Thursday, 7 July, 2022
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श्रमिक ट्रेन की गिनती और मांग को लेकर ट्विटर पर भिड़े पीयूष गोयल और भूपेश बघेल, मजदूरों की वापसी बनी राजनीति का अखाड़ा

देश के विभिन्न राज्यों में मजदूरों के फंसे होने और उनकी वापसी को लेकर भाजपा और कांग्रेस सरकार आमने- सामने आ गई है. मामले ने तब तूल पकड़ा जब रेल मंत्री पीयूष गोयल और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मजदूरों और ट्रेनों की गिनती को लेकर ट्विटर पर भिड़ गए.

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रायपुर: देश के विभिन्न राज्यों में छत्तीसगढ़ के 1.6 लाख मजदूरों के फंसे होने और उनकी वापसी को लेकर भाजपा और प्रदेश की कांग्रेस सरकार आमने- सामने आ गई है. प्रवासी मजदूरों की वापसी और 21 ट्रेनों के इंतजाम के दावे को लेकर भाजपा ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया है और आरोप लगाया है कि राज्य की भूपेश बघेल सरकार फंसे हुए मजदूरों का सही आंकड़ा नही दे रही है और इस मुद्दे की वास्तविकता छुपा रही है.

भाजपा का कहना है कि राज्य सरकार फंसे हुए मजदूरों की संख्या 1.6 लाख बता रही है लेकिन प्रवासी मजदूरों का आंकड़ा 3 लाख से भी अधिक है. भाजपा नेताओं का दावा है कि सरकार यदि अपने आंकड़े के अनुसार भी चलती है तो1.6 लाख मजदूरों को 21 ट्रेनों से वापस लाना संभव नहीं है.


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विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने दिप्रिंट से कहा, ‘सरकार मजदूरों को लेकर जो आंकड़े पेश कर रही है उससे लग रहा है कि उसको वास्तविक स्थिति का ज्ञान नही है. गलत आंकड़े और राजनीतिक कलाबाजी से राज्य सरकार किसी प्रकार जनता में अपनी खोती जा रही साख को बचाए रखना चाहती है.’

वह आगे कहते हैं, ‘केंद्रीय रेल मंत्री के बयान से साफ हो गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने आवश्यकता से बहुत कम ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनों की मांग केंद्र सरकार से की थी.’

कौशिक कहते हैं, ‘भूपेश बघेल सरकार ने आश्वासन देकर मजदूरों को बीच मझधार में ही छोड़ दिया जबकि केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है वह राज्यों की सहायता के लिए 300 से अधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेन रोजाना चलाने को तैयार है.’

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ट्विटर वार

मामले ने तब तूल पकड़ा जब केंद्रीय रेलमंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा, गैर भाजपा शासित राज्यों जिनमें प बंगाल, झारखंड, छ्त्तीसगढ़ और राजस्थान ने दूसरे राज्यों में फंसे अपने मजदूरों की वापसी के लिए पर्याप्त संख्या में ट्रेन चलाने की अनुमति नहीं दी है.’

पीयूष ने ट्वीट किया, ‘ केंद्र सरकार ने मजदूरों की वापसी के लिए 1200 ट्रेनें रिज़र्व कर दी हैं लेकिन अभी तक इन राज्यों ने अपने यहां ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की अनुमति नही दे रहे हैं जिससे श्रमिकों को घर से दूर कष्ट सहना पड़ रहा है.

हालांकि, भाजपा के इस आरोप का जवाब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर दिया. बघेल ने कहा ‘छत्तीसगढ़ ने 30 ट्रेन मांगी थीं लेकिन अभी तक हमें सिर्फ 14 ही मिली हैं. ट्रेनों के लिए हमने करीब 1.17 करोड़ रुपए का भुगतान भी रेलवे को कर दिया गया है. रेलवे या किसी अन्य राज्य की ओर से कोई प्रस्ताव हमारे पास लंबित नही है. केंद्रीय रेल मंत्रीजी आपका बयान तथ्यहीन और आधारहीन है.’

पीयूष गोयल और भूपेश बघेल के ट्वीट वार के बीच, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और विधायक शिवरतन शर्मा ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार कोरोना की रोकथाम और फंसे हुए श्रमिकों की वापसी के नाम पर ठोस काम करने के बजाय टाइम पास कर रही है.

शर्मा ने दि प्रिंट को बताया, ‘राज्य सरकार के अनुसार 1.60 लाख श्रमिक लॉकडाउन के चलते विभिन्न प्रदेशों में फंसे हुए हैं जबकि मजदूरों का वास्तविक आंकड़ा 3 लाख से भी अधिक है. मजदूरों की वापसी के नाम पर प्रदेश सरकार ने केंद्र से 21 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग की लेकिन इन रेलगाड़ियों की संख्या श्रमिकों की संख्या से काफी कम है.’


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हालांकि बघेल ने पीयूष गोयल को ट्वीट द्वारा दिए जवाब में कहा है कि राज्य सरकार ने 30 ट्रेनों के लिए भुगतान किया है फिरभी भाजपा नेताओं ने मांग की कि प्रदेश सरकार बताए की उसने केंद्र से कितनी ट्रेनों की मांग की है.

बता दें कि बघेल ने ट्वीट कर यह भी जानकारी दी है कि इन ट्रेनों के आने के बाद हम बचे हुए श्रमिकों का हिसाब लगाकर ज़रूरत ले हिसाब से और ट्रेनों की अनुमति मांगेंगे. बघेल ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि अनियोजित लॉकडाउन की वजह से ही श्रमिक मुसीबत में फंसे फिर उनसे टिकट के पैसे भी मांगे गए.

छ्त्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि उनकी सरकार पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के कहने पर ही मजदूरों का किराया चुका रही है.

भूपेश बघेल ने पीयूष गोयल को जवाब देते हुए एक अन्य ट्वीट में कहा आप सार्वजनिक रूप से गलत बयानी कर रहे हैं. मजदूर जो कष्ट और पीड़ा झेल रहे हैं उसके लिए उत्तरदायित्व राज्य नहीं हैं.

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