चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुवार को बेअदबी वीडियो विवाद में पलटवार करने की कोशिश की. उन्होंने वीडियो के पीछे की “सच्चाई” सामने लाने का दावा करते हुए आरोप लगाया कि कनाडा में रहने वाले जगमन समरा ने एक बेहद असली दिखने वाले मास्क का इस्तेमाल कर बड़ी साजिश रची.
मोहाली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मान ने बड़ी स्क्रीन पर समरा द्वारा जारी किए गए एक अन्य वीडियो की क्लिप फ्रेम-दर-फ्रेम दिखाई. मान ने दावा किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं थे, बल्कि कोई ऐसा व्यक्ति था जिसने उनके जैसा दिखने वाला बेहद असली चेहरे वाला मास्क पहन रखा था.
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछले साल नवंबर में सबसे पहले सोशल मीडिया पर ये वीडियो फैलाने वाले समरा ने उनके जैसा दिखने वाला मास्क बनवाया था. मान ने कुछ सेकंड की एक वीडियो क्लिप भी दिखाई, जिसमें समरा कार में बैठे हुए हैं और उनके हाथ में “मान मास्क” दिखाई दे रहा है.
मान ने कहा, “आज मैं जगमन समरा का पर्दाफाश कर रहा हूं. आने वाले दिनों में मैं यह भी उजागर करूंगा कि उसे फंडिंग किसने दी, उसके पीछे कौन था और यह साजिश किसने रची.”
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई है जब दो दिन पहले गुरुग्राम पुलिस ने एक एफआईआर दर्ज की थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि पंजाब सरकार द्वारा अकाल तख्त के निष्कर्षों को चुनौती देने के लिए जिन फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्टों का सहारा लिया गया, उन्हें हासिल करने के लिए साजिश रची गई थी. इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है.
यह विवाद पिछले साल के आखिर में शुरू हुआ था, जब जगमन समरा ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो अपलोड किए थे. उसने दावा किया था कि वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति भगवंत मान हैं. महिलाओं के साथ दिखने वाले वीडियो के अलावा, एक वीडियो में “मान” सिख गुरुओं की प्रतीकात्मक तस्वीरों और जरनैल सिंह भिंडरांवाले की प्रतिमा पर कथित तौर पर शराब छिड़कते दिखाई देते हैं.
जनवरी में अकाल तख्त के सामने पेश होने के लिए बुलाए जाने पर मान ने कहा था कि वीडियो फर्जी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से बनाया गया है.
इसके बाद अकाल तख्त ने भारत सरकार से मान्यता प्राप्त दो फॉरेंसिक लैब से जांच कराई. सिख धर्मगुरुओं के अनुसार, इन लैब की रिपोर्ट में एआई से छेड़छाड़ या वीडियो में किसी तरह की हेरफेर का कोई सबूत नहीं मिला.
इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर 15 जून को पांच सिंह साहिबानों ने मान को “गुरु विरोधी” और “खालसा पंथ विरोधी” घोषित कर दिया था. साथ ही सिखों से कहा गया था कि वे उनसे कोई संबंध न रखें.
इसके बाद से विपक्षी दल एकजुट होकर मान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
‘ध्यान से देखो…उसने मास्क पहना हुआ है’
गुरुवार को मान ने समरा द्वारा अपलोड किया गया एक और वीडियो (विवादित वीडियो से अलग) फिर से चलाकर दिखाया. उन्होंने दावा किया कि एक व्यक्ति ने बेहद असली दिखने वाला मास्क पहनकर आपत्तिजनक हरकतें कीं ताकि मुख्यमंत्री की छवि खराब की जा सके. मान ने कहा, “ऐसे वीडियो चुनाव से ठीक पहले निकाले जाते हैं ताकि चुनावी नुकसान पहुंचाया जा सके.”
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्लिप का विश्लेषण एक स्वतंत्र सोशल मीडिया यूज़र ने किया था और प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने उसी के निष्कर्षों को दोहराया.
वीडियो को बार-बार रोकते हुए और अलग-अलग फ्रेम को बड़ा करके दिखाते हुए मान ने उस हिस्से की ओर इशारा किया, जिसे उन्होंने मास्क का किनारा बताया. उनका दावा था कि यह किनारा व्यक्ति की गाल की हड्डी से कान के पीछे तक दिखाई दे रहा था.
उन्होंने बड़ी की गई तस्वीर की ओर इशारा करते हुए कहा, “यह मास्क का किनारा है”. मान के अनुसार, तीन बातें साबित करती हैं कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति उनकी नकल कर रहा था.
पहली बात, उन्होंने कहा कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की गर्दन पर वह सर्जरी का निशान नहीं था जो उनके पास है. उन्होंने अपना निशान दिखाते हुए कहा, “सब जानते हैं कि बचपन से मेरी गर्दन पर सर्जरी का निशान है. इस व्यक्ति में वह पूरी तरह गायब है.”
दूसरी बात, उनका दावा था कि बड़े किए गए फ्रेम में साफ दिखाई देता है कि कथित मास्क कान के पीछे कहां लगाया गया था. मान ने कहा, “जहां मास्क लगाया गया है, वह जगह दिखाई दे रही है. अगर ध्यान से देखें तो यह गाल की हड्डी से कान के पीछे तक जाता हुआ दिखता है.”
तीसरी बात, उन्होंने कहा कि मास्क चेहरे की शक्ल तो बना सकता है, लेकिन आंखों को असली तरीके से नहीं दिखा सकता. मान के अनुसार, यही वजह है कि विवादित वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति हमेशा काला चश्मा पहने नज़र आता है.
उन्होंने दावा किया, “मास्क चेहरे की नकल कर सकता है, लेकिन आंखों की नहीं. इसलिए हर वीडियो में वह व्यक्ति चश्मा पहने दिखाई देता है.”
‘जगमन समरा के पास मास्क था’
इसके बाद मुख्यमंत्री ने एक और छोटी वीडियो क्लिप चलाई, जिसके बारे में उनका दावा था कि इसमें जगमन समरा एक वाहन के अंदर बैठे हैं और उनके हाथ में वही बेहद असली दिखने वाला “भगवंत मान मास्क” है.
मान का आरोप था कि इस छोटी क्लिप में समरा यह कहते हुए भी सुनाई देते हैं कि ऐसे मास्क को सिर्फ चेहरे पर “फिक्स” करना होता है.
मान ने कहा, “यही अपने आप में पूरी साजिश को उजागर कर देता है.” उनके मुताबिक, यह क्लिप साबित करती है कि विवादित वीडियो बनाने में इस्तेमाल किए गए कथित मास्क पर समरा का कब्ज़ा था.
उन्होंने कहा, “आज के इस खुलासे के बाद सच सामने आ गया है. अब कहने के लिए कुछ बाकी नहीं है.”
मान ने कहा कि वह और समरा कभी दोस्त नहीं थे. “वह एक ब्लैकमेलर है और हमेशा ऐसे काम करता रहता है. उसने पहले पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री (नरेंद्र सिंह) तोमर का भी ऐसा ही वीडियो बनाया था.” मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि समरा पंजाब की एक जेल से भाग गया था और नेपाल के रास्ते कनाडा पहुंच गया.
उन्होंने कहा कि जब वह पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब में थे, तब उनकी समरा से थोड़ी देर के लिए मुलाकात हुई थी. उन्होंने यह भी कहा कि वह 2016 के बाद कनाडा नहीं गए और ये सारे वीडियो 2018-19 के लगते हैं, जो कनाडा के एबॉट्सफोर्ड में किसी होटल के कमरे में शूट किए गए थे.
मान ने कहा, “एक व्यक्ति को यह मास्क पहनाया गया और संभवतः एक ही दिन में उसी कमरे में पूरी शूटिंग की गई होगी.”
राजनीतिक साजिश का आरोप
मान ने आरोप लगाया कि यह पूरा विवाद उनके खिलाफ चलाए जा रहे एक बड़े राजनीतिक अभियान का हिस्सा है. उनका दावा था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल एक साथ आ गए हैं क्योंकि वे आम आदमी पार्टी की सरकार का राजनीतिक तौर पर मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं.
उन्होंने कहा, “वे मेरे खिलाफ एकजुट हो गए हैं क्योंकि वे मुझे राजनीतिक रूप से हरा नहीं सकते.”
अकाल तख्त के उस आदेश का जिक्र करते हुए, जिसमें उन्हें “गुरु विरोधी” और “खालसा पंथ विरोधी” घोषित करने के बाद सिख समुदाय के लोगों से उनसे दूरी बनाए रखने को कहा गया था, मान ने दावा किया कि जनता की प्रतिक्रिया ने इन कोशिशों को गलत साबित कर दिया है.
उन्होंने कहा, “उन्होंने लोगों से कहा कि मुझसे न मिलें, मेरे साथ संबंध न रखें. फिर भी हज़ारों लोग मेरी रैलियों में आ रहे हैं. लोग सच जानते हैं.”
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछले विधानसभा चुनाव से पहले भी उनके खिलाफ इसी तरह की कोशिशें की गई थीं.
गुरुग्राम एफआईआर को खारिज किया
जब उनसे गुरुग्राम पुलिस द्वारा दर्ज की गई उस एफआईआर के बारे में पूछा गया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनकी सरकार द्वारा इस्तेमाल की गई रिपोर्टें दबाव और पैसे के लालच से हासिल की गई थीं, तो मान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया.
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट तैयार कराने के लिए किसी को कोई पैसा नहीं दिया गया.
जब उनसे खास तौर पर इस आरोप के बारे में पूछा गया कि पंजाब पुलिस के अधिकारी अनुकूल फॉरेंसिक रिपोर्ट हासिल करने के लिए गुरुग्राम गए थे, तो मान ने कहा कि यह कहानी भी पूरी तरह झूठी है. हालांकि, उन्होंने हरियाणा की जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए.
उन्होंने आरोप लगाया, “हरियाणा में भाजपा की सरकार है. केंद्र में भी भाजपा की सरकार है. वहां कुछ भी हो सकता है. बयान बदले जा सकते हैं, रिपोर्ट बदली जा सकती हैं और लोगों से कुछ भी कहलवाया जा सकता है.”
गुरुग्राम पुलिस ने इस मामले को “बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामला” बताया था. पुलिस के अनुसार, यह कथित तौर पर ऐसी फॉरेंसिक रिपोर्ट हासिल करने की साजिश से जुड़ा मामला है, जिनका उद्देश्य वायरल वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की पहचान से इनकार करना और उससे जुड़े आरोपों को झूठा साबित करना था.
गुरुग्राम पुलिस के मुताबिक, जांच में शामिल फॉरेंसिक संस्थानों की असलियत, वित्तीय लेन-देन, इलेक्ट्रॉनिक सबूत और अन्य कथित साजिशकर्ताओं की पहचान की जांच की जा रही है.
यह एफआईआर जसप्रीत सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई थी. जसप्रीत सिंह डिजिटल फॉरेंसिक के क्षेत्र में काम करते हैं. उनका आरोप है कि पंजाब पुलिस के अधिकारियों ने उनसे ऐसी रिपोर्ट “हासिल” करने के लिए संपर्क किया था, जिसमें कहा जाए कि विवादित वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति भगवंत मान नहीं है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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