तिरुवनंतपुरम: हेमा कमेटी की रिपोर्ट के बाद पहली बार किसी महिला को अध्यक्ष चुनने के करीब एक साल बाद, एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (AMMA) एक बड़े संकट में घिर गई है. संगठन की कुछ महिला सदस्यों ने पूर्व अध्यक्ष श्वेता मेनन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने नेतृत्व को लेकर बढ़ते विवाद के बीच AMMA में “BJP का एजेंडा” लागू करने और संगठन को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की.
करीब दो हफ्ते पहले वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के बाद मेनन ने अध्यक्ष पद और AMMA की सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की थी.
शनिवार को अभिनेत्री माला पार्वती के नेतृत्व में महिला सदस्यों के एक समूह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन की पहली महिला अध्यक्ष ने एसोसिएशन के भीतर राजनीतिक और सांप्रदायिक एजेंडा चलाने की कोशिश की.
उन्होंने दावा किया कि आम सभा की बैठक में यह आरोप लगाया गया था कि मेनन ने “BJP से 2 करोड़ रुपये लिए थे.” माला के साथ अभिनेत्री अंसिबा हसन, जो संगठन की पूर्व संयुक्त सचिव रह चुकी हैं, और अभिनेत्री उषा हसीना व माया विश्वनाथ भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थीं.
माला ने एक वीडियो भी चलाया, जिसमें कथित तौर पर BJP की एक पदाधिकारी यह कहते हुए दिखाई दे रही हैं कि एक औद्योगिक समूह मेनन के जरिए AMMA को “15 करोड़ रुपये देगा.”
माला ने कहा, “यह एक राजनीतिक पार्टी की पदाधिकारी कह रही हैं कि एक बहुराष्ट्रीय कंपनी संगठन को पैसा देगी. वह (पदाधिकारी) AMMA की सदस्य भी नहीं हैं. हमें नहीं पता कि उनका AMMA से क्या संबंध है. हमें उस कंपनी से कोई पैसा नहीं चाहिए.”
उन्होंने कहा कि संगठन को अपने सदस्यों की निजी राजनीतिक सोच से कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन अगर कोई AMMA पर किसी राजनीतिक दल का एजेंडा थोपने की कोशिश करेगा, तो उसका विरोध किया जाएगा.
माला ने आगे आरोप लगाया कि पूर्व संयुक्त सचिव अंसिबा हसन को उनके खिलाफ सांप्रदायिक माहौल बनाकर इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया.
माला के मुताबिक, मेनन ने उन पर दबाव डाला था कि वे इस आरोप का समर्थन करें कि हसन फिल्म जगत के लोगों का इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश कर रही हैं. माला का आरोप है कि ऐसा न करने पर उन्हें फिल्म इंडस्ट्री से अलग-थलग करने की धमकी दी गई.
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि जो लोग दूसरों को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की कोशिश करते हैं, उन्हें इस संगठन का नेतृत्व नहीं करना चाहिए. मुझे लगता है कि केरल के प्रति मेरी जिम्मेदारी है और मैं यहां एक और ‘केरल स्टोरी’ बनने से रोकना चाहती हूं.”
एर्नाकुलम में BJP की इकाई के अध्यक्ष एडवोकेट के.एस. शैजू ने दिप्रिंट से कहा कि पार्टी को AMMA के इस विवाद की जानकारी नहीं है.
शैजू ने कहा, “BJP को इस आरोप से कोई मतलब नहीं है, क्योंकि यह संगठन के अंदर का आपसी विवाद है.”
विवादों भरा अतीत, नया संकट
1994 में बनी AMMA ने अगस्त 2025 में पहली बार किसी महिला को अपना अध्यक्ष चुना था. यह चुनाव हेमा कमेटी की रिपोर्ट के बाद कराना पड़ा, क्योंकि अगस्त 2024 में मोहनलाल के नेतृत्व वाली कार्यकारिणी ने इस्तीफा दे दिया था. इस्तीफा उस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद आया था, जिसमें मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के साथ बड़े पैमाने पर यौन उत्पीड़न और संस्थागत भेदभाव का जिक्र किया गया था.
हालांकि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दिसंबर 2019 में ही केरल सरकार को सौंप दी थी, लेकिन इसे अगस्त 2024 में सार्वजनिक किया गया.
चुनाव में श्वेता मेनन अध्यक्ष बनीं. कुक्कू परमेश्वरन महासचिव चुनी गईं. लक्ष्मी प्रिया और जयन चेरथला उपाध्यक्ष बने. उन्नी शिवपाल कोषाध्यक्ष बने, जबकि अंसिबा हसन पहले ही निर्विरोध संयुक्त सचिव चुनी जा चुकी थीं.
मौजूदा विवाद की शुरुआत इसी साल फरवरी में हुई, जब अंसिबा हसन ने लगातार आंतरिक विवादों के बाद इस्तीफा दे दिया.
विवाद की एक वजह यह थी कि उन्होंने वेन्नाला थायकट्टु श्री महादेव मंदिर ट्रस्ट द्वारा AMMA के पुनर्मिलन कार्यक्रम को प्रायोजित करने पर आपत्ति जताई थी.
हसन ने कहा कि इस मुद्दे पर उन्हें कार्यकारिणी के भीतर सांप्रदायिक टिप्पणियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा. उन्होंने आरोप लगाया कि अभिनेता टाइनी टॉम ने उन्हें “जिहादी” कहा था.
उन्होंने अभिनेत्री लक्ष्मी प्रिया पर भी उनके खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराने का आरोप लगाया. हसन का दावा है कि इसी वजह से पुलिस ने उन्हें गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा.
21 जून को कोच्चि में हुई AMMA की आम सभा की बैठक में नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला. बढ़ते वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों और आंतरिक विवादों के बीच मेनन ने घोषणा की कि वह और 17 सदस्यीय कार्यकारिणी संगठन से इस्तीफा दे रहे हैं.
इस्तीफे की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि वह कुछ लोगों के हाथों की “कठपुतली” बनकर काम नहीं करना चाहतीं.
हालांकि शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने AMMA को “नहीं छोड़ा है.” उन्होंने 21 जून के इस्तीफों के बाद बनाई गई तदर्थ समिति की वैधता पर भी सवाल उठाया.
इसके कुछ समय बाद मेनन और अभिनेता-विधायक रमेश पिशारोडी के बीच कथित फोन बातचीत की एक ऑडियो क्लिप सामने आई. इसमें कथित तौर पर मेनन यह कहती सुनाई दे रही हैं कि संगठन के कुछ सदस्यों ने मिलकर चुनी हुई कार्यकारिणी को गिराने की कोशिश की. उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछली कार्यकारिणी के खातों में गड़बड़ियां थीं.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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