रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, सत्तारूढ़ झामुमो (JMM) और विपक्षी भाजपा ने इसे राज्य, आदिवासी समाज और देश के लिए गर्व का क्षण बताया है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जनसेवा (पब्लिक अफेयर्स) के क्षेत्र में शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण प्रदान किया. उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने यह सम्मान ग्रहण किया.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह सम्मान उनके पिता के आजीवन संघर्ष और जनसेवा की पहचान है. उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन, आदिवासी अस्मिता, सामाजिक न्याय और वंचितों के अधिकारों के लिए शिबू सोरेन का संघर्ष ऐतिहासिक, अद्वितीय और अविस्मरणीय रहा है.
सोशल मीडिया पर जारी संदेश में हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति और केंद्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि उनके पिता ने आदिवासियों, शोषितों और मेहनतकश वर्ग के अधिकारों के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया.
झामुमो के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि यह सम्मान झारखंड की जनता, आदिवासी समुदाय और अलग राज्य आंदोलन से जुड़े लाखों लोगों के लिए गौरव की बात है.
झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने कहा कि यह सम्मान शिबू सोरेन के त्याग और समर्पण को सच्ची श्रद्धांजलि है. उन्होंने कहा कि उनका जीवन सादगी, संघर्ष और प्रेरणा का चमकता उदाहरण है.
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि शिबू सोरेन ने लोगों को नशामुक्ति, खेती, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की राह पर चलने के लिए प्रेरित किया.
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता और आदिवासी समाज की सशक्त आवाज रहे शिबू सोरेन को यह सम्मान मिलना पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है.
11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में जन्मे शिबू सोरेन, जिन्हें ‘दिशोम गुरु’ के नाम से जाना जाता था, देश के सबसे प्रभावशाली आदिवासी और क्षेत्रीय नेताओं में गिने जाते थे. उन्होंने महाजनी व्यवस्था के खिलाफ आदिवासी भूमि अधिकारों के लिए प्रसिद्ध ‘धान कटनी आंदोलन’ का नेतृत्व किया था.
पिछले वर्ष अगस्त में 81 वर्ष की आयु में उनके निधन के साथ झारखंड की राजनीति के एक महत्वपूर्ण युग का अंत हो गया था.