Wednesday, 5 October, 2022
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ऐसा क्या हुआ कि ममता दीदी ने राहुल गांधी का हेलीकॉप्टर भी उतरने से रोक दिया

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सिलीगुड़ी में हेलीकॉप्टर लैंड करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है.

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नई दिल्ली: कल तक हाथों में हाथ डाले फोटो खिंचाने और मोदी सरकार पर हमला करने में आगे रहने वाले राहुल गांधी और ममता दीदी के बीच तलवारें खिंच गई है. दीदी ने अपनी दादागिरी एकबार फिर दिखाई है और राहुल गांधी के हेलिकॉप्टर को उतरने से रोक दिया है. राहुल को रोके जाने की वजह मैदान की जगह को कम बताया है लेकिन ममता दीदी के बंगाल में यह पहली बार नहीं है जब किसी नेता को उन्होंने उतरने से रोका गया हो.

ममता ने अपनी ताकत इससे पहले भारतीय जनता पार्टी के मंत्रियों और नेताओं को पश्चिम बंगाल की धरती पर उतरने से रोक लगा चुकी हैं. इसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम शामिल हैं. लेकिन बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि कल तक दीदी कांग्रेस पार्टी और 22 अन्य पार्टियों के साथ महागठबंधन का प्रतिनिधित्व कर रही थीं, अब अचानक राहुल को अपने राज्य में उतरने भी नहीं देना चाह रही हैं.

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सिलीगुड़ी में हेलीकॉप्टर लैंड करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है. पश्चिम बंगाल कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी की सभा के लिए 14 अप्रैल की आमसभा के लिए हेलीकॉप्टर उतारने की मंजूरी मांगी थी. जिसे बंगाल पुलिस ने मना कर दिया है. इसके चलते हमने कांग्रेस अध्यक्ष की सारी रैली को रद्द करनी पड़ी. बंगाल कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेता अब कांग्रेस अध्यक्ष की सभा के लिए सड़क रास्ते से उन्हें लाने के लिए विचार कर रहे है. इस मामले में सिलीगुड़ी पुलिस का कहना है कि कांग्रेस पार्टी ने पुलिस मैदान में हेलीकॉप्टर उतारने की अनुमति मांगी थी. हमने उक्त मैदान में रैली की मंजूरी नहीं दी है. कांग्रेस पाटी के लोग अन्य स्थान पर रैली करने का विकल्प भी नहीं लेकर आए थे.

राहुल के हमले पर ममता बोली राहुल अभी बच्चे है

हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल के मालदा में अपनी पहली रैली में सीएम ममता बनर्जी और वाम दलों पर हमला बोला था. राहुल ने कहा था कि दोनों दलों में खास अंतर नहीं रह गया है. उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस जिस ​तरह से सरकार चला रही है जहां किसी ओर को बोलने का अधिकार नही है. ममता के राज में कोई विकास नहीं हुआ है.


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राहुल के इस हमले का पलटवार करते हुए ममता ने कहा था कि ‘वह अभी बच्चे है. राहुल ने वहीं कहा जो उन्होंने महसूस किया. मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहती.’

वहीं चुनाव घोषित होने से पूर्व राहुल गांधी ने फोन पर ममता दीदी से बात की थी और उनके प्रति अपना समर्थन व्यक्त भी किया था. उन्होंने फोन पर अपना समर्थन व्यक्त करते हुए कहा था कि पूरा विपक्ष एकजुट है और फासीवादी ताकतों को हराएगा. कांग्रेस पार्टी ममता के साथ कंधा से कंधा मिलाकर साथ लड़ेगी.

गौरतलब है कि शारदा चिटफंड घोटालों के सिलसिले में कोलकता के पुलिस आयुक्त से पूछताछ के मामले में ममता ने धरना भी दिया था. इस पर राहुल ने अपना समर्थन दिया था.

फरवरी में पवार के घर में भी साथ थे राहुल – ममता

फरवरी महीने में एनसीपी प्रमुख शरद पवार के घर पर प्रमुख विपक्षी पार्टियों की बैठक भी हुई थी. इसमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे. इस बैठक में ममता ने कहा था, ‘कोई मेरे खिलाफ लड़े तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. देश के लिए मैं अपना जीवन का बलिदान के लिए तैयार हूं.’ इस बैठक के बाद राहुल ने कहा था कि सभी विपक्षी पार्टियों का लक्ष्य है नरेंद्र मोदी सरकार को बाहर करना.

ममता की रैली में राहुल ने भेजा था अपना प्रतिनिधि

जनवरी में पश्चिम बंगाल की सीएम के बुलावे पर कोलकाता में विपक्षी पार्टियों की महारैली आयोजित हुई थी. इसे यूनाइटेड इंडिया रैली नाम दिया गया था. आम चुनावों के एलान के ठीक पहले यह पहली साझा मोदी विरोधी रैली थी. इसमें सभी 22 प्रमुख पार्टी के मुखिया मौजूद थे. इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शामिल होने के लिए ​नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा था. वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने भी अपना प्रतिनिधि भेजा था. इस रैली में राहुल की गैर मौजूदगी पर सवाल भी उठे थे. वहीं इसके पहले कर्नाटक में जेडीएस के कुमारस्वामी के मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह के पहले भी कांग्रेस,तृणमूल समेत सभी विपक्षी दल एक साथ एक मंच पर नजर आए थे.

शाह, योगी और शिवराज को भी ऐनवक्त पर नहीं दी थी अनुमति

भाजपा अध्यक्ष अ​​मित शाह,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मप्र के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के भी हेलीकॉप्टर को भी ऐनवक्त पर उतरने और रैली करने की इजाजत नहीं दी गई थी. भाजपा नेता शहनावाज हुसैन की रैली भी रोक दी गई थी.


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योगी आदित्यनाथ उत्तर बंगाल के बालुरघाट में रैली करने वाले थे. इस दौरान बंगाल सरकार ने उनके हेलीकॉप्टर को उतरने की अनुमति नहीं दी थी. इसके बाद योगी ने फोन के जरिए रैली को संबोधित किया था. वहीं बंगाल के पुरुलिया में रैली की मंजूरी नहीं मिलने के बाद यूपी के सीएम आदित्यनाथ यूपी से झारखंड होते हुए सड़क के रास्ते बंगाल पहुंचे थे. फिर उन्होंने रैली को संबोधित किया था.

वहीं इसके पहले जनवरी महीने में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अ​मित शाह के हेलीकॉप्टर को भी नहीं उतरने दिया था. इस पर बंगाल पुलिस का तर्क था कि जहां शाह अपना हेलीकॉप्टर उतारना चाहते है वहां पर लैंडिंग की व्यवस्था नहीं है. इसके बाद शाह को दूसरी जगह अपना हेलीकॉप्टर उतारना पड़ा.

इस मामले में जब ममता बनर्जी ने कहा था, ‘पीएम मोदी और अमित शाह बंगाल जीतने का सपना देख रहे है. पहले अपनी सीट के बारे में चिंता करे. भाजपा के यह बाहरी नेता है. बंगाल के नहीं है. उन्हें राज्य की संस्कृति और परंपरा के बारें में कुछ जानकारी नहीं है.’ योगी पर हमला बोलते हुए बनर्जी ने कहा था कि इतने लोग मारे गए है. यहां तक की कई जगह पुलिसकर्मीयों की हत्या कर दी गई. लोगों को मौत के घाट उतारा गया. वह खुद चुनाव हार जाएंगे. उप्र में खड़े होने की जगह तक नहीं है इसलिए वे बंगाल में घूम रहे हैं.

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