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Wednesday, 24 June, 2026
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मान के ‘बेअदबी’ वीडियो विवाद ने पकड़ा तूल, फॉरेंसिक रिपोर्ट में कथित हेरफेर के आरोप में दो गिरफ्तार

एफआईआर में आरोप है कि खुद को पंजाब सरकार का अधिकारी बताने वाले लोगों ने दबाव बनाया, रिपोर्ट के ड्राफ्ट में कई बार बदलाव कराए गए और पहले से तय नतीजे के पक्ष में फॉरेंसिक राय देने के लिए 10 लाख रुपये की रिश्वत दी गई.

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चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर कथित बेअदबी (सैक्रिलेज) से जुड़े वीडियो विवाद ने मंगलवार को नया मोड़ ले लिया. गुरुग्राम पुलिस ने एक एफआईआर दर्ज की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री को क्लीन चिट देने के लिए पेश की गई फॉरेंसिक रिपोर्ट दबाव में और पहले से तय मकसद के साथ तैयार कराई गई थी.

गुरुग्राम पुलिस के बयान में सबसे गंभीर आरोपों में से एक वित्तीय लेनदेन का है. पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि रिपोर्ट तैयार कराने के लिए करीब 10 लाख रुपये नकद दिए गए थे. साथ ही इस काम में कथित रूप से शामिल अन्य लोगों को भी अलग-अलग माध्यमों से भुगतान किया गया.

गुरुग्राम पुलिस ने मंगलवार देर रात जारी बयान में कहा कि विवादित वीडियो से जुड़े “फर्जी फॉरेंसिक और साइबर विश्लेषण रिपोर्ट” हासिल करने की कथित साजिश में शामिल दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

पुलिस ने इस मामले को “बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण” बताते हुए कहा कि यह एक ऐसी कथित साजिश से जुड़ा है, जिसका मकसद वायरल वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की पहचान से इनकार करना और उससे जुड़े आरोपों को झूठा साबित करना था.

यह घटनाक्रम उस दावे के कुछ दिनों बाद सामने आया है, जिसमें मान ने अकाल तख्त के निष्कर्षों को खारिज करते हुए कहा था कि उनकी सरकार द्वारा वीडियो का “1,191 एंगल से” विश्लेषण कराया गया और उसमें साबित हुआ कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं.

विवाद की शुरुआत इसी साल हुई थी, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था. इसमें मान कथित तौर पर सिख गुरुओं की तस्वीरों पर शराब छिड़कते हुए और अन्य कथित बेअदबी वाले कृत्य करते हुए दिखाई दिए थे.

सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने जनवरी में मुख्यमंत्री को तलब किया था. मान ने कहा था कि वीडियो फर्जी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाया गया है.

बाद में अकाल तख्त ने कहा कि उसने भारत सरकार से मान्यता प्राप्त दो प्रयोगशालाओं से फॉरेंसिक जांच कराई थी. इन जांचों में वीडियो से छेड़छाड़ या AI से बनाए जाने का कोई सबूत नहीं मिला. इन निष्कर्षों के आधार पर अकाल तख्त ने 15 जून को मान को “गुरु दोखी” और “खालसा पंथ विरोधी” घोषित कर दिया था.

इसके कुछ दिन बाद मान ने एक वीडियो बयान जारी कर कहा कि पंजाब सरकार की ओर से कराई गई नई जांच में यह साबित हुआ है कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं.

गुरुग्राम पुलिस के अनुसार, पुलिस उपायुक्त (अपराध) की निगरानी में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद गुरुग्राम में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

गिरफ्तार लोगों की पहचान 25-वर्षीय अरुण मेहंदरू, निवासी अग्रसेन कॉलोनी, सिरसा और 25-वर्षीय अंकित, निवासी खरक गागर गांव, जिला जींद, के रूप में हुई है.

पुलिस ने बताया कि दोनों से कथित फर्जी फॉरेंसिक और साइबर रिपोर्ट तैयार करने, रिपोर्ट जारी करने वाली संस्थाओं की विश्वसनीयता, इस मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान के बारे में पूछताछ की जा रही है.

पुलिस के बयान के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, दस्तावेज़ और अन्य सबूतों की भी वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है.

पंजाब सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

एफआईआर में क्या आरोप लगाए गए हैं

यह एफआईआर सिरसा निवासी जसप्रीत सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई. जसप्रीत डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर जांच और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के विश्लेषण का काम करते हैं.

पुलिस के अनुसार, जसप्रीत ने एक रिपोर्ट तैयार कराने के लिए पंचकूला में फॉरेंसिक लैब चलाने वाले मेहंदरू से संपर्क किया था. इसके बाद मेहंदरू ने पहली रिपोर्ट के समर्थन में दूसरी रिपोर्ट तैयार कराने के लिए अंकित से संपर्क किया.

एफआईआर के अनुसार, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने खुद को पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिकारी बताकर उनसे संपर्क किया और वायरल वीडियो से जुड़ी फॉरेंसिक रिपोर्ट ऐसी तरह से तैयार कराने को कहा, जिससे पहले से तय निष्कर्ष को समर्थन मिल सके.

उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बताया गया था कि यह रिपोर्ट पंजाब के मुख्यमंत्री से जुड़े विवादित वीडियो के संबंध में चाहिए, जो सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा का बड़ा विषय बन चुका था.

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे ऐसे निष्कर्ष तैयार कराने को कहा गया, जिनसे यह साबित किया जा सके कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मुख्यमंत्री नहीं है और वीडियो से जुड़े सभी आरोपों को झूठा बताया जा सके.

एफआईआर के अनुसार, उन्होंने कई बार संबंधित लोगों को बताया कि उपलब्ध सामग्री किसी ठोस फॉरेंसिक निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं है.

शिकायतकर्ता ने एफआईआर में कहा, “मैंने साफ तौर पर बताया था कि उपलब्ध सामग्री इस बात पर कोई अंतिम फॉरेंसिक या वैज्ञानिक निष्कर्ष निकालने के लिए उपयुक्त नहीं है कि वीडियो एआई से बनाया गया है, बदला गया है या उसमें हेरफेर की गई है. मेरी आपत्तियों के बावजूद मुझ पर लगातार दबाव डाला गया कि मैं पहले से तय निष्कर्ष का समर्थन करने वाली रिपोर्ट दूं.”

शिकायतकर्ता ने आगे आरोप लगाया कि मकसद किसी स्वतंत्र वैज्ञानिक राय को हासिल करना नहीं था.

उन्होंने कहा, “उद्देश्य स्वतंत्र वैज्ञानिक राय लेना नहीं था, बल्कि पहले से तय निष्कर्ष वाली रिपोर्ट हासिल करना था.”

एफआईआर में आगे कहा गया है, “रिपोर्टें तैयार और संशोधित की जा रही थीं, जबकि उनकी सामग्री को लेकर लगातार निर्देश और सुझाव दिए जा रहे थे.”

शिकायत के अनुसार, इस मामले को सामान्य तकनीकी जांच की तरह नहीं देखा जा रहा था, बल्कि इसके व्यापक प्रभाव थे.

एफआईआर में शिकायतकर्ता के हवाले से कहा गया है, “यह किसी आम नागरिक से जुड़ा मामला नहीं था. यह पहले ही राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक महत्व का विषय बन चुका था और पहले से तय निष्कर्ष वाली रिपोर्ट हासिल करने की कोशिश की जा रही थी.”

आरोप है कि रिपोर्टों में बार-बार बदलाव करवाने की मांग की गई ताकि उन्हें मनचाहे निष्कर्ष की ओर मोड़ा जा सके.

जसप्रीत ने पुलिस को यह भी बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि जिन दो लैब से रिपोर्ट हासिल की गई थीं, वे सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त थीं या नहीं.

राजनीतिक आरोपों ने पकड़ी रफ्तार

गिरफ्तारियों के बाद उन आरोपों को नई राजनीतिक अहमियत मिल गई है, जो पिछले कुछ दिनों से पंजाब की राजनीति में चर्चा का विषय बने हुए थे.

16 जून को वरिष्ठ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने एक्स पर दावा किया था कि पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को विभिन्न लैब से ऐसी रिपोर्ट हासिल करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिससे यह साबित किया जा सके कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति भगवंत मान नहीं है.

दो दिन बाद, सुखबीर सिंह बादल ने चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उस अधिकारी की पहचान लुधियाना पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा के रूप में की. उन्होंने आरोप लगाया कि अकाल तख्त के निष्कर्षों के विपरीत रिपोर्ट हासिल करने की कोशिशें की जा रही थीं.

दिप्रिंट ने फोन कॉल और व्हाट्सऐप संदेशों के जरिए स्वप्न शर्मा से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की. जवाब मिलने पर रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

बादल ने यह सवाल भी उठाया कि मुख्यमंत्री का रुख क्यों बदलता दिखा. उन्होंने कहा कि पहले मान वीडियो को AI से बना हुआ बता रहे थे, लेकिन बाद में यह कहने लगे कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं.

सोमवार को कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने एक्स पर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा हासिल की गई रिपोर्टें फर्जी थीं और गुरुग्राम पुलिस जल्द ही इसका खुलासा करने वाली थी.

मंगलवार को खैरा और मजीठिया, दोनों ने अलग-अलग वीडियो, स्क्रीनशॉट और अन्य सामग्री जारी की. उनका दावा था कि एफआईआर दर्ज होने की वजह बने शिकायतकर्ता जसप्रीत और पंजाब पुलिस अधिकारियों के बीच गुरुग्राम के एक होटल में रिपोर्ट तैयार करने को लेकर बैठकें हुई थीं.

मजीठिया ने कुछ कथित व्हाट्सऐप चैट भी जारी कीं. उनका दावा था कि ये बातचीत जसप्रीत और पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के बीच हुई थी. इन चैट्स से कथित तौर पर पता चलता है कि रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले उसकी भाषा में बदलाव करने के सुझाव दिए जा रहे थे.

पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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