मुंबई: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने के लिए दिल्ली पहुंचे अपने 9 में से 6 सांसदों के साथ, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) एक और टूट की कगार पर पहुंच गई है.
ये सांसद – जिनकी संख्या दल-बदल विरोधी कानून के सख्त प्रावधानों से बचने के लिए पर्याप्त है – अलग समूह बनाकर मान्यता मांग सकते हैं, या फिर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय कर सकते हैं.
यह नया घटनाक्रम शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस से कुछ ही दिन पहले सामने आया है.
मंगलवार देर रात हाई-वोल्टेज राजनीतिक ड्रामा तब शुरू हुआ जब सांसद संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम), संजय दिना पाटिल (मुंबई नॉर्थ ईस्ट), संजय जाधव (परभणी), नागेश अष्टिकार (हिंगोली), ओमराजे निम्बालकर (धाराशिव) और भाऊसाहेब वाघचौरे (शिर्डी) दिल्ली पहुंचे, जहां कुछ सूत्रों के मुताबिक उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की.
बागी विधायकों की संख्या और नामों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे, लेकिन ज्यादातर रिपोर्टों में कहा गया कि राजाभाऊ वाजे (शिर्डी), अनिल देसाई (मुंबई नॉर्थ सेंट्रल) और अरविंद सावंत (मुंबई साउथ) ही फिलहाल उद्धव ठाकरे के साथ हैं.
शिवसेना (यूबीटी) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया है कि हर बागी सांसद को पक्ष बदलने के लिए 15 करोड़ रुपये एडवांस दिए जा रहे हैं.
अपना सपना मनी..मनी..!
Apna Sapna Money Money!
It’s shocking and revolting that Maharashtra MPs are reportedly being offered ₹15 crore each tonight to switch sides.@Dev_Fadnavis
— Sanjay Raut (@rautsanjay61) June 16, 2026
यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि हिंगोली के सांसद नागेश अष्टिकार शिवसेना यूबीटी से अलग हो रहे हैं. हालांकि राउत ने दावा किया कि अष्टिकार अभी भी हिंगोली में हैं.
Media ची कमाल आहे,
नाशिक चे खासदार राजाभाऊ वाजे
हे दिल्लीत उद्योग समिती च्या बैठकी साठी निघाले आहेत
आणि इकडे बातम्या वेगळ्याच दाखवत आहेत
नागेश अष्टेकर हिंगोली खासदार
म्हणाले, मी हिंगोलीत आहे पण हे लोक माझी खोटी सही करू शकतात!
आता हे जे लोक आहेत…
त्याना यावेळी जनता आणि…— Sanjay Raut (@rautsanjay61) June 17, 2026
लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के मुख्य सचेतक अनिल देसाई ने गुरुवार को पार्टी सांसदों की बैठक बुलाई है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगर अलग हुआ गुट नया समूह बनाता है तो पार्टी अदालत का रुख करेगी.
मंगलवार देर रात शिवसेना (यूबीटी) के सांसद और लोकसभा में पार्टी नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा कि किसी भी अलग समूह को मान्यता नहीं दी जानी चाहिए.
अपने पत्र में सावंत ने कहा, “शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) लोकसभा में अपने अधिकृत नेता और व्हिप के माध्यम से एक ही राजनीतिक दल के रूप में मान्यता प्राप्त है और किसी भी कथित गुट या अलग हुए समूह को, जो पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करे, कोई अलग मान्यता, दर्जा, विशेषाधिकार या सुविधा नहीं दी जानी चाहिए.”
उन्होंने लिखा, “अगर ऐसी कोई मांग आती है, तो उस पर कोई फैसला लेने से पहले शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए.”
अपने पत्र में सावंत ने यह भी कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची में 2003 के संशोधन के बाद, दल के विभाजन का कानूनी प्रावधान अब मौजूद नहीं है.
शिवसेना (यूबीटी) के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि शिंदे गुट पिछले दो साल से उनके सांसदों को तोड़ने की कोशिश कर रहा है.
इस महीने की शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस में हुई टूट के बाद शिवसेना (यूबीटी) में भी ऐसी ही टूट की अटकलें और तेज हो गई हैं.
रविवार को पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने निवास मातोश्री में सांसदों की बैठक बुलाई थी. 9 में से सिर्फ 4 सांसद पहुंचे थे और बाद में राउत के इस दावे पर बहुत कम लोगों ने भरोसा किया कि बाकी सांसद ऑनलाइन शामिल हुए थे. दिलचस्प बात यह है कि संजय दिना पाटिल मातोश्री में हुई उस बैठक में मौजूद थे.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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