खसरा नंबर 596 तक अलग और स्वतंत्र पहुंच मार्ग है. इसलिए यह जगह उपयुक्त दिखाई देती है. यह विवादित परिसर के बिल्कुल पास है.”
14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने या 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा तय पूजा व्यवस्था को बहाल करने से इनकार कर दिया था. हालांकि अंतरिम व्यवस्था के तौर पर मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक विवादित परिसर के पास स्थित एक अलग खुली जगह पर नमाज अदा करने की अनुमति दी थी.
अदालत ने साफ किया था कि यह व्यवस्था अस्थायी होगी और अंतिम फैसला अपीलों के नतीजे पर निर्भर करेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) उसकी पूर्व अनुमति के बिना विवादित परिसर में किसी भी तरह का ढांचागत बदलाव नहीं करेगा.
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें विवादित स्मारक का धार्मिक स्वरूप मां सरस्वती को समर्पित भोजशाला मंदिर बताया गया था.
हाई कोर्ट ने 2003 की ASI व्यवस्था को भी उस हद तक रद्द कर दिया था, जहां वह परिसर के अंदर हिंदू पूजा को सीमित करती थी और मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार की नमाज की अनुमति देती थी. साथ ही हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और ASI को स्मारक के प्रशासन और प्रबंधन पर फैसला लेने का निर्देश दिया था, जबकि इसके संरक्षण की पूरी जिम्मेदारी ASI के पास ही रहेगी.
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