नई दिल्ली: सहारनपुर में पुलिस मुठभेड़ में ललन सिंह की मौत के साथ बिहार के कुख्यात “ब्रदर्स गैंग” का अंत हो गया है. सिंह परिवार के तीन भाई अब मारे जा चुके हैं और चौथा भाई जेल में बंद है. इसके साथ ही उस आपराधिक नेटवर्क का चैप्टर भी बंद हो गया, जिसने कई वर्षों तक यूपी और बिहार की पुलिस के बीच आतंक मचा रखा था. यह गैंग सहायक उप-निरीक्षक (ASI) स्तर के पुलिसकर्मियों की हत्या कर उनके सरकारी हथियार लूटने के लिए कुख्यात था.
ललन, जिसके सिर पर 1.25 लाख रुपये का इनाम था, 21 और 22 जून की रात लखनऊ स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और सहारनपुर पुलिस के संयुक्त अभियान के दौरान घायल हो गया था. उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक्स पर कहा, “उसने अपने गैंग के साथ मिलकर दो पुलिस उप-निरीक्षकों, एक बैंक कैशियर और एक सुरक्षा गार्ड समेत कुल सात लोगों की हत्या जैसी जघन्य वारदातों को अंजाम दिया. इसके अलावा सरकारी हथियार लूटने, कैश वैन लूटने और बैंक डकैती जैसी घटनाओं में भी शामिल था.”
मुठभेड़ के बारे में दिप्रिंट से बात करते हुए एसटीएफ के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमिताभ यश ने बताया कि एसटीएफ की टीम ने सरसावा-नकुड़ रोड पर ललन और उसके गैंग को रोका था. गोलीबारी के दौरान ललन को गोली लगी. उसे तुरंत सरसावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और बाद में जिला अस्पताल, सहारनपुर रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
ललन के दो भाई, रजनीश और मनीष, 2022 में वाराणसी पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ के बाद मारे गए थे. उस समय उन्होंने पुलिस पर गोलीबारी की थी, जवाबी कार्रवाई में घायल हुए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी.
यूपी पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “ललन सिंह उर्फ लल्लन मौके से भागने में सफल हो गया था. उस मुठभेड़ में उप-निरीक्षक अजय यादव की लूटी गई पिस्तौल भी आरोपी के पास से बरामद हुई थी.”
पुलिस के अनुसार, बिहार के समस्तीपुर जिले के आनंदगोलवा गांव में जन्मे ललन और उसके भाइयों ने एक दशक से भी अधिक समय पहले पूर्वांचल क्षेत्र में ऐसे पुलिसकर्मियों को निशाना बनाकर पहचान बनाई थी, जो शारीरिक रूप से मोटे थे. वे उनके सर्विस रिवॉल्वर और पिस्तौल लूट लेते थे. गैंग पर दो एएसआई स्तर के अधिकारियों की हत्या और एक अन्य को घायल करने का आरोप है.
अधिकारी ने कहा, “बिहार का ‘ब्रदर्स गैंग’ पुलिस और इंस्पेक्टरों के लिए एक बुरे सपने जैसा बन गया था. यह गैंग मुख्य रूप से पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाता था और उनके सरकारी हथियार लूटता था. गैंग को मोहिउद्दीन नगर (आनंदगोलवा गांव) के दो भाइयों ने चलाया था.”
उन्होंने बताया कि गैंग के मुख्य सदस्य चार भाई थे, जिन्होंने पूरे बिहार में आतंक मचा रखा था— गैंग का मास्टरमाइंड रजनीश सिंह, शूटर मनीष सिंह, सीधे सिपाहियों पर गोली चलाने वाला ललन सिंह और राजेश सिंह.
अधिकारी ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाने का उनका तरीका भी अजीब था. वे खास तौर पर एएसआई और सब-इंस्पेक्टरों को निशाना बनाते थे, और ऐसे पुलिसकर्मियों को चुनते थे जिनके बारे में उन्हें लगता था कि वे जवाबी हमला नहीं करेंगे.
उन्होंने कहा, “मुख्य मकसद हथियार लूटना था. वे अचानक इंस्पेक्टर पर हमला करते, उसे गोली मारते और फिर उसका सर्विस रिवॉल्वर या पिस्तौल छीनकर भाग जाते थे.”
अधिकारी के मुताबिक, भाई पुलिस अधिकारियों से लूटे गए हथियारों का इस्तेमाल बड़ी बैंक डकैतियों और हत्याओं में करते थे, ताकि पुलिस हथियारों की बैलिस्टिक जांच में उलझी रहे.
पुलिस ने बताया कि राजेश फिलहाल जेल में बंद है.
पश्चिमी यूपी में सुराग
एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि वे कई महीनों से ललन पर नजर रखे हुए थे, लेकिन उसके ठिकाने की कोई पक्की जानकारी नहीं मिल रही थी.
हालांकि, पिछले हफ्ते एसटीएफ को सूचना मिली कि ललन पश्चिमी यूपी में प्रवेश करने की योजना बना रहा है. एक सूत्र ने दिप्रिंट को बताया, “सूचना में बताया गया था कि ललन के सहारनपुर आने की संभावना है. उसे पकड़ने के लिए टीमें बनाई गईं.”
जब पूछा गया कि उसने पश्चिमी यूपी को ही क्यों चुना, तो सूत्र ने कहा कि यह इलाका इसलिए खास था क्योंकि यहां काफी पैसा घूमता है.
सूत्र ने कहा, “यहां नए कारोबार शुरू हुए हैं. गन्ना, आभूषण और गुड़ के बड़े कारोबार हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ज्यादातर व्यापार नकद में होता है. उसे पता था कि इस क्षेत्र में आने से पैसा कमाया जा सकता है.”
यूपी और बिहार पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, ललन 13 आपराधिक मामलों में वांछित था, जिनमें हत्या और आर्म्स एक्ट के मामले शामिल हैं.
2016 में उसने और उसके गैंग ने कथित तौर पर नालंदा में एएसआई भुवनेश्वर सिंह को गोली मारकर घायल कर दिया था. इसके बाद पटना में ASI सुरेश ठाकुर की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इसी तरह एएसआई आर.आर. चौधरी की भी हत्या की गई थी और तीनों मामलों में सरकारी पिस्तौल लूट ली गई थी.
ललन पर 2017 में नालंदा में पंजाब नेशनल बैंक और पटना में कैश वैन लूट के मामलों में शामिल होने का भी आरोप है.
2022 में उप-निरीक्षक अजय यादव से जुड़ी एक घटना में, पुलिस अधिकारी अपने निर्माणाधीन घर को देखने जगतपुर थाना क्षेत्र गए थे. उसी दौरान बाइक पर सवार ललन, मनीष और रजनीश ने उनका पीछा किया, उन्हें रोका, सीने में गोली मारी, उनकी सरकारी पिस्तौल और बटुआ लूट लिया और वहां से फरार हो गए.
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