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Thursday, 25 June, 2026
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भारतीय सेना में स्वदेशी SSS डिफेंस की एंट्री, ड्रोन से निपटने के लिए शॉटगन तैयार

यह पहली बार है जब भारतीय सेना SSS डिफेंस के प्रोडक्ट का इस्तेमाल करेगी, हालांकि कंपनी पहले ही स्नाइपर राइफलें एक्सपोर्ट कर चुकी है और अपने स्नाइपर और शॉटगन, दोनों ही मॉडल्स के लिए और विदेशी ऑर्डर पाने के करीब है.

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नई दिल्ली: भारतीय स्मॉल आर्म्स कंपनी SSS डिफेंस के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में, उसे भारतीय सेना से अपने टी-12 सेमी-ऑटोमैटिक शॉटगन के लिए कई ऑर्डर मिले हैं. इनकी डिलीवरी अगले महीने से शुरू होने वाली है.

SSS डिफेंस के सीईओ विवेक कृष्णन ने राष्ट्रीय राजधानी में दिप्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारी शॉटगन की डिलीवरी भारतीय सेना को अगले महीने से शुरू हो जाएगी.”

जब उनसे पूछा गया कि यह खरीद सेना मुख्यालय द्वारा की गई है या अलग-अलग यूनिटों द्वारा, तो उन्होंने कहा कि विभिन्न सेना इकाइयां और दो निदेशालय इसे खरीद रहे हैं.

यह पहली बार होगा जब भारतीय सेना SSS डिफेंस के किसी उत्पाद का उपयोग करेगी. SSS डिफेंस अब छोटे हथियारों के पूरे क्षेत्र में भारत का एकमात्र स्वदेशी ब्रांड बनकर उभरा है.

दिलचस्प बात यह है कि SSS डिफेंस पहले ही अपनी स्नाइपर राइफल्स का निर्यात कर चुका है और उसे अपनी स्नाइपर राइफल तथा शॉटगन मॉडलों के लिए और विदेशी ऑर्डर मिलने की भी संभावना है.

2014 से सेना बड़े पैमाने पर असॉल्ट राइफल और लाइट मशीन गन (एलएमजी) खरीद रही है. हालांकि SSS डिफेंस के पास अब असॉल्ट राइफलों की एक श्रृंखला है, जिनका इस्तेमाल एनएसजी सहित कई पुलिस बल कर रहे हैं, लेकिन जब सेना खरीद कर रही थी तब कंपनी के पास ऐसा कोई मॉडल नहीं था.

SSS डिफेंस ने अभी तक कोई लाइट मशीन गन (एलएमजी) भी नहीं बनाई है.

अपनी शॉटगन के बारे में बात करते हुए कृष्णन ने कहा कि इसका वजन लगभग 3.8 किलोग्राम है और इसकी मैगजीन में पांच राउंड रखने की क्षमता है.

SSS डिफेंस इस शॉटगन के लिए गोला-बारूद भी बनाती है और वही सप्लाई भी किया जा रहा है.

12-गेज कैलिबर में तैयार की गई और गैस-ऑपरेटेड सिस्टम पर आधारित टी-12 कई तरह के गोला-बारूद इस्तेमाल कर सकती है. इसमें कम रीकॉयल वाले प्रशिक्षण राउंड से लेकर भारी ब्रीचिंग राउंड तक शामिल हैं.

इसकी 20 इंच लंबी बैरल और मल्टी-चोक क्षमता नजदीकी लड़ाई के दौरान बेहतर नियंत्रण और अधिक दूरी पर सटीक निशाना लगाने की सुविधा देती है.

शॉटगन में पिकाटिनी रेल लगी हुई है. इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर इसमें साइट, लाइट या मिशन के अनुसार अन्य उपकरण लगाए जा सकते हैं.

इस शॉटगन की प्रभावी मारक दूरी 50 मीटर है और यह 100 मीटर तक काम कर सकती है.

कृष्णन ने कहा कि इस्तेमाल होने वाले विशेष गोला-बारूद के कारण यह शॉटगन पास आते ड्रोन को गिराने के लिए एक बेहतरीन हथियार है. इन राउंड से छोटे-छोटे छर्रे निकलते हैं.

जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब है कि पैदल सेना की एक सेक्शन (जिसमें 10 से 12 जवान होते हैं) में कम से कम दो सैनिक इस हथियार को ड्रोन गिराने के लिए लेकर चलेंगे, तो कृष्णन ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध में शॉटगन मुख्य हथियार बनकर उभरी है, जबकि एके राइफल दूसरे स्थान पर है.

उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि यूक्रेनी सेना रूसी सैनिकों को निशाना बनाने के लिए एफपीवी (फर्स्ट पर्सन व्यू) ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करती है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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