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Tuesday, 29 September, 2026
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चार महीनों में सरकार के 5 आदेश वापस. क्या विजय की TVK सरकार में अफसरशाही फैसले ले रही है?

कांग्रेस समेत विजय के सहयोगी भी सवाल उठा रहे हैं कि अब वापस लिए गए फैसले राजनीतिक नेतृत्व ने लिए थे या उनमें सरकारी अधिकारियों की बड़ी भूमिका थी.

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चेन्नई: तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) की सरकार ने सत्ता संभालने के चार महीनों के भीतर पांच आदेश वापस लिए हैं. इसके बाद विपक्ष टीवीके सरकार को ‘U-turn सरकार’ कहकर निशाना बना रहा है.

सबसे हालिया मामला उस सरकारी आदेश से जुड़ा है, जिसमें सार्वजनिक (कानून और व्यवस्था) विभाग को सूचना का अधिकार (RTI) कानून के दायरे से बाहर कर दिया गया था. इस विभाग को खुफिया और सुरक्षा संगठन घोषित किया गया था.

कई लोगों और संगठनों ने कहा कि यह आदेश उस सरकार के लिए पारदर्शी नहीं था, जो पारदर्शी शासन सुनिश्चित करने का दावा करती है. यह विभाग पुलिसिंग, सार्वजनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों को देखता है.

बार-बार फैसले वापस लिए जाने के बाद आलोचकों ने इसे प्रशासन में असंगति बताया है. नई सरकार के लिए सरकारी आदेशों को वापस लेना या उनमें सुधार करना असामान्य नहीं है. लेकिन इतनी बार ऐसा होने से टीवीके सरकार में फैसले लेने की प्रक्रिया और राजनीतिक नेतृत्व तथा अफसरशाही के बीच सत्ता के संतुलन को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

और ऐसा नहीं है कि सिर्फ विपक्षी दल ही मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी पार्टी की आलोचना कर रहे हैं. कांग्रेस समेत टीवीके के सहयोगी भी सवाल उठा रहे हैं कि अब वापस लिए गए फैसले राजनीतिक नेतृत्व ने लिए थे या इनमें अधिकारियों की बड़ी भूमिका थी.

वापस लिए गए आदेशों में विजय के निजी ज्योतिषी राधन पंडित वेत्रिवेल की विशेष अधिकारी के तौर पर नियुक्ति का आदेश भी शामिल है. सरकार ने इस नियुक्ति की अधिसूचना जारी की थी, लेकिन विपक्ष और सहयोगियों की आलोचना के बाद इसे रद्द कर दिया गया.

सरकार ने तमिलनाडु में वामपंथी छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शनों पर रोक से जुड़ा एक सर्कुलर भी रद्द कर दिया. यह सर्कुलर राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) में गड़बड़ियों को लेकर देशभर में हुए प्रदर्शनों के बाद जारी किया गया था. इसमें कैंपस में होने वाले कुछ तरह के प्रदर्शनों को नियंत्रित या सीमित करने की कोशिश की गई थी. छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों के विरोध के बाद इसे वापस ले लिया गया.

एक और सर्कुलर कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों की जानकारी जुटाने से जुड़ा था, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया. अगस्त में जारी इस सर्कुलर में डिंडीगुल जिले के गुजिलियमपराई तालुक के तहसीलदार ने गांव सहायकों और राजस्व निरीक्षकों को तालुक के हर राजस्व गांव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के सदस्यों और नेताओं के नाम और पते जुटाने का निर्देश दिया था.

सर्कुलर में चेतावनी दी गई थी कि इसका पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. बताया गया कि यह आदेश इसी तालुक के चिनारावुथनपट्टी गांव में CPI(M) कार्यकर्ताओं से जुड़े जमीन विवाद के संदर्भ में आया था और इस पर राजनीतिक दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

इसके बाद टीवीके सरकार ने मेलमा SIPCOT परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी वापस ले ली. औद्योगिक पार्क के लिए जमीन अधिग्रहण के फैसले का स्थानीय लोगों ने विरोध किया था और इसे लेकर कानूनी सवाल भी उठे थे. इसके बाद सरकार ने इससे जुड़ा सरकारी आदेश रद्द कर दिया.

RTI कानून के तहत दी गई छूट वाला आदेश वापस लिए जाने के बाद टीवीके के सहयोगियों ने भी सरकार को सलाह दी कि प्रशासन को अलग तरीके से चलाने की ज़रूरत है.

रविवार को कांग्रेस नेता कार्ति पी. चिदंबरम ने एक्स पर टीवीके नेतृत्व को दोस्ताना सलाह दी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अफसरों को प्रशासन का रुख, तरीका और दिशा तय नहीं करने देनी चाहिए.

विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने टीवीके सरकार के अनुभव की कमी की ओर इशारा किया है. पार्टी ने कहा कि इन आदेशों के जरिए जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाकर इन विषयों की ओर ले जाने की कोशिश की जा रही है.

डीएमके के प्रवक्ता सैयद हफीज ने दिप्रिंट से कहा कि बार-बार आदेश वापस लेना “एक दिशाहीन सरकार और अनुभवहीन मुख्यमंत्री” का नतीजा है. उन्होंने कहा कि सरकार से गलतियां हो सकती हैं, लेकिन बार-बार ऐसा नहीं होना चाहिए.

उन्होंने कहा, “टीवीके सरकार की ओर से के. वेंकट नारायण को नई दिल्ली में तमिलनाडु सरकार का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त करने का सरकारी आदेश उस समय सामने आया, जब टीवीके मंत्री शरत कुमार का आईपीएल मैच के दौरान सफेद पाउडर इस्तेमाल करने का पुराना वीडियो सामने आया. इसलिए सरकार असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे आदेशों का इस्तेमाल करती है.”

उन्होंने आगे कहा, “27 सितंबर को करूर भगदड़ की घटना को एक साल पूरा हुआ था, लेकिन चर्चा का मुद्दा यह GO बन गया. यह जानबूझकर किया गया या संयोग था, टीवीके की अनुभवहीनता साफ है.”

राजनीतिक विश्लेषक सुनील कुमार ने आदेशों को बार-बार वापस लिए जाने के तरीके को इस संकेत के तौर पर देखा कि अफसरशाही के पास काफी ताकत है.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “नीतिगत फैसले, सुधार और उन्हें लागू करने के सुझाव अफसर दे सकते हैं, लेकिन उन्हें जनता के नजरिए को भी ध्यान में रखना चाहिए. अगर ताकत अफसरों के हाथ में हो और जनता की राय को ध्यान में न रखा जाए, तो यह अच्छे शासन की निशानी नहीं है.”

उन्होंने कहा कि कोई आदेश जारी करने से पहले सरकार को सावधानी बरतनी चाहिए और जमीनी स्थिति को समझने और उसका आकलन करने के लिए कम से कम सहयोगियों के साथ चर्चा जरूरी है. उन्होंने कहा, “खासकर जब सरकार नई हो, तो यह जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.”

आलोचकों और राजनीतिक टिप्पणीकारों ने भी सरकार की फैसले लेने की क्षमता पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने टीवीके में अनुभव की कमी और राजनीतिक माहौल की ओर इशारा किया.

शिक्षाविद और राजनीतिक टिप्पणीकार रामू मणिवन्नन ने कहा कि फैसले लेने की क्षमता अनुभव के साथ आती है और टीवीके में यह क्षमता नहीं है.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “उनके पास ऐसे अनुभवी नेता नहीं हैं, जो इन मुद्दों का आकलन कर सकें और सही तरीके से नीतिगत फैसले ले सकें. इसलिए इतने सारे फैसलों का वापस लिया जाना हैरानी की बात नहीं है.”

उन्होंने कहा, “यह शासन के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है. वे जनता को खुश करने के लिए लोकप्रिय योजनाओं के रूप में लोकप्रिय फैसले ले सकते हैं, लेकिन शासन के हिस्से के तौर पर वे महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले नहीं ले रहे हैं. इन बड़े फैसलों को वापस लेते समय भी उनमें गरिमा नहीं दिखती.”

राजनीतिक विश्लेषक ए. रामासामी ने कहा कि जनता पर असर डालने वाला कोई आदेश जारी करने से पहले सरकार को कई एजेंसियों को इसमें शामिल करना चाहिए. उन्होंने दिप्रिंट से कहा कि पट्टिनापक्कम में नए सचिवालय की घोषणा इसका एक उदाहरण है.

रामासामी ने दिप्रिंट से कहा, “किसी फैसले को लेने और आदेश तैयार करने से पहले कानूनी अधिकारियों, सरकारी अधिकारियों, अर्थशास्त्रियों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, गैर-लाभकारी संगठनों और उस क्षेत्र से जुड़े दूसरे लोगों से सलाह ली जानी चाहिए.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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